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संकट में पृथ्वी, निगल सकता है ब्लैक होल

संकट में पृथ्वी, निगल सकता है ब्लैक होल

वैज्ञानिकों का कहना है कि गैलेक्सी में कई सुपरहोल मिलकर सुपरमैसिव ब्लैकहोल बना रहे हैं. अगर आकाशगंगा में ज्यादा बड़ी उठापटक हुई और ये ब्लैकहोल अपना रास्ता भटकते हुए पृथ्वी के करीब पहुंचा तो ये उसे समूचा निगल सकता है

    गैलेक्सी में एक इतना बड़ा ब्लैक होल तैयार हो रहा है कि वो पृथ्वी के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है. अभी तो हम सभी पृथ्वी पर सुरक्षित हैं. ये अपनी कक्षा में आराम से चक्कर लगा रही है लेकिन गैलेक्सी में होने वाले बदलाव बता रहे हैं कि विशाल ब्लैक होल अपना रास्ता बदल रहा है. ये सौरमंडल के ग्रह नेपच्यून के पास से गुजर सकता है. अगर ऐसा हुआ तो हमारी हरी भरी पृथ्वी को ये अपनी खुराक भी बना सकता है.

    ऐसा हो तो सकता है लेकिन अभी नहीं बल्कि 25 हजार प्रकाश वर्ष बाद. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि गैलेक्सी में कई ब्लैक होल आपस में मिलकर एक विशालकाय ब्लैक होल बनाने की प्रक्रिया में हैं. ब्लैक होल आकाशगंगा में ऐसे विशालकाल घूमते हुए सौर संरचना को कहा जाता है, जो अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को चट करते जाते हैं.  उनके अंदर जो भी ग्रह, उपग्रह, उल्का पिंड या अंतरिक्ष की वस्तुएं आती हैं, वो उनके मुंह के जरिए पेट में समा जाती हैं और फिर कभी वहां से बाहर नहीं आ पातीं.

    एक इटैलियन खगोल विज्ञानी (astronomer) का कहना है ब्लैक होल धरती को निगल सकता है. TED-Ed के एक एनिमेटेड वीडियो में fabio pacucci नाम के येल यूनिवर्सिटी के साइंसटिस्ट का कहना है कि सुपरमैसिव ब्लैक होल (अनंत क्षमता वाले) कॉस्मिक वैक्यूम क्लीनर की काम कर रहे हैं. उनका गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि उनके रास्ते में जो भी होता है, उसे भीतर समा लेते हैं. उनका कहना है कि ब्लैक होल सूरज से खरबों गुना बड़े है और आपस में कई ब्लैक होल मिलकर और बड़े हो रहे हैं.

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    बता दें कि ब्लैक होल अंतरिक्ष में हैं, इनका गुरुत्वाकर्षण बहुत ज्यादा  होता है. जिसके बल से कुछ भी नहीं बच सकता. यहां जाकर प्रकाश भी वापस नहीं निकल पाता.

    तब पृथ्वी का नामोनिशान भी नहीं बचेगा

    वीडियो में pacucci ने विस्तार से बताया कि आने वाले सालों में (कई प्रकाश वर्ष बाद) ब्लैक होल नेपट्यून के बगल से गुजरेगा. अगर ऐसा हुआ तो धरती की परिक्रमा पर तयशुदा तरीके से असर पड़ेगा. तब हो सकता है कि हमारी पृथ्वी सीधे उसके मुंह में समा जाए. तब ना केवल पृथ्वी पर जीवन पूरी तरह खत्म हो जाएगा बल्कि इस ग्रह का कोई भी नामोनिशान तक बाकी नहीं बचेगा. फिलहाल अभी पृथ्वी इस सुपरमैसिव ब्लैक होल से 25 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर है. जिसे सुरक्षित दूरी माना गया है. लेकिन इसमें बदलाव भी हो सकता है.

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    क्या धरती को बर्बाद कर सकता है ब्लैक होल
    nasa.gov के मुताबिक, ब्लैक होल अंतरिक्ष में सितारों, चंद्रमाओं और ग्रहों को खाने के लिए नहीं आते, लिहाजा धरती ब्लैक होल में नहीं गिरेगी, क्योंकि कोई भी ब्लैक होल सोलर सिस्टम या धरती के करीब नहीं है. यदि एक ब्लैक होल सूर्य की जगह आ जाए तो भी धरती उसमें नहीं गिरेगी.

    अगर ब्लैक होल में सूर्य के समान ही गुरुत्वाकर्षण होगा. तो तब पृथ्वी और अन्य ग्रह ब्लैक होल की वैसे ही परिक्रमा करेंगे जैसे सूर्य की करते हैं. हालांकि सूरज कभी ब्लैक में नहीं बदलेगा, क्योंकि वो ब्लैक होल बनने के लिए बड़े सितारे जितना नहीं है.



    अगर कभी हमारी आकाशगंगा दूसरे से टकराती है, तो इसके चलते जो नया बल पैदा होगा, वो पृथ्वी को गांगेय केंद्र (galactic centre) की ओर फेंक सकता है. तब पृथ्वी अगर सुपरमैसिव ब्लैक होल के करीब पहुंची तो फिर उसे कोई ताकत नहीं बचा पाएगी.

    वास्तव में, एंड्रोमेडा गैलेक्सी के साथ पृथ्वी के टकराने की भविष्यवाणी चार बिलियन साल पहले की गई थी.

    यहां देखें वीडियो-



    गैलैक्सी में कितने ब्लैक होल
    वैज्ञानिकों का अनुमान है कि गैलैक्सी में करीब 100 बिलियन सितारे और 100 मिलियन ब्लैकहोल्स हैं. चूंकि इनका गुरुत्वाकर्षण बहुत शक्तिशाली होता है, लिहाजा उन्हें गैलेक्‍सी में ढूंढ पाना असंभव है. इन्हें देखा नहीं जा सकता है, इनके आकार के बारे में सही तरीके से कुछ नहीं कहा जा सकता है. होल की बाउंड्री को वैज्ञानिकों ने ‘इवेंट हॉरिजॉन’ (घटना क्षितिज) नाम दिया है.

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    ब्लैक हो के  काले गड्ढे में वस्तुएं गिर तो सकती हैं परन्तु बाहर नहीं आ सकतीं. इसे "काला" भी (ब्लैक) इसलिए कहा जाता है, क्योंकि ये खुद पर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है.

    सबसे बड़ा ब्लैक होल
    सबसे बड़े ब्लैकहोल का नाम सैगीटेरियस ए है, ये तारामंडल के केंद्र में स्थित है.



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    आकाशगंगा के केंद्र के करीब मिला था ब्लैक होल
    सितंबर 2017 में जापान की कीओ यूनिवर्सिटी में अल्मा टेलीस्कोप के इस्तेमाल से गैसों के एक बादल के अध्ययन के दौरान खोजकर्ताओं ने कुछ विचित्र सा पाया था. अंतरिक्षयात्रियों ने पाया था, दीर्घवृत्ताकार बादल के अणु बहुत तेज गति से गुरुत्वीय बलों द्वारा खींचे जा रहे थे. ये बादल आकाशगंगा के केंद्र से 200 प्रकाशवर्ष दूर था और 150 खरब किलोमीटर के दायरे में फैला था.



    उन्होंने सूर्य से लगभग एक लाख गुना बड़ा ये ब्लैक होल एक जहरीली गैस के बादल से घिरा हुआ पाया. माना गया कि यदि इसकी पुष्टि हो गई तो ये आकाशगंगा में पाया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा ब्लैकहोल होगा.

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    Tags: Galaxy S, Italy, Nasa, Science, Space

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