ऐसा करके अरुण जेटली ने एक उदाहरण पेश किया था

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Updated: August 24, 2019, 1:55 PM IST
ऐसा करके अरुण जेटली ने एक उदाहरण पेश किया था
अरुण जेटली

अरुण जेटली (Arun Jaitley) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन शीर्ष नेताओं में हैं, जिन्होंने खुद अपनी मर्जी से मंत्री पद तो नहीं लिया बल्कि सरकारी बंगला और सुविधाएं भी छोड़ दीं, जो कोई शायद ही करता है

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इस साल जब भारी बहुमत पाने के बाद एनडीए-2 नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अगुवाई में दूसरी बार सरकार बनाने जा रही थी तो अरुण जेटली (Arun Jaitley) ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया, जो शायद कम ही लोग कर पाते हैं. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से मंत्रीपद लेने में अनिच्छा जाहिर की. यही नहीं उन्होंने ना केवल सरकारी बंगला छोड़ दिया बल्कि एक पूर्व मंत्री और राज्यसभा सदस्य होने के नाते मिलने वाली सुविधाएं भी छोड़ दीं.

ऐसे उदाहरण कम देखने को मिलते हैं, जब किसी ने खुद मंत्रीपद नहीं लेने का फैसला किया हो. दरअसल बीमारी के कारण न तो उन्होंने 2019 का चुनाव लड़ा न ही चुनाव में कोई बड़ी जिम्मेदारी निभाई. चूंकि वो पिछली सरकार में मंत्री रह चुके थे तो नई सरकार में भी उन्हें वही सुख सुविधाएं मिलीं जो उन्हें पूर्व की सरकार में हासिल हुईं थीं. लेकिन उन्होंने ये सब छोड़ दिया.

जब नई सरकार बनी थी तो यही कहा गया था कि स्वस्थ होने के बाद जेटली नई सरकार में अहम जिम्मेदारी संभाल सकते हैं. मगर तमाम चर्चाओं पर विराम तब लगा जब जेटली ने खुद पीएम मोदी को पत्र लिखकर कहा कि अब वो खराब स्वास्थ्य के कारण अधिक समय तक सक्रिय राजनीति में नहीं रह सकते.

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सरकारी बंगला छोड़ा, सुरक्षा भी कम कर ली
सरकारी बंगले में वो जब तक चाहे रह सकते थे लेकिन उन्होंने एनडीए-2 की नई सरकार बनते ही लंबा चौड़ा सरकारी बंगला छोड़ने का फैसला कर लिया. वो अपने निजी घर में शिफ्ट हो गए. उन्होंने कर्मचारियों की संख्या में तो कटौती की ही,साथ ही अपनी सुरक्षा में लगे लोगों को भी कम कर दिया. इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सरकारी गाड़ियां भी संबंधित विभाग को वापस लौटा दीं.

अरुण जेटली ने सरकारी बंगला तो छोड़ा ही साथ ही सारी सुविधाएं भी छोड़ दीं

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ये उदाहरण भी पेश किया
अरुण जेटली ने ये भी सुनिश्चित कर लिया कि जब वो सरकारी बंगला छोड़ें तो पहले से लंबित बिजली बिल, पानी बिल और टेलीफोन बिल- सभी का भुगतान कर दिया जाए. उनसे सरकारी आवास पर रोजाना 25 अखबार आया करते थे, उन सभी को जेटली ने बंद करवा दिया.

जेटली ने सरकारी बंगला छोड़कर निजी आवास में जाने से पहले सुनिश्चित कर लिया कि सारे लंबित बिलों का भुगतान हो जाए


सरकार बंगला खाली करने के बाद वो ग्रेटर कैलाश स्थित अपने निजी आवास पर चले गए, जहां वो मंत्री बनने से पहले रहते थे. जहां से वो वकालत करते थे. जेटली के इस फैसले की एक बड़ी वजह उनके परिवार को बताया गया. उनके परिजनों की इच्छा थी कि वो सरकारी बंगला छोड़कर अपने घर पर रहें.

ये करके पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने एक नया उदाहरण पेश किया. उनका ये कदम उन लोगों को संदेश भी है जो राजनीति में केवल इसलिए आते हैं कि तमाम तरह की सुख सुविधाएं हासिल कर सकें.

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First published: August 24, 2019, 1:55 PM IST
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