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विवेकानंद से प्रभावित थे भारत को बिजनेस की ABCD सिखाने वाले जमशेदजी टाटा

News18Hindi
Updated: May 19, 2020, 8:15 AM IST
विवेकानंद से प्रभावित थे भारत को बिजनेस की ABCD सिखाने वाले जमशेदजी टाटा
जमशेदजी टाटा और स्‍वामी विवेकानंद की 1893 में इम्प्रेस ऑफ इंडिया शिप में अमेरिकी की समुद्री यात्रा के दौरान मुलाकात हुई थी.

19 मई 1904 को जमशेदजी टाटा (Jamsetji Nusserwanji Tata) का देहांत हुआ था. वो भारत को आत्‍मनिर्भर देश बनाने की सोच रखते थे. जमशेदजी टाटा के जीवन पर स्‍वामी विवेकानंद का भी काफी असर था.

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टाटा समूह के संस्‍थापक जमशेदजी नुसरवानजी टाटा (Jamsetji Nusserwanji Tata) ने अपने कारोबारी जीवन की शुरुआत अफीम (Opium) की खरीद-फरोख्‍त से की थी. उस समय अफीम का कारोबार कानूनी (Legal) था. दरअसल, ये 1850 का दौर था, जब पश्चिमी देश अपना वर्चस्‍व स्‍थापित करने के लिए पूरी दुनिया में भयानक मार-काट कर रहे थे. युद्ध में घायल सैनिकों को दर्द से निजात दिलाकर फिर लड़ने के लिए तैयार करने को अफीम खिलाई जाती थी. इस दौरान जमशेदजी गुजरात के नवसारी (Navsari) में अपनी पढ़ाई कर रहे थे. उनके पिता नुसरवानजी टाटा बॉम्‍बे (Bombay) में कारोबार कर रहे थे. उन्‍होंने अफीम के कारोबार में जबरदस्‍त मुनाफा कमाया. नवसारी में अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद जमशेदजी 14 साल की उम्र में बॉम्‍बे पहुंच गए.

ब्रिटेन यात्रा में हुआ कॉटन मिल की क्षमता और संभावनाओं का अहसास
जमशेदजी ने 17 साल की उम्र में मुंबई के एलफिंसटन कॉलेज में दाखिला लिया और टॉपर के तौर पर डिग्री पूरी की. इसके बाद वह पिता के व्यवसाय में लग गए. शुरुआत में उन्‍होंने पिता के कारोबार में हाथ बंटाया. वह 29 साल की उम्र तक पिता के साथ लगे रहे. जब उन्‍होंने 29 साल की उम्र में खुद का कारोबार शुरू किया तो उस दौर में सबसे मुनाफे वाले अफीम के कारोबार में भी उन्‍हें नाकामी ही हाथ लगी. इस दौरान उन्‍होंने कई देशों की यात्रा की. ब्रिटेन (Britain) की यात्रा के दौरान उन्‍होंने लंकाशायर कॉटन मिल (Lancashire Cotton Mills) का दौरा किया. इससे उन्‍हें इस कारोबार की क्षमता और संभावनाओं का अहसास हुआ.

टाटा समूह के संस्‍थापक जमशेदजी नुसरवानजी टाटा ने अपने कारोबारी जीवन की शुरुआत बॉम्‍बे में एक दिवालिया हो चुकी ऑयल मिल को खरीदकर कॉटन मिल स्‍थापित करने से की थी.




बॉम्‍बे में दिवालिया हो चुकी ऑयल मिल खरीद कर शुरू की कपड़ा मिल


भारत लौटने के बाद जमशेदजी ने बॉम्‍बे के चिंचपोकली में एक दिवालिया हो चुकी ऑयल मिल खरीद ली. इसके बाद इसमें एलेक्जेंड्रा मिल (Alexandra Mil) नाम से कपड़ा मिल खोली. ये मिल जब मुनाफा देने लगी तो उन्‍होंने इसे भारी मुनाफे में बेच दिया. इसके बाद मिल से मिले पैसों से उन्होंने 1874 में नागपुर (Nagpur) में एक कॉटन मिल खोली. यह बिजनेस भी चल निकाला. बाद में इसका नाम एम्प्रेस्स मिल (Empress Mill) कर दिया गया. यह वही दौर था, जब क्वीन विक्टोरिया भारत की महारानी बनीं. अपनी सोच और कड़ी मेहनत के बूते जमशेदजी ने टाटा फैमिली को अफीम के कारोबार से निकालकर एक बड़े बिजनेस एम्‍पायर में बदला.

ब्रिटिश होटल में नहीं ठहरने दिया तो बॉम्‍बे में खड़ा कर दिया होटल ताज
गुजरात के नवसारी में 3 मार्च 1839 को जन्मे जमशेदजी टाटा ने ही बॉम्‍बे के गेटवे ऑफ इंडिया के सामने होटल ताजमहल (Hotel Taj Mahal) बनाया था. इस होटल के बनाने की भी अलग ही कहानी है. दरअसल, जमशेदजी टाटा ब्रिटेन घूमने गए तो वहां एक होटल में उन्हें भारतीय (Indian) होने के कारण रुकने नहीं दिया गया. जमशेदजी ने ठान लिया कि वह ऐसे होटल बनाएंगे, जिनमें हिंदुस्तानी ही नहीं, पूरी दुनिया के लोग ठहरने की हसरत रखें. भारत लौटने के बाद उन्‍होंने होटल ताजमहल की नींव रख दी और 1903 में 4,21,00,000 रुपये के भारी खर्च से यह भव्‍य इमारत बनकर खड़ी हो गई. बताया जाता है कि होटल ताज भारत का पहला ऐसा होटल था, जिसमें बिजली की व्‍यवस्‍था थी.

शुरू कीं 4 बड़ी परियोजनाएं, जीवित रहते पूरी हो पाई सिर्फ एक
जमशेदजी ने अपने जीवन में चार बड़ी परियोजनाएं शुरू कीं. इनमें एक स्‍टील कंपनी, एक वर्ल्‍ड क्‍लास होटल, एजुकेशनल इंस्‍टीट्यूट और एक जलविद्युत परियोजना थी. इनके पीछे जमशेदजी की भारत को आत्‍मनिर्भर देश बनाने की सोच थी. हालांकि, उनकी जिंदगी में सिर्फ होटल ताज की परियोजना ही पूरी हो सकी. बाद में उनके सपने को टाटा परिवार की अगली पीढ़ियों ने पूरा किया. दुनिया को अलविदा कहने से पहले उन्होंने कपड़ा (Cloth), चाय (Tea), तांबा (Copper), पीतल (Brass) का बड़ा साम्राज्य खड़ा कर दिया था. आज उनकी ओर से शुरू की गई कंपनियां दिग्गज टाटा समूह (Tata Group) के तौर पर पहचानी जाती हैं. टाटा समूह आज नमक से लेकर कारें, ट्रक और सॉफ्टवेयर तक बनाता है.

स्‍वामी विवेकानंद से पहली मुलाकात का टाटा पर पड़ा काफी असर
जमशेदजी टाटा के जीवन पर स्‍वामी विवेकानंद का भी काफी असर हुआ. कहा जाता है कि एक यात्रा के दौरान स्‍वामी विवेकानंद के साथ हुई बातचीत से प्रभावित होकर ही उन्‍होंने शिक्षा और रोजगार की दिशा में बड़े काम किए. दरअसल, 1893 में स्‍वामी विवेकानंद शिप से वर्ल्ड रिलीजन कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए अमेरिका जा रहे थे. जमशेदजी भी उसी एसएस इम्प्रेस ऑफ इंडिया शिप पर सवार थे. स्‍वामी विवेकानंद को शिप से बेंकूवर पहुंचने के बाद शिकागो के लिए ट्रेन पकड़नी थी. समुद्र यात्रा के दौरान दोनों ने काफी समय साथ गुजारा.



स्‍वामी विवेकानंद ने सुझाया था टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर का विकल्‍प
बेंकुवर यात्रा के दौरान बातचीत में टाटा ने विवेकानंद को बताया कि वह भारत में स्टील इंडस्ट्री लाना चाहते हैं. तब स्वामी विवेकानंद ने उन्हें सुझाव दिया कि टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर करेंगे तो भारत किसी पर निर्भर नहीं रहेगा और युवाओं को रोजगार भी मिलेगा. तब जमशेदजी टाटा ने ब्रिटेन के उद्यमियों से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की बात की, लेकिन मना कर दिया. इसके बाद उन्‍होंने अमेरिका के उद्योगपतियों के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का समझौता किया. इसी से टाटा स्टील की नींव पड़ी और जमशेदपुर मे पहली फैक्ट्री लगी. जमशेदजी के बारे में बताया जाता है कि देश में पहली कार खरीदने वाले शख्‍स भी वही थे.

अपने कर्मचरियों के लिए पीएफ समेत कई कल्‍याणकारी काम किए
दादाभाई नौरोजी और फिरोजशाह मेहता जैसे कई राष्ट्रवादी व क्रांतिकारी नेताओं से उनके नजदीकी संबंध थे. दोनों पक्षों ने अपनी सोच और कार्यों से एक दूसरे को बहुत प्रभावित किया था. वह मानते थे कि आर्थिक स्वतंत्रता (Economic Independence) ही राजनीतिक स्वतंत्रता का आधार है. कल्याणकारी कामों और देश को एक बड़ी ताकत बनाने के दृष्टिकोण के कारण वह अपने समय के कारोबारियों से काफी आगे निकल गए थे. उन्‍होंने अपने कर्मचारियों के लिए पीएफ समेत कई सुविधाएं दी थीं. बेंगलुरू में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (Indian Institute of Science) की स्थापना के लिए उन्होंने अपनी आधी से अधिक संपत्ति दान कर दी थी. इनमें 14 इमारतें और मुंबई की चार जमीनें शामिल थीं. जदमेशजी टाटा का निधन 19 मई 1904 को जर्मनी में हुआ था. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने जमशेदजी टाटा को आधुनिक भारत का फाउंडर मेंबर कहा था.

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First published: May 19, 2020, 8:15 AM IST
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