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जानिए कोरोना को लेकर उन सवालों के जवाब, जो रोज आप खुद से पूछते होंगे

जानिए कोरोना को लेकर उन सवालों के जवाब, जो रोज आप खुद से पूछते होंगे

कोरोना वायरस को लेकर कुछ खास बातों को जानना बहुत जरूरी है ताकि भ्रम के हालात न रहें.

कोरोना वायरस को लेकर कुछ खास बातों को जानना बहुत जरूरी है ताकि भ्रम के हालात न रहें.

कोरोना वायरस (Coronavirus in India) को लेकर अभी भी लोगों में कुछ भ्रम की स्थिति है. कई बार लोग सही जानकारी नहीं होने के कारण छींकें, खांसी, जुकाम जैसे फ्लू के लक्षण वालों लोगों के साथ ही अजीब व्‍यवहार कर रहे हैं. आइए जानते कुछ ऐसे सवालों के जवाब जो कोरोना संकट के बीच हमारा जानना बेहद जरूरी है...

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    कोरोना वायरस तक पूरी दुनिया में 31 लाख से ज्‍यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. इनमें से 2.1 लाख से ज्‍यादा लोगों की मौत हो चुकी है. ऐसे में कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर सही के साथ गलत जानकारियां भी सोशल मीडिया (Social Media) के जरिये लोगों तक पहुंच रही हैं. गलत जानकारियों के चक्‍कर में कुछ लोग बिना सोचे-समझे ही अपने आसपास के लोगों के साथ भेदभाव करने लग रहे हैं. ऐसे में सरकार ने सभी से अपील की है कि सिर्फ खांसी-जुकाम या छींके आने पर लोगों को अपराधी की नजर से न देखें. वहीं, दवाइयों को लेकर भी लोगों में भ्रम की स्थिति है. आइए जानते हैं कि कोरोना टेस्‍ट (Corona Test) के नतीजे कितनी देर में आते हैं, अगर किसी को संक्रमण हो गया है तो वो क्‍या करे और क्‍या छींक आना कोरोना का लक्षण है...

    सवाल- क्या छींक या खांसी-जुकाम का मतलब मुझको कोरोना संक्रमण हुआ है?
    - स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्‍यक्ति को सिर्फ खांसी, जुकाम और छींक आना संक्रमण का लक्षण नहीं हैं. वहीं, इनमें से कोई एक लक्षण होने पर भी ये नहीं माना जा सकता है कि उसे कोविड-19 है. करने को कहा है. यहां तक कि गले में खराश, सिरदर्द, आंखों का लाल होना और आंखों से पानी आना भी कोरोना वायरस का लक्षण नहीं हैं. ये सभी लक्षण फ्लू में भी उभरते हैं.

    कोविड-19 में सूखी खांसी, सांस लेने में तकलीफ और बुखार प्रमुख लक्षण हैं. फ्लू में माइल्‍ड इनफेक्‍शन गरम पानी पीने या भाप लेने से ठीक हो जाता है. लेकिन, किसी भी समस्या के लगातार बने रहने या बढ़ने पर एहतियात बरतते हुए अपने डॉक्टर से जरूर बात कर लेनी चाहिए.

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    अभी तक कोरोना वायरस का कोई एक कारगर इलाज नहीं मिला है.


    सवाल- कोरोना वायरस का इलाज किन दवाओं से हो रहा  है?
    - वैज्ञानिक और शोधकर्ता दिनरात कोरोना वायरस का कारगर इलाज व वैक्‍सीन बनाने में जुटे हैं. कई देशों में वैक्‍सीन बना ली गई है, लेकिन अभी उनके क्‍लीनिक या ह्यूमन ट्रायल चल रहे हैं. वहीं, अभी तक दुनियाभर में डॉक्‍टर्स अलग-अलग दवाइयों का इस्‍तेमाल कर रहे हैं. कुछ देशों के डॉक्‍टर्स मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन को कारगर मान रहे हैं तो कुछ देशों में एचआईवी एड्स की दवा का इस्‍तेमाल इलाज में किया जा रहा है.

    कुछ डॉक्‍टर्स बुखार और दर्द में इस्‍तेमाल की जाने वाली दवा पैरासिटामोल को भी कारगर मान रहे हैं. कुछ देशों में मलेरिया, एचआईवी और इंफ्लूएंजा की दवाइयों के कॉम्बिनेशन के जरिये कोरोना का इलाज किया जा रहा है. वहीं, कई देशों में संक्रमण से उबर चुके लोगों के प्‍लाज्‍मा से नए गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है. हालांकि, ये भी अभी क्‍लीनिकल ट्रायल के चरण में है. यहां ध्‍यान रहे कि लक्षण नजर आने पर बिना डॉक्‍टर की सलाह के कोई भी दवा लेकर खुद ही इलाज शुरू नहीं करना है क्‍योंकि ये जानलेवा भी साबित हो सकता है.

    सवाल - अगर कोरोना का टेस्ट कराने जाएं तो उसका रिजल्ट कितनी देर में मिलता है?  
    - संक्रमण की जांच के लिए दो तरह के कोरोना टेस्‍ट किए जा रहे थे. पहला रैपिड एंटीबॉडी टेस्‍ट, जिसे सटीक नतीजे नहीं आने के कारण फिलहाल बंद कर दिया गया है. इसके अलावा भारत में कोविड-19 की जांच के लिए रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलिमरेस चेन रिएक्शन (RT-PCR) टेस्ट किया जा रहा है.

    इसमें संदिग्‍ध व्‍यक्ति के नाक या गले से स्‍वाब लेकर उसमें कोरोना वायरस की जांच की जाती है. इसमें आरएनए के डीएनए में रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन को जोड़ते हुए वायरस का पता लगाया जाता है. इसी टेस्‍ट से वास्‍तव में पता लगता है कि संदिग्‍ध में वायरस मौजूद है या नहीं. इसके नतीजे आने में 12 से 24 घंटे का वक्त लगता है. आरटी-पीसीआर टेस्ट की महंगी होने के कारण इसमें खर्च भी ज्‍यादा आता है.

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    अगर कोई व्‍यक्ति कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है और उसे घर में ही आइसोलेट होने की सलाह दी जाती है तो उसे कुछ बातों का बहुत ख्‍याल रखना चाहिए ताकि घर के बाकी सदस्‍य संक्रमित न हों.


    सवाल - अगर मुझको कोरोना टेस्‍ट पॉजिटिव होने की आशंका हो तो क्या करूं? 
    - अगर किसी व्‍यक्ति में संक्रमण के सभी लक्षण हों तो उसे सबसे पहले भारत सरकार की ओर से जारी हेल्‍पलाइन नंबर 1075 या 011-23978046 पर कॉल करके परामर्श लेना चाहिए. इसके बाद कोरोना टेस्‍ट पॉजिटिव आता है तो मरीज को कुछ एहतियात जरूर बरतनी चाहिए. सबसे पहले अगर व्‍यक्ति में संक्रमण के मामूली लक्षण हैं और उसे घर पर ही रहकर खुद को क्‍वारंटीन करने की सलाह दी गई है तो परिवार के किसी भी सदस्‍य से संपर्क में ना रहें. मरीज के लिए अलग कमरे में व्‍यवस्‍था की जानी चाहिए. पालतू जानवर के भी संपर्क में आने से बचें.

    अलग बाथरूम का इस्तेमाल करें. अगर घर में एक ही बाथरूम है तो रोगी के इस्तेमाल करने के बाद सैनिटाइज करें. रोगी और देखभाल करने वाले मास्क व ग्‍लव्‍स का इस्तेमाल करें. मरीज का कमरा हवादार होना चाहिए. इन सभी बातों का 22 दिन तक ख्‍याल रखें. इसके साथ ही घर के अन्‍य सदस्‍यों का भी कोरोना टेस्‍ट कराएं. हालांकि, कुछ ऐसे मामले भी आए हे हैं, जिनमें कोई लक्षण नजर नहीं आए और वो संक्रमित पाए गए. ऐसे में सभी बचाव उपायों का हर व्‍यक्ति को विशेष ध्‍यान रखना चाहिए.

    सवाल- कोरोना वायरस सतह पर कितनी देर तक जिंदा रहता है?
    - आजकल बाजारों, सड़कों, सार्वजनिक जगहों, सोसाइटी और एटीएम मशीन तक को सैनिटाइज किया जा रहा है. वहीं, जिन दफ्तरों में काम चल रहा है, वहां कर्मचारियों के आने से पहले पूरे दफ्तर की अच्छे से सफाई की जा रही है. कीटनाशक छिड़के जा रहे हैं. दरअसल, कोरोना वायरस खांसने या छींकने पर मुंह से निकलने वाली छोटी-छोटी बूंदो से फैलता है. वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के मुताबिक, ये वायरस मेटल पर 72 घंटे, शीशा पर 9 एक दिन तो प्लास्टिक और फर्श पर 3 से 9 दिन तक जिंदा रह सकता है.

    हालांकि, इस वायरस के अलग-अलग सतह पर जिंदा रहने के समय को लेकर शोध अभी भी जारी हैं. वहीं, कुछ रिसर्च के मुताबिक, कोविड-19 वायरस हवा में तीन घंटे तक जिंदा रह सकता है. कुछ शोध में कहा गया है कि गत्ते पर 24 घंटे और प्लास्टिक व स्टील की सतह पर 2 से 3 दिन तक जिंदा रहता है. वहीं, तांबे की सतह पर ये वायरस चार घंटे में मर सकता है.

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