इटली के वैज्ञानिकों ने कोरोना की बनाई वैक्सीन, किया यह बड़ा दावा

इटली के वैज्ञानिकों ने कोरोना की बनाई वैक्सीन, किया यह बड़ा दावा
कोरोना वायरस की इस वैक्सीन का ट्रायल इंसानों पर होगा.

इटली के वैज्ञानिकों की वैक्सीन (Vaccine) का चूहों पर, और उसके बाद इंसानी कोशिकाओं (Human Cells) पर सफल प्रयोग हुआ है.

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona virus) का प्रकोप फिलहाल दुनिया में कम होता नजर नहीं आ रहा है. लेकिन इसकी दवा और वैक्सीन को लेकर शोधकार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है. कई स्तरों पर चल रहे ट्रायल मिले जुले नतीजे  दे रहे हैं तो कुछ ट्रायल उम्मीद भी बढ़ा रहे हैं. इसी बीच ऐसा लगता है कि इटली (Italy) की एक वैक्सीन (Vaccine) इस दौड़ में सबसे आगे निकल सकती है.

क्या पाया गया शोध में
इटली में रोम के लैजारो स्पालैनजानी नेशनल इस्टीट्यट फॉर इंफेक्शियस डिसीज ऐसी वैक्सीन खोजी है जिसने चूहों में सफलता पूर्व एंटीबॉडी पैदा की है और मानवीय कोशिकाओं पर भी कारगर पाया है. साइंस टाइम्स की इस रिपोर्ट के मुतबिक इस वैक्सीन ने मानवीय कोशिकाओं में नोवल कोरोना वायरस को बेअसर करने में कामयाब हुई है.

दौड़ में सबसे आगे है यह वैक्सीन
दवा बनाने वाली टाकिस कंपनी के प्रमुख ल्यूगी ऑरिसिकियो का कहना है कि जब से कोविड-19 की वैक्सीन बनने की कवायद शुरू हुई है तब से यह वैक्सीन इस दौड़ में सबसे आगे हैं. यह वैक्सीन टेस्टिंग के सबसे आगे के दौर में चल रही है और गर्मी में ही इसका मानवीय परीक्षण शुरू हो सकता है.



फिर भी मिल कर करना होगा काम
कंपनी अमेरिकन दवा कंपनी लीनियाआरएक्स के साथ भी काम कर रही है. लेकिन वैक्सीन पूरी तरह से सफल हो सके इसके लिए इटली की सरकार, और अंतराष्ट्रीय सहयोग की भी आवश्यकता जरूरी है.  ल्यूगी का मानना है कि यह कोई प्रतियोगिता नहीं है. यदि हम मिल कर काम करेंगें तो हम कोरोना के खिलाफ जंग जीत सकते हैं.

कोरोना की वैक्सीन पर दुनिया में कई जगह पर शोध हो रहा है.


चूहों के बाद अब इंसानों पर परीक्षण
वैज्ञानिकों ने चूहों पर जब इस वैक्सीन का परीक्षण किया तो चूहों ने ऐसे ऐसी एंटीबॉडीज बना ली जिन्होंने कोविड-19 को मानवीय कोशिकाओं में सक्रमण रोक दिया. अब वैज्ञानिक इस पर इम्यूनिटि प्रतिक्रिया देख रहे हैं.

कैसे काम करती है यह वैक्सीन
इस वैक्सीन में एक तकनीक का उपयोग किया गया है जिसे इलेक्ट्रोपोरोशन कहा जाता है. इसमें यह वैक्सीन कोशिका में जाती है और इम्यून सिस्टम को सक्रिय करती है. यह क्रियाशील एंटीबॉडी पैदा करती है जो फेफड़ों की कोशिकाओं में स्पाइक प्रोटीन को बेअसर करती है. फेफड़ों की कोशिकाएं कोरोना वायरस का सबसे आसान शिकार रही हैं. वैज्ञानिक अब अगले चरण में बेहतर नतीजे के इंतजार में हैं. उनका मानना है कि यह वैक्सीन खुद को वायरस के भविष्य में होने वाले म्यूटेशन से भी निपटने में सक्षम है.

चीन के बाद पहले इटली में ही फैस संक्रमण
यह केवल एक संयोग ही है कि इटली चीन के बाद कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित होने वाला पहला देश है. अभी तक कोरोना से इटली में 2 लाख 13 हजार संक्रमण हो चुके हैं जबकि वहां उससे मरने वालों की संख्या 29 हजार से ज्यादा हो चुकी है.

पूरी दुनिया में है बुरा हाल, लेकिन भारत का नहीं
दुनिया भर की बात की जाए तो कोरोना वायरस संक्रमण अब तक 37 लाख 27 हजार से ज्यादा लोगों को हो चुका है तो मरने वालों के संख्या 2 लाख 58 हजार से ज्यादा हो चुकी है. अकेले अमेरिका में ही 12 लाख 37 हजार संक्रमण और 72 हजार से ज्यादा मौते हो चुकी हैं. वहीं भारत में यह संक्रमण की संख्या 50 हजार के निकट पहुंच चुकी है.

और भी परीक्षण चल रहे हैं तेजी से
जहां कोरोना संक्रमण रुकने का नाम नहीं ले रहा है तो दूसरी तरफ शोधकार्य भी तेजी से ही चल रहा है. अमेरिका में रेमेडिसविर नाम की दवा ने उत्साह जनक नतीजे दिखाए तो चीन ने भी बंदरों पर ट्रायल परीक्षण में सफलता हासिल की है. इसके अलावा अभी कई दवाओं और वैक्सीन पर समानांतर ट्रायल चल रहा है.

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