हिमालय के चलते भी खराब हो रही है दिल्ली की हवा, जानिए कैसे?

उत्तर भारत और दक्षिण भारत इस मामले में काफी अलग हैं.

News18Hindi
Updated: November 9, 2018, 11:45 AM IST
हिमालय के चलते भी खराब हो रही है दिल्ली की हवा, जानिए कैसे?
हिमालय के चलते भी पड़ता है दिल्ली और उत्तर भारत की हवाओं पर खराब प्रभाव
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Updated: November 9, 2018, 11:45 AM IST
उत्तर भारत में एक बार फिर सर्दियों की आमद के साथ ही हवा बुरी तरह प्रदूषित हो चुकी है. इसके पीछे आस-पास के इलाकों में पराली की जलाया जाना, कूड़े का जलाया जाना, औद्योगिक प्रदूषण, गाड़ियों का धुआं और निर्माण कार्यों में उड़ने वाली धूल आदि बताए जाते हैं.

पिछले चार सालों से देखा जा रहा है कि दिल्ली में अक्टूबर के आखिरी हफ्ते और नवंबर की शुरुआत में हवा का प्रदूषण चरम पर रहता है. इसी दौरान भारत में दिवाली भी मनाई जाती है. जिससे यह और खतरनाक हो जाता है. इस साल भी ऐसा ही हुआ और दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर कई इलाकों में 500 प्वाइंट से भी ऊपर चला गया था. जबकि सुरक्षित स्तर 100 के नीचे होता है. जिसके बाद दिल्ली में श्वसन तंत्र की बीमारियों के लिए खतरा बहुत बढ़ चुका है.



पिछले साल वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने हवा की क्वालिटी के मामले में दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित 20 शहरों की लिस्ट जारी की थी और इन 20 शहरों में से 13 शहर उत्तर भारत में स्थित थे.

सुधारों के लिए भी किए गए हैं कई प्रयास

सुधारों के तौर पर दिल्ली में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों को बैन कर दिया गया था. इसके अलावा निर्माण कार्यों पर भी बैन लगा दिया था. उन प्लांट्स पर भी बैन था जिनमें ऊर्जा के लिए कोयला जलाया जाता है. पिछले हफ्ते इंवायरमेंट पॉल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी ने यह भी सुझाया था कि प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए प्राइवेट वाहनों के उपयोग पर भी रोक लगाई जा सकती है.

प्रदूषण से परेशान गाजियाबाद


2015 से ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली और इसके आस-पास के इलाकों में पराली जलाने को बैन किए जाने का आदेश दिया था. लेकिन इसके बाद भी इसपर पूरी तरह से रोक नहीं लग सकी थी. इसी साल की शुरुआत में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा था कि वे तब तक पराली जलाए जाने को नहीं रोक सकते, जब तक उसके निस्तारण के लिए किसानों को संतोषजनक मुआवजा न दिया जाए.ऐसे में इस साल भी बड़ी मात्रा में किसानों ने पराली जलाई और हालांकि हम यहां केवल दिल्ली की बात कर रहे हैं लेकिन इसका धुआं बिहार और झारखंड तक गया.

क्या है दिल्ली और आसपास के इलाकों में स्मॉग का कारण
वेबसाइट स्क्रॉल की एक रिपोर्ट में लेखक सिद्धार्थ सिंह की किताब 'ग्रेट स्मॉग ऑफ इंडिया' के हवाले से इस प्रदूषण के कई कारण बताए गये हैं. इसमें बताया गया है कि हवा की क्वालिटी पर सबसे ज्यादा असर हवा की गति और उसके बहने की दिशा का पड़ता है.

वे लिखते हैं, उत्तर भारत में दुर्भाग्यवश कोई भाग्यशाली क्षेत्र नहीं है. जबकि इस क्षेत्र में हवा को प्रदूषित करने के कई सारे कारक मौजूद हैं. भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों के चलते भी पॉल्यूशन का स्तर इस क्षेत्र में खतरनाक ही बना रहता है. और यह दिल्ली और उत्तर भारत का भौगोलिक और मौसमीय दुर्भाग्य है.'

(सांकेतिक तस्वीर)


साथ ही दिल्ली में सर्दियों के दौरान हवा की औसतन रफ्तार एक से तीन मीटर प्रति सेकेंड होती है. जो कि गर्मियों के दौरान हवा की औसत स्पीड का एक-तिहाई है. और साथ ही चेन्नई में बहने वाली हवा से यह बहुत ही कम है और क्योंकि दिल्ली से इतर चेन्नई समुद्र के पास स्थित है और यहां पर लगातार हवा बहती रहती है तो यहां प्रदूषण कम रहता है. वे कहते हैं, "ऐसी हवाओं की कमी जो प्रदूषण को बहाकर बाहर ले जा सकती हैं यह हवा की क्वालिटी को प्रभावित करने का एक सबसे महत्वपूर्ण कारण है."

इस कारण जो प्रदूषण इस इलाके में होता है, वो इसी इलाके में कैद रह जाता है. इन महीनों के दौरान जब उत्तर पश्चिम में पराली जलाई जा रही होती है. हवाएं धीरे-धीरे यहां से प्रदूषित हवा को बहाकर हरियाणा, नई दिल्ली और उत्तरप्रदेश ले आती हैं.

हिमालय के कारण यह हवाएं गर्म भी नहीं होने पातीं कि ये जमीन से ऊपर उठ सकें बल्कि हिमालय के चलते ठंडी रहने के कारण यह प्रदूषित हवाएं नीचे बैठती हैं. और इस मैदानी इलाके को प्रदूषण से भर देती हैं. फिर धीरे-धीरे ये हवाएं बांग्लादेश की ओर बहना शुरू करती हैं.

इसके अलावा IIT कानपुर की एक स्टडी के निष्कर्षों पर गौर करें तो दिल्ली के प्रदूषण के पीछे यहां 300 वर्ग किमी के क्षेत्र में स्थित 13 पावर प्लांट भी हैं. जो इस इलाके में वायुप्रदूषण का महत्वपूर्ण कारण बनते हैं.

उत्तर भारत तीन ओर से तीन पर्वत श्रंखलाओं से घिरा हुआ है. इसके उत्तर में जहां हिमालय है, वहीं इसके दक्षिण पश्चिम में अरावली की पहाड़ियां हैं और इसके दक्षिण पूर्व में विंध्य की पहाड़ियां हैं. जिसके चलते न केवल इस क्षेत्र से प्रदूषित हवा बाहर नहीं जा पाती बल्कि इसके चलते प्रदूषित हवा के बहने की रफ्तार भी कम रहती है. जिसके कारण प्रदूषित हवा इसी क्षेत्र में बनी रहती है और लोगों के स्वास्थ्य पर इसका बहुत बुरा असर होता है.

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