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सरदार पटेल अगर जिंदा रहते तो क्या सच में पहले ही आजाद हो जाता गोवा

सरदार पटेल अगर जिंदा रहते तो क्या सच में पहले ही आजाद हो जाता गोवा

क्या वास्तव में सरदार वल्लभ भाई पटेल के दिमाग में गोवा को आजाद कराने की कोई योजना थी. या उन्होंने इस संबंध में कोई कदम उठाया था.

क्या वास्तव में सरदार वल्लभ भाई पटेल के दिमाग में गोवा को आजाद कराने की कोई योजना थी. या उन्होंने इस संबंध में कोई कदम उठाया था.

Modi On Goa Liberation and Saradar Patel role : गोवा ने 19 दिसंबर को अपना आजादी का दिन मनाया. वैसे गोवा देश का ऐसा राज्य भी है जो 19 दिसंबर और 15 अगस्त दोनों दिन आजादी का उत्सव मनाता है. इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में एक जनसभा में कहा कि अगर सरदार वल्लभभाई पटेल जिंदा होते तो गोवा बहुत आजाद हो चुका होता. आखिर किस परिप्रेक्ष्य में मोदी ने ये बात कही थी. जानते हैं.

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हाल ही में गोवा की आजादी के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक संबोधन में कहा था कि अगर सरदार वल्लभ पटेल जिंदा होते तो देश का ये हिस्सा पुर्तगालियों से कभी का आजाद करा लिया गया होता. गोवा करीब 450 सालों तक पुर्तगाल का उपनिवेश रहा. उसके बाद उसे भारतीय फौजों ने 36 घंटे के आपरेशन के बाद 19 दिसंबर 1961 को आजाद कराया था. हम ये जानते हैं कि मोदी ने जो बात कही उसमें कितनी सच्चाई है. क्या वाकई सरदार पटेल ऐसा कर सकते थे या उन्होंने अपने जीते जी गोवा की आजादी को लेकर कोई पहल की थी.

इसे जानने के लिए हमें थोड़ा पीछे की ओर जाना होगा. आजादी के बाद गृह मंत्री सरदार पटेल और केपीएस मेनन प्रिंसले स्टेट्स के एकीकरण की कोशिश में लगे हुए थे.

1948 तक हो चुका था विलय का काम
फरवरी 1948 के बीच तक ये काम उन्होंने करीब पूरा कर दिया. पटेल ने सभी रियासतों का विलय प्रांतों में कर लिया. उन्होंने सभी रियासत राज्यों को मिलाकर संघ की स्थापना की. कश्मीर का भारत में विलय हो चुका था. जूनागढ़ भी भारत का अंग बन चुका था. हैदराबाद अब तक अलग अस्तित्व बनाए रखा हुआ था. निजाम भारत में विलय नहीं करने के फैसले पर अडिग था.

सरदार पटेल किसी भी हालत में ये काम भी कर लेना चाहते थे. वर्ष 1948 के बीतते बीतते उन्होंने निजाम को भी झुकने पर विवश करके हैदराबाद का विलय भारत में कर लिया. 30 मार्च 1949 को उन्होंने जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर को मिलाकर वृहद राजस्थान संघ बनाया. आजादी के बाद भारत करीब करीब एक शक्ल ले चुका था.

वर्ष 1950 केंद्र विदेशी मामलों संबंधी एक मीटिंग में सरदार पटेल ने गोवा की आजादी के बारे में एक संक्षिप्त टिप्पणी की थी लेकिन इस पर नेहरू ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का तकाजा देते हुए आपत्ति की थी. (फाइल फोटो)

पांडिचेरी और गोवा का विलय बाकी था
अब दो ही ऐसी जगहें थीं, जिन्हें भारत में मिलाना था. एक था फ्रांसीसी कॉलोनी बना हुआ पांडिचेरी और दूसरा पुर्तगाल का उपनिवेश गोवा. निश्चित तौर पर पटेल के दिमाग में ये दोनों ही राज्य भी कहीं ना कहीं रहे ही होंगे. लेकिन ये दोनों ही राज्य अंतरराष्ट्रीय विषय थे, लिहाजा इनका संबंध पटेल के विभाग से नहीं था.

गोवा संबंधी उस मीटिंग में पटेल ने क्या था
1950 में केंद्र सरकार की विदेशी संबंधों की समिति गोवा की समस्या पर चर्चा कर रही थी. ये दो घंटे तक चलती रही. सरदार उसमें रुचि नहीं दिखा रहे थे.

पटेल ने कहा था ये केवल दो घंटे का काम
राजमोहन गांधी की किताब “पटेल ए लाइफ” में कहा गया, “इस मीटिंग में पटेल आंख बंद करके ऐसे बैठे थे, मानो नींद में हों. अचानक सजग होकर उन्होंने कहा, गोवा में घुसना है? केवल दो घंटे का काम है. इस पर नेहरु ने आपत्ति की. वजह इस मामले का अंतरराष्ट्रीय तौर पर जुड़ा होना था. सरदार पटेल ने अपना आग्रह छोड़ दिया. फिर मौन में सिमट गए.”

जब भारतीय फौजों ने गोवा में आपरेशन करके उसे अपने कंट्रोल में ले लिया तो उसकी इस कार्रवाई का यूरोप में तीखा विरोध हुआ. संयुक्त राष्ट्र में 04 महाशक्तियों ने भी इसका विरोध किया. (फाइल फोटो)

नेहरू ने जब सेना भेजी तब यूरोप ने तीखा विरोध किया
इस घटना के साक्षी रहे केपीएस मेनन ने अपनी किताब में लिखा, इस घटना के 12 साल बाद जब नेहरू के नेतृत्व में सेना ने गोवा में प्रवेश किया, तब दो घंटे से थोड़ा ज्यादा ही समय लगा. लेकिन इस पर यूरोपीय देशों ने बहुत तीखी प्रतिक्रिया करते हुए भारत के कदम का विरोध किया.

संयुक्त राष्ट्र में बड़ी शक्तियां भारत के खिलाफ हो गईं
ये आशंका जाहिर की जाने लगी थी कि संयुक्त राष्ट्र में भी भारत को इस मामले में तीखा विरोध सहना पड़ेगा. ऐसा हुआ भी. 07 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और फ्रांस ने भारत के इस कदम का विरोध किया. हालांकि भारत के साथ खुलकर उस समय श्रीलंका, लाइबेरिया, संयुक्त अरब अमीरात आ गए. उन्होंने पुर्तगाल से अपील की कि इस मामले में उसे भारत के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाना चाहिए.

ये भी हुआ कि ब्रिटेन, अमेरिका, तुर्की, फ्रांस समेत कई देशों ने एक बयान जारी करके भारत से तुरंत युद्धविराम करने और अपनी सेनाएं वापस लौटाने की मांग की.

तब सोवियत संघ खुलकर भारत के साथ आया
सबसे बड़ी बात ये हुई कि सोवियत संघ ने खुलकर इस मामले में भारत का साथ दिया और ये विरोध प्रस्ताव गिर गया. हालांकि भारत ने इस मामले में पूरी तैयारी की हुई थी. रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन को खासतौर पर संयुक्त राष्ट्र की मीटिंग में हिस्सा लेने भेजा गया. हालांकि ये शायद भारत की पर्दे की पीछे राजनयिक कूटनीति थी कि पुर्तगाल ने खुद ही इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में नहीं उठाने का फैसला कर लिया. इस तरह गोवा पुख्ता तौर पर भारत का अंग बन गया.

Tags: Goa, Goa government, Modi, Pandit Jawaharlal Nehru, Sardar patel

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