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J&K: BJP-PDP के रास्ते अलग होने से लेकर विधानसभा भंग होने तक, पढ़ें क्या-क्या हुआ

J&K: BJP-PDP के रास्ते अलग होने से लेकर विधानसभा भंग होने तक, पढ़ें क्या-क्या हुआ

बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से समर्थन के बाद

बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से समर्थन के बाद

सरकार बनाने की कोशिश में जुटी पीडीपी-एनसी और कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा को भंग कर दिया है.

    मार्च 2015 में जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और भाजपा की गठबंधन सरकार बनी थी. तब वहां के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद बने थे, उनके निधन के बाद महबूबा मुफ्ती सीएम बनीं. इस साल 16 जून को पीडीपी-बीजेपी गठबंधन से बीजेपी अलग हो गई और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

    -19 जून से वहां राज्यपाल शासन लगा हुआ. बता दें कि 19 दिसंबर को राज्यपाल शासन के छह महीने पूरे हो जाएंगे. इसे और अधिक बढ़ाया नहीं जा सकता है. 19 दिसंबर तक यदि कोई पार्टी सरकार बनाने पर सहमत नहीं होती है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लाया जा सकता है.

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    - 21 नवंबर को खबर आई कि जम्मू-कश्मीर की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के सीनियर नेता अल्ताफ बुखारी वहां के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं. खबरों में कहा जा रहा था कि कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच सरकार बनाने को लेकर डील हुई है. बैठक के बाद अल्ताफ ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा था, "यह पक्का हो चुका है कि तीनों पार्टियां (कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस) गठबंधन करके राज्य की खास पहचान को बचाए रखने का प्रयास करेंगी."

    लेकिन सरकार बनाने की कोशिश में जुटी पीडीपी-एनसी और कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए 21 नवंबर को रात 9 बजे से पहले राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा को भंग कर दिया है.

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    -राज्यपाल शासन लागू होने के बाद (19 जून से) से पीडीपी-कांग्रेस के बीच गठबंधन सरकार बनाने की अटकलें जोरों पर थी.

    -2 जुलाई को खबर आई थी कि पीडीपी ने कांग्रेस को साथ मिलकर सरकार बनाने का ऑफर दिया है. लेकिन कांग्रेस नेता मीर ने गठबंधन सरकार बनाने की अटकलों को खारिज कर दिया था.



    -पीडीपी से अलग होने के बाद बीजेपी ने राज्य में तुंरत में राज्यपाल शासन लगाने की मांग की थी. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जल्द विधानसभा चुनाव कराने की मांग की थी.

    -पीडीपी फिर से सरकार बनाने की उधेड़बुन में थी. लेकिन मौजूदा के मद्देनज़र हो सकता है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की विधानसभा चुनाव कराने की मांग पूरी हो जाए.

    - इस बीच 21 अगस्त को सत्यपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त किया गया.

    - इस दौरान खबर आई कि बीजेपी सरकार बनाने के लिए एनसी, पीडीपी के विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है.

    -  20 नवंबर को खबर आई कि बीजेपी को मात देने के लिए पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच सरकार बनाने को लेकर डील हो गई है.

    - 21 नवंबर को महबूबा मुफ्ती ने 56 विधायकों के समर्थन के साथ सरकार बनाने का दावा किया, उनके बाद पीपल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन ने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया.

    - रात करीब 9 बजे राजभवन से विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी हुआ.

    PDP से BJP के अलग होने से पहले क्या-क्या हुआ था

    -कठुआ में आठ साल की बच्ची के गैंगरेप व मर्डर केस में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हिंदू एकता मंच के साथ बीजेपी के दो मंत्रियों द्वारा रैली करने पर पीडीपी ने गठबंधन खत्म करने की बात कही थी.

    -बीजेपी ने जम्मू कश्मीर सरकार में बीजेपी के मंत्रियों और बड़े नेताओं को मीटिंग के लिए बुलाया था ताकि इस मामले पर फैसला लिया जा सके. इस मीटिंग में अमित शाह, राम माधव व दूसरे बड़े नेता शामिल थे.

    -ईद के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सीज़फायर खत्म करने का ऐलान किया था. कश्मीर घाटी में रमज़ान के महीनों में सीज़फायर की घोषणा की गई थी. मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती चाहती थीं कि सीज़फायर की मियाद कुछ और दिनों के लिए बढ़ाई जाए. लेकिन केन्द्र सरकार कश्मीर के बिगड़ते माहौल को देखते हुए उनकी बात मानने के लिए तैयार नहीं थी.

    -जम्मू-कश्मीर के इतिहास में दूसरी बार सीज़फायर का ऐलान किया गया था. इससे पहले नवंबर 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कश्मीर में रमजान के पवित्र महीने के दौरान एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कि थी. रमजान के बाद भी इसे पांच महीने के लिए बढ़ा दिया गया. यानी वहां पिछली बार 23 मई 2001 तक सीज़फायर लगा था. उस वक्त जुलाई 2000 में आतंकवादी संगठन हिजबुल-मुजाहिदीन ने भी एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की थी. लेकिन दो हफ्ते के दौरान ही हिजबुल-मुजाहिदीन ने सीज़फायर को वापस ले लिया. दरअसल ये संगठन चाहता था कि पाकिस्तान को भी कश्मीर पर बातचीत के लिए शामिल किया जाए. लेकिन उस वक्त गृह सचिव कमल पांडे ने उनकी बात नहीं मानी थी.

    -सीज़फायर का कोई फायदा नहीं हुआ. रमजान के दौरान आतंकी घटनाओं की संख्या दोगुनी हो गई. आतंकवादी संगठनों में ढेर सारी भर्तियों में शुरू हो गई. इसके अलावा ग्रेनेड हमलों में भी भारी तेजी आई.

    -ईद से ठीक पहले राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी और भारतीय सेना के सैनिक औरंगजेब की हत्या कर दी गई. घाटी के हालात बिगड़ते गए और ऐसे में केन्द्र सरकार पर ये दबाव बढ़ गया कि वो सीज़फायर को तुरंत खत्म करे.

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    Tags: Jammu and kashmir, Jammu and kashmir politics, Mehbooba mufti, Satyapal malik

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