मुसोलिनी की आज ही के दिन हुई थी हत्या, गुस्‍साए लोगों ने लाश की कर दी थी दुर्दशा

मुसोलिनी की आज ही के दिन हुई थी हत्या, गुस्‍साए लोगों ने लाश की कर दी थी दुर्दशा
इटली के तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी की विद्रोहियों स्विट्जरलैंड भागते समय पकडकर हत्‍या कर दी थी.

इटली के फासीवादी तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी (Benito Mussolini) और उसकी गर्लफ्रेंड की विरोधी गुट ने गोली मारकर हत्‍या कर दी थी. इसके बाद मुसोलिनी और उसके साथियों की लाशों को एक चौराहे पर डाल दिया गया. लोगों में गुस्‍सा इस कदर था कि एक महिला ने उसके सिर में 5 गोली मारीं, तो एक महिला ने चाबुक बरसाना शुरू कर दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 28, 2020, 4:39 PM IST
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दुनिया में जब भी क्रूर तानाशाह का जिक्र होता है तो सबसे पहले जर्मनी के फ्यूरर एडोल्‍फ हिटलर (Adolf Hitler) का नाम जेहन में आता है. उसी हिटलर के करीबी इटली के तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी (Benito Mussolini) को कहीं ज्‍यादा क्रूर माना जाता है. उसे फासीवाद का जनक भी कहा जाता है. मुसोलिनी ने अपनी क्रूरता के दम पर 1922 से 1943 तक 20 साल इटली पर शासन किया. उसने अपना विरोध करने वाले लाखों लोगों की हत्‍या करवाई. एक टीचर से मजूदर, फिर पत्रकार से सैनिक और अंत में इटली के शासक बने तानाशाह मुसोलिनी के क्रूर रवैये से लोग इस कदर आक्रोश में आ गए थे कि विद्रोहियों ने उसकी, उसकी गर्लफ्रेंड क्‍लारेट पेटासी (Claretta Petacci) और 16 अन्‍य सहयोगियों की 28 अप्रैल 1945 को कोमो झील के पास गोली मारकर हत्‍या कर दी. इसके बाद उनके शव को मिलान (Milan) के पियाजा लोरेटो चौक पर फेंक दिया.

18 की उम्र में बना टीचर, 19 साल में स्विट्जरलैंड भागा
मुसोलिनी दूसरे विश्‍व युद्ध में हिटलर के सहयोगी के तौर पर लड़ा था. एंसाइक्‍लोपीडिया ब्रिटानिका के मुताबिक, इससे पहले 29 जुलाई 1882 को इटली के प्रिदाप्यो गांव में जन्‍मा मुसोलिनी 18 साल की उम्र में ही अध्यापक बन गया था. इसके बाद 19 साल की उम्र में भागकर स्विटजरलैंड चला गया और मजदूरी करने लगा. वहां से लौटकर बेनिटो ने कुछ समय तक इटली की सेना में काम किया. इसके बाद घर लौटकर उसने समाजवादी आंदोलन में भाग लेना जारी रखा और पत्रकार बन गया. वह 1912 तक समाजवादी दल के मुखपत्र 'आवांति' के संपादक बन गया. इसी दौरान 1914 में पहला विश्‍व युद्ध छिड़ गया. मुसोलिनी का मानना था कि इटली को निष्‍पक्ष न रहकर ब्रिटेन और फ्रांस के पक्ष में लड़ना चाहिए. ऐसी सोच के कारण उसे 'आवांति' के संपादक पद से हटना पड़ा. साथ ही उसे समाजवादी दल से भी निकाल दिया गया.

दूसरे विश्‍व युद्ध से पहले ही जर्मन तानाशाह एडोल्‍फ हिटलर और इटली के तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी के बीच गठबंधन हो चुका था.

मुसोलिनी ने 1919 में अलग राजनीतिक संगठन बनाया


मुसोलिनी ने 23 मार्च 1919 को एक नया राजनीतिक संगठन 'फासी-दि-कंबात्तिमेंती' बनाया. इसमें उन्होंने उन्हीं लोगों को लिया, जो 1914 में उनके विचार से सहमत थे. उनके संगठन में ज्‍यादातर पूर्व सैनिक शामिल हुए. इस दौरान समाजवादी कमजोर हो चुके थे और पूर्व सैनिकों में बेकारी फैल गई थी. इटली में भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया था. ऐसे ही तमाम कारणों के कारण मुसोलिनी ताकतवार होता चला गया. इसके बाद सरकारी सेना के तटस्‍थ हो जाने के कारण उनके संगठन ने 30 अक्टूबर 1922 को रोम पर कब्जा कर लिया. हालात ऐसे बने कि प्रधानमंत्री लुइगी फैटा ने इस्‍तीफा दे दिया और मुसोलिनी इटली का प्रधानमंत्री बन गया. माना जाता है कि इसके बाद मुसोलिनी ने 1935 में अबीसीनिया पर हमला किया और यहीं से दूसरे विश्‍व युद्ध की शुरुआत हुई. इससे पहले हिटलर और मुसोलिनी का गठबंधन हो चुका था. दूसरे विश्‍व युद्ध में इटली और जर्मनी एक तरफ से और ब्रिटेन व फ्रांस दूसरी तरफ से लड़े. बाद में बाकी देश भी शामिल होते चले गए. शुरुआत में हिटलर जीता, लेकिन बाद में हारता चला गया.

विद्रोहियों ने हत्‍या कर पियाजा लोरेट चौक पर फेंके शव
दूसरे विश्‍व युद्ध में मिली हार के कारण 25 जुलाई 1943 तक ऐसी स्थिति बनी कि मुसोलिनी को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और उसे हिरासत में ले लिया गया. हिस्‍ट्री वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में ही हिटलर ने उसे छुड़ाया और उत्तर इटली में एक राज्य का प्रधान बना दिया. दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत में मुसोलिनी ने कहा था कि अगर मैं लड़ाई के मैदान से हटूं तो मुझे गोली मार दो. युद्ध खत्‍म होने की कगार पर था. अप्रैल, 1945 में सोवियत संघ और पोलैंड की सेनाओं ने बर्लिन पर कब्‍जा कर लिया था. जब मुसोलिनी को जर्मन सेनाओं के हथियार डालने की सूचना मिली तो वह अपनी गर्लफ्रेंड क्लारेटा और अन्‍य 16 साथियों के साथ स्विटजरलैंड की ओर भाग लिया. तभी डोगों कस्बे के पास वह विद्रोही 'पार्टीजन' के हत्थे चढ़ गया. विद्रोहियों ने बेनिटो समेत सभी 18 लोगों को कोमो झील के पास गोली से उड़ा दिया. 29 अप्रैल, 1945 की सुबह मिलान शहर के पियाजा लोरेटो चौक (Piazzale Loreto Square) पर सभी के शव फेंक दिए गए. ये वही चौराहा था, जहां मुसोलिनी ने 8 महीने पहले अपने 15 विद्रोहियों की हत्‍या करवा दी थी.

मिलान का यही वो पियाजा लोरेटो चौक है, जिस पर बेनिटो मुसोलिनी और उसकी गर्लफ्रेंड की लाश को उलटा लटका दिया गया था.


गुस्‍साए लोगों ने भड़ास निकाली, उलटे लटका दिए शव
रे मोजली अपनी किताब 'द लास्ट 600 डेज ऑफ ड्यूश' में लिखते हैं कि मुसोलिनी की मौत की खबर मिलते ही करीब 5,000 लोगों की अनियंत्रित और गुस्‍साई भीड़ चौक पर जमा हो गई. टाइम की रिपोर्ट के मुता‍बिक, इनमें एक महिला ने मुसोलिनी के मृत शरीर के सिर में 5 गोलियां मार कर कहा कि उसने अपने 5 बच्चों की मौत का बदला लिया है. गुस्‍से का आलम कुछ ऐसा था कि एक और महिला ने सब के सामने मुसोलिनी के विक्षत चेहरे पर टॉयलेट कर दिया. एक और महिला कहीं से चाबुक ले आई और मुसोलिनी की लाश को पीटने लगी. इसी दौरान एक व्‍यक्ति उसके मुंह में मरा हुआ चूहा डालने की कोशिश की. इस वीभत्‍‍‍स दृश्य का जिक्र करते हुए लूसियानो गैरिबाल्डी अपनी किताब 'मुसोलिनी द सीक्रेट ऑफ हिज डेथ' में लिखते हैं कि नफरत की आग में झुलस रही भीड़ सभी 18 शवों के ऊपर चढ़ गई और उन्हें अपने पैरों से कुचल दिया. इसके बाद मुसोलिनी, क्लारेटा और चार अन्य लोगों की लाशों को चौक पर उलटा लटका दिया गया.

एक फाशिस्‍ट ने किया सैल्‍यूट तो की उसकी भी हत्‍या
मुसोलिनी पर एक और किताब 'The body of duce' लिखने वाले सर्जियो लुजाटो लिखते हैं कि मुसोलिनी का पूरा चेहरा खून से लथपथ था और मुंह खुला हुआ था. तभी फाशिस्ट पार्टी के पूर्व सचिव अकीले स्टारेची ने हिम्मत दिखाई और आगे बढ़कर अपने मृत नेता को फाशिस्ट सेल्यूट दिया. उस समय उसने एक जॉगिंग सूट पहन रखा था. लोगों ने उसको तुरंत पकड़ लिया और पीठ पर गोली मार दी. उसी समय पार्टी के बड़े नेता फ्रांसेसकू बराशू के लटकते हुए शव की रस्सी टूट गई और वो नीचे आ गिरा. फिर मुसोलिनी के शव की रस्सी काटी गई और उसका शव भी पियाजा लोरेटो के पत्थरों पर गिर पड़ा. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, टाइम पत्रिका के संवाददाता रेग इंग्राहम भी इस दृश्य को देख रहे थे. बाद में उन्होंने टाइम में अपने लेख 'द डेथ इन मिलान' में लिखा, 'मेरी आंखों के सामने सब कुछ घटित हो रहा था. जब लोग मुसोलिनी के शव की दुर्दशा कर रहे थे, तब उन्‍होंने फाशिस्ट मिलिशिया की वर्दी पहन रखी थी.

अमेरिकी सैनिकों के हस्‍तक्षेप के बाद बेनिटो मुसोलिनी और उसकी गर्लफ्रेंड क्‍लारेट पेटासी समेत सभी साथियों के शव पियाजा लोरेटो चौक से हटाकर दफनाए जा सके.


अमेरिकी सैनिकों के हस्‍तक्षेप के बाद दफनाए गए शव
न्यूयॉर्क टाइम्स ने मुसोलिनी की मौत पर लिखा कि पुराने रोम (Ancient Rome) के गौरव को वापस लाने की बात करने वाले शख्‍स की लाश मिलान के एक चौक में पड़ी थी और हजारों लोग उसे ठोकर मारकर और उस पर थूक कर उसे लानत भेज रहे थे. दोपहर 1 बजे अमरीकी सैनिकों (US Troops) के हस्तक्षेप के बाद सारे शवों को लकड़ी के ताबूतों में रखकर शहर के मुर्दाघर में भेजा गया. वहां मुसोलिनी के शव का पोस्टमार्टम किया गया. इसके बाद मुसोलिनी के शव को मिलान के मुसोको कब्रिस्तान की कब्र नंबर 384 में दफनाया गया. उनके भेजे के एक हिस्से को वाशिंगटन के सेंट एलिजाबेथ साइकियाट्रिक अस्पताल में परीक्षण के लिए भेज दिया गया, जिसे कई दशक बाद उनकी विधवा डोना रशेल को लौटाया गया. क्लारेटा को मिलान में ही रीटा कोल्फोस्को के नाम से दफनाया गया.

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