19 सौ साल पहले भी था आधुनिक रेस्त्रां, जानिए कैसे रातोंरात इटली का ये शहर तबाह हो गया

खुदाई में मिला इटली का पोम्पई शहर- सांकेतिक फोटो

खुदाई में मिला इटली का पोम्पई शहर- सांकेतिक फोटो

इटली के पोम्पई (Pompeii in Italy) शहर में कई रेस्त्रां, थिएटर और एक होटल भी था. लेकिन एक ही रात में पूरा शहर लावे में उबलकर खत्म हो गया. लावा लगभग 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चला था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 28, 2020, 9:13 PM IST
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कोरोना के नए रूप और वैक्सीन की खबरों के बीच अचानक इटली के पोम्पई शहर की खबर भी सुर्खियों में है. आज से लगभग 19 सौ साल पहले 79 A.D के इस शहर की चर्चा का कारण है, वहां खुदाई में एक ऐसी दुकान का मिलना, जहां गर्मागर्म खाने और पेय की व्यवस्था हुआ करती थी. खुदाई में मिली दुकान किसी आधुनिक रेस्त्रां की ही तरह है. इस बीच ये जानना दिलचस्प होगा कि आखिर कैसे इटली का ये बेहद आधुनिक शहर नक्शे से ही खत्म हो गया.

इसकी वजह है नेपल्स की खाड़ी में स्थित वो भयंकर ज्वालामुखी, जिसने रातोंरात एक शहर की पूरी आबादी को पत्थर में बदल दिया. Mount Vesuvius नाम का ये ज्लावामुखी वैसे तो अब तक 50 से ज्यादा बार फट चुका है. लेकिन इसका सबसे खतरनाक विस्फोट आज से लगभग 19 सौ साल पहले 79 A.D में हुआ था.

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बहता हुआ लावा बाढ़ में उफनती नदी की तरह शहर की ओर बढ़ चला था. इतनी ज्यादा गर्मी से शहर के लोगों का खून उबलने लगा था और तुरंत ही उनकी मौत हो गई. इसके बाद से शहर वीरान पड़ा रहा. जब इसकी खोज हुई तो पाया गया कि शहर के लोग जस के तस अलग-अलग पोजिशन में पड़े हुए हैं. जैसे किसी काम करते व्यक्ति की काम के दौरान ही अपनी जगह पर मौत हो गई. एक बैठे हुए बच्चे ने उसी तरह से बैठे हुए दम तोड़ दिया. यानी लावे की गति इतनी तेज रही होगी कि किसी को संभलने या एक जगह इकट्ठा होने तक का वक्त नहीं मिला.

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लावे की गति इतनी तेज रही होगी कि किसी को संभलने या एक जगह इकट्ठा होने तक का वक्त नहीं मिला- सांकेतिक फोटो

कैसी थी प्राचीन पोम्पई में जिंदगी

करीब 170 एकड़ में फैला हुआ ये शहर उस वक्त इटली का वेकेशन स्पॉट था. दूर-दूर से लोग यहां घूमने के लिए आते. पहाड़ों से 5 मील की दूरी पर बसे इस शहर में सैलानियों के कारण सारी आधुनिक व्यवस्थाएं थीं. जैसे यहां एक बड़ा बाजार था जहां मांस और फल-सब्जियां जैसी चीजें मिलतीं. कई रेस्त्रां थे, यहां तक कि कई थिएटर और एक होटल भी था.



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हिस्ट्री वेबसाइ़ट के अनुसार यहां पर एक से बढ़कर एक खूबसूरत घर थे और सड़कें भी आधुनिक तरीके से बनी हुई थीं. सैलानियों के लिए यहां स्पा (तब इसे बाथहाउस कहा जाता था) और वेश्यालय भी थे. इतिहासकारों के अनुसार जब ज्वालामुखी फटा जब शहर में 12000 के आसपास की आबादी रही होगी यानी उस दौर के हिसाब से पोम्पई काफी घनी आबादी वाला शहर था.

लेखक ने पत्र में लिखी आंखोंदेखी

वैसे Mount Vesuvius ज्वालामुखी रातोंरात नहीं बना था. शहर को इसके बारे में पहले से मालूम था. लेकिन चूंकि छोटे-मोटे विस्फोट होते रहते थे, लिहाजा लोगों को उसके आस-पास रहने में कोई खतरा मालूम नहीं होता था. 79 A.D. में जब ज्वालामुखी भयंकर तरीके से फटा, तब अक्टूबर का महीना था. वोल्केनो के फटते ही आसमान धुएं, धूल, राख और गर्म पत्थरों से भरने लगा. सैकड़ों मील दूर बसे लोगों को भी ये दिखाई दे रहा था. प्राचीन रोम के लेखक Pliny the Younger ने दूर से इसे देखा और मान लिया कि दुनिया खत्म हो रही है. उनकी बाद में लिखी चिट्ठियों में इसका जिक्र मिलता है.

79 A.D. में जब ज्वालामुखी भयंकर तरीके से फटा, तब अक्टूबर का महीना था- सांकेतिक फोटो (pixabay)

जल्द ही ज्वालामुखी के फटने के कारण pyroclastic surge हुआ यानी धूल और चट्टानें 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलने लगी और हर चीज इनके नीचे दब गई. रातभर में पूरा पोम्पई शहर लावे के नीचे दबा हुआ था. हालांकि शहर के बाहर के लोग भी इसमें मारे गए और इतिहासकारों का मानना है कि कुल मिलाकर 16000 से ज्यादा जानें गईं. इन आंकड़ों में पड़ोसी शहर Herculaneum की आबादी भी शामिल थी.

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इसके बाद सदियों तक इस शहर की किसी ने सुध नहीं ली. साल 1748 में कुछ युवा सैलानी यहां पहुंचे और पत्थर बने शरीरों को देखकर हैरान रह गए. इमारतें वैसी ही वैसी थीं. लोगों के स्केलेटन उसी अवस्था में थे, जैसे वो ज्वालमुखी का लावा आने से पहले रहे होंगे. यहां तक कि सड़कों पर ब्रेड और सब्जियां तक पत्थर में दबे हुए मिले.

यहां पर एक से बढ़कर एक खूबसूरत घर थे और सड़कें भी आधुनिक तरीके से बनी हुई थीं

माना जाता है कि शहर की बरामदगी के बाद यूरोपभर में उस शहर की वास्तुकला की नकल की गई. अब भी यूरोप के अमीर घरों में “Etruscan rooms” होते हैं, जो पोम्पई के घरों की तर्ज पर बनाए जाते हैं. ये एंटीक होते हैं और इनमें काफी आध्यात्मिक शक्ति मानी जाती है, जो रहने वालों को हमेशा संपन्न और सेहतमंद रखती है.

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अब बात करते हैं फिलहाल मिले रेस्त्रांनुमा स्ट्रक्चर की

यह दुकान पोम्‍पेई शहर के पुरातात्विक पार्क रेगियो वी में पाई गई है. शनिवार को इसे पहली बार सामने लाया गया. दुकान को पुराने समय में लैटिन भाषा में टर्मोपोलियम कहा जाता था, जहां पीने को गर्मागर्म पेय और खाने की चीजें मिलती थीं. दुकान में खाना पकाने और परोसने के बर्तन भी मिले हैं, जो काफी भित्तिचित्रों से भरे हुए हैं. पुरातत्व के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि पूरी की पूरी दुकान मिली है. यहां तक कि दुकान में सुअर, मछली, घोंघा के अवशेष भी मिले हैं, जो पकाए जाने वाले थे. लेकिन ज्वालामुखी की आपदा इतनी अचानक आई कि शायद खाना पकाते और खाने का इंतजार करते लोग कुछ ही घंटों के भीतर खत्म हो गए.

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