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न तो भारत और न चीन, इस देश की एयरफोर्स है एशिया में बेस्ट

जापानी वायु सेना जल्द ही अमेरिका के बाद दुनिया की नंबर दो की वायु सेना होगी (flickr)

जापानी वायु सेना जल्द ही अमेरिका के बाद दुनिया की नंबर दो की वायु सेना होगी (flickr)

जापान की वायुसेना अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर सबसे मजबूत सेना (Japanese air force will be strongest after America) की गिनती में आने जा रही है. हाल ही में शांतिप्रिय देश जापान ने अपने रक्षा बजट समेत एयरफोर्स पर काफी पैसे लगाए.

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    भले ही चीन से लेकर कई दूसरे देश लगातार एक से बढ़कर एक घातक लड़ाकू विमान तैयार करने या खरीदने का दावा करें लेकिन इस मामले में बाजी वो देश मार रहा है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की. एशियाई देश जापान की एयर फोर्स अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर मानी जा रही है. यानी एयर फोर्स के मामले में ये एशिया का सबसे मजबूत देश होने जा रहा है. वो अपने यहां घातक स्टील्थ फाइटर जेट के अलावा छठीं जेनरेशन का फाइटर प्लेन भी बना रहा है.

    भारत-प्रशांत क्षेत्र में जापान अपनी सेना पर सबसे ज्यादा खर्च करने वालों में नौंवे नंबर पर है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिप्री) के मुताबिक लगभग 49.1 बिलियन डॉलर के साथ ये खर्च के मामले में नौंवे स्थान पर है. इसके अलावा गोलाबारूद के मामले में जापान पर अमेरिका का असर है. दरअसल 1960 में दोनों देशों के बीच म्युचुअल सिक्योरिटी समझौता हुआ था, जिसके कारण दोनों ही देश खतरनाक गोला-बारूद तैयार करने में एक-दूसरे की मदद करते हैं.

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    अब आते हैं एयर फोर्स पर तो जापानी एयर फोर्स, जिसे JASDF के नाम से भी जाना जाता है, वो 1954 में अस्तित्व में आई. सत्तर के दशक में इस देश ने पहला F-1 एयरक्राफ्ट बनाया. इसके बाद F-2 श्रेणी का वाइपर जीरो बना, जो अमेरिकी तकनीक पर आधारित था लेकिन जापान में ही बना था. कम से मीडियम रेंज तक प्रहार करने वाला ये जेट काफी शानदार माना जाता है जो अपने टारगेट को तबाह करके ही दम लेता है.

    Japan Air Force
    स्टील्थ फाइटर जेट के होने को किसी देश की एयर फोर्स के लिए सबसे अहम माना जा रहा है- सांकेतिक फोटो


    रक्षा उपकरण तैयार करने वाली जापानी कंपनी मित्सुबिसी इलेक्ट्रिक के पास US F-15 ईगल बनाने का भी लाइसेंस है. इसके अलावा जापान में फाइटर जेट्स की एक पूरी फौज है, जो अत्याधुनिक तकनीक पर काम करती है. साल 2020 की जुलाई में अमेरिका के साथ करार के तहत जापान ने एक बड़ी डील साइन की. लगभग 23 बिलियन डॉलर की डील के साथ जापान वो देश बन जाएगा, जिसके पास F-35 की पूरी रेंज होगी, साथ ही जिसके पास 147 स्टील्थ जेट होंगे. ये अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा है.

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    स्टील्थ फाइटर जेट के होने को किसी देश की एयर फोर्स के लिए सबसे अहम माना जा रहा है इसलिए एक बार ये भी देखते हैं कि आखिर स्टील्थ जेट क्या है. ये वो जेट होता है, जिसे रडार, इन्फ्रारेड, सोनार और अन्य पकड़ने वाले तरीकों से पकड़ना लगभग नामुमकिन है. इसका डिजाइन काफी कॉम्पलेक्स होता है ताकि सेंसर से बचा रह सके.

    Japan Air Force
    जापान 48 बिलियन डॉलर लगाकर छठीं जेनरेशन का स्टील्थ जेट बनाने जा रहा है- सांकेतिक फोटो


    हालांकि इसके साथ भी कई मुश्किलें हैं. जैसे स्टील्थ जेट का मेंटेनेंस काफी महंगा है. इन्हें लगातार मेंटेनेंस की जरूरत होती है. साथ ही इनकी बॉडी भी सामान्य लड़ाकू विमानों जितनी मजबूत नहीं होती है. इसके अलावा जो सबसे बड़ी मुश्किल है, वो है इन्हें बनाने का खर्च. ये काफी महंगे होते हैं मिसाल के तौर पर अमे्रिका के B-2 Spirit फाइटर जेट को लें तो वे सामान्य बमवर्षक विमानों से कई गुना महंगा है. माना जाता है कि इस विमान की एक छोटी टुकड़ी बनाने में अमेरिकी सेना ने लगभग $105 बिलियन डॉलर खर्च किए.

    बीते साल के आखिर में जापान ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना के बारे में बताया. वो 48 बिलियन डॉलर लगाकर छठीं जेनरेशन का स्टील्थ जेट बनाने जा रहा है, जिसे फिलहाल F-X नाम दिया गया. दावे के मुताबिक ये 2035 तक सेना में काम के लिए तैयार हो जाएगा. इसके साथ ही जापान के पास अमेरिका के बाद दूसरे नंबर की सबसे मजबूत वायु सेना होगी.

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    रक्षा बजट के मामले में जापान तेजी से आगे आ रहा है- सांकेतिक फोटो


    जापान अपना सैन्य बजट लगातार बढ़ा रहा है. जापान के प्रधानमंत्री योशिहिडे सुगा ने 2021-22 के लिए 51.7 बिलियन डॉलर का रक्षा बजट साइन किया, जो पिछले साल से 1 प्रतिशत ज्यादा है. यूरेशियन टाइम्स में इसका जिक्र है. तो कुल मिलाकर देखें तो न केवल बजट, बल्कि रक्षा उपकरणों के मामले में भी जापान आगे आता जा रहा है.

    वैसे जापान के सैन्य बजट बढ़ाने और रक्षा उपकरणों की डील अपने-आप में अनोखी है क्योंकि वो दुनिया के सबसे शांतिप्रिय देशों में गिना जाता है. दरअसल दूसरे विश्वयुद्ध में परमाणु हमले का दंश झेल चुके इस देश के संविधान में अंतराष्ट्रीय मसलों को हल करने के लिए युद्ध का सहारा लेने की मनाही है. जापानी सेना केवल आंतरिक सुरक्षा और शांति मिशन के लिए ही फिलहाल काम कर रही है, लेकिन बीते कुछ सालों से जिस तरह से चीन आक्रामक हुआ है, उसे देखते हुए जापान के लिए भी सुरक्षा पर ध्यान देना लाजिमी है.

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