हो सकता है अब चांद पर जिएं धरती के ये अजर-अमर जीव!

मिशन चंद्रयान 2 के ज़रिए भारत की कोशिश है कि चांद की सतह और वहां के पर्यावरण के बारे में जाने. दूसरी तरफ चांद पर जीवन की संभावनाओं से जुड़ी एक बड़ी उम्मीद पैदा करती ताज़ा खबर के मुताबिक ये संभव हो सकता है. जानें कैसे.

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Updated: August 7, 2019, 5:32 PM IST
हो सकता है अब चांद पर जिएं धरती के ये अजर-अमर जीव!
एक कलाकार द्वारा बनाया गया चांद पर उतरे इज़रायल के एयरक्राफ्ट का चित्र. (स्पेसआईएल से साभार)
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Updated: August 7, 2019, 5:32 PM IST
भारत के चंद्रयान 2 मिशन का ताज़ा अपडेट ये है कि यान पृथ्वी की अंतिम कक्षा में पहुंच चुका है. हालांकि ये यान चांद की स्थितियों को समझने के मकसद से भेजा गया है, लेकिन दुनिया भर में चांद पर जीवन की संभावनाओं की तलाश के मिशन जारी हैं. बड़ी खबर ये है कि पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह पर जीवन संभव हो सकता है. बेतहाशा रेडिएशन, भीषण गर्मी, ब्रह्मांड के सबसे ठंडे तापमान और बगैर भोजन के दशकों तक जीवित रह सकने वाले तकरीबन अविनाशी जीव के लिए तो कम से कम ये कहा ही जा सकता है.

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यह बात हवाहवाई नहीं है और न ही ये किसी एलियन की बात है बल्कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले एक खास जीव के बारे में कहा जा रहा है कि वह चांद की वर्तमान स्थितियों में जीवित रह सकता है. ये क्या नया माजरा है और कौन है वो जीव? ऐसी तमाम जिज्ञासाओं का जवाब यहां पढ़िए.

करीब करीब अविनाशी इस जीव को जीवविज्ञान में टार्डिग्रैड्स सूक्ष्मजीव के नाम से जाना जाता है, जिसे माइक्रोस्कोप यानी सूक्ष्मदर्शी यंत्र की मदद से देखा जा सकता है. इज़रायल के बेरेशीट यान की यात्रा स्पॉंसर करने वाली अमेरिकी कंपनी की मानें तो अस्ल में, जब चांद की सतह पर इस यान की क्रैश लैंडिंग हुई तो उसके बाद टार्डिग्रैड्स के जीवित होने जैसे सबूत मिले.

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हाल में, इसरो ने चंद्रयान 2 द्वारा भेजी गई चांद की तस्वीरें जारी की थीं.


कैसे खुला ये राज़?
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आर्क मिशन फाउंडेशन के सह संस्थापक नोवा स्पिवैक के हवाले से खबर में कहा गया है कि जब इज़रायल के इस यान का विश्लेषण किया गया, तो इसके डिवाइस में इन सूक्ष्मजीवों का स्टोर होना पाया गया. स्पिवैक ने ये भी बताया कि चांद पर टार्डिग्रैड्स के जीवन की संभावना इसलिए भी सबसे ज़्यादा है क्योंकि ये सूक्ष्मजीव बहुकोशीय और पृथ्वी पर सबसे ज़्यादा गुणात्मक रूपों में जीने वाली संरचनाएं हैं.

ये भी दिलचस्प बात है कि टार्डिग्रैड्स को एक लूनर लाइब्रेरी में स्टोर किया गया था. ये लाइब्रेरी अस्ल में, एक नैनोटैक्नोलॉजी का डिवाइस है जो डीवीडी जैसा दिखता है और इसमें 30 मिलियन पेजों का डेटा आर्काइव है. इस डेटा में सूक्ष्मजीवों का इतिहास है, जिसमें मनुष्यों के डीएनए संबंधी डेटा भी है.

कैसे होते हैं ये सूक्ष्मजीव?
टार्डिग्रैड्स अस्ल में आठ पैरों वाले सूक्ष्मजीव हैं, जो पानी और ज़मीनी सतह दोनों पर जीवित रह सकते हैं. माइक्रोस्कोप से अध्ययन करने पर पता चलता है कि इनकी संरचना किसी इल्ली की तरह की होती है और सूअर जैसी आकृति से भी समानता दिखती है. इन्हें वॉटर बियर या मॉस पिगलेट भी कहा जाता है. सबसे पहले इस तरह के सूक्ष्मजीवतंत्र के बारे में 18वीं सदी में जर्मन जीवविज्ञानी जोहान अगस्ट ने जाना था. इसके बाद ताज़ा अध्ययनों में पता चला है कि ये लगभग अविनाशी हैं क्योंकि ये हर तरह की एक्स्ट्रीम स्थिति में जीवित रह सकते हैं.



एक और रोचक तथ्य ये भी है कि पृथ्वी पर सबसे कठिन स्थितियों यानी 150 डिग्री से लेकर माइनस 272 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में जीवित रह पाने ये जीव संभवत: पहले जीव माने जा रहे हैं, जो अंतरिक्ष के वैक्यूम यानी निर्वात में भी सर्वाइव कर सकते हैं.

तो क्या चांद पर ये जी पाएंगे?
बेकर यूनिवर्सिटी में टार्डिग्रैड्स विशेषज्ञ विलियम मिलर के हवाले से खबर में कहा गया है कि अगर ये किसी विस्फोट में जल नहीं जाते हैं, तो अब तक की सैद्धांतिक मान्यता के आधार पर कहा जा सकता है कि ये चांद की सतह का दबाव और कठिन तापमान झेलकर जी सकते हैं. लेकिन सक्रियता, विकास और प्रजनन के लिए इन सूक्ष्मजीवों को पानी, हवा और भोजन की ज़रूरत होगी इसलिए अगर चांद की सतह की बात की जाए तो फिलहाल ये जीव वहां गुणात्मक रूप से विकसित नहीं हो सकेंगे.

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वयस्क टार्डिग्रैड्स का सूक्ष्मदर्शी यंत्र से लिया चित्र. (साभार विकिमीडिया)


अब ये जीव कब जाएंगे चांद पर?
चांद पर इन सूक्ष्मजीवों के ज़िंदा रहने की संभावना पर नासा की अंतरिक्ष जीवविज्ञानी कैसी कॉनले का कहना है कि इनके ज़िंदा रहने की संभावना स्थितियों पर ही निर्भर होगी. वहीं खबर में इसका भी ज़िक्र है कि इन जीवों का चांद पर पहुंचने का कितना चांस है. कहा गया है कि 2024 में नासा के आर्टेमिस मिशन से पहले कोई मिशन नहीं है, जिसमें चांद की सतह पर कोई मनुष्य पहुंचने वाला हो. तो अगर ये सूक्ष्मजीव चांद पर पहुंचे भी तो 2024 से पहले तो नहीं पहुंचेंगे. लेकिन पहुंचे तो कुछ हज़ार की संख्या में पहुंचाए जा सकते हैं.

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First published: August 7, 2019, 5:22 PM IST
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