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आज ही के दिन जापान में सुनामी ने ढाया था कहर, हजारों की गई थी जान

भूकंप के बाद आई सुनामी (Tsunami) ने 2011 में अभूतपूर्व तबाही मचा दी थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

11 मार्च 2011 को जापान (Japan) के पास समुद् में एक खतरनाक भूकंप (Earthquake) आया था जिससे निकली सुनामी (Tsunami) ने हजारों लोगों की जान ले ली थी.

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    जापान (Japan) देश दुनिया के उन इलाकों में से एक है जहां भूकंप (Earthquake) बहुत आते हैं. पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic plates) की सीमा बनाने वाली रिंग ऑफ फायर पर स्थित यह देश भूकंप के लिए बहुत ही संवदेनशील क्षेत्र माना जाता है. 11 मार्च साल 2011 का दिन जापान के लिए अभूतपूर्व दुर्घटना वाला दिन रहा. इस दिन 9 की मात्रा का भूकंप उत्तरपूर्वी जापान के तट पर आया जिससे निकली सुनामी (Tsunami) ने हजारों लोगों की जान ले ली. इस हादसे आज भी जापान उबर नहीं पाया है.

    एक दशक पहले हुआ था हादसा
    इस घटना को हुए आज एक दशक का समय हो रहा है. इस हादसे में 18 हजार लोगों की जानें गई थीं. जापान जैसे देश के लिए भूकंप कोई नई या अनोखी बात नहीं थी. वहां लोगों को भूकंप के आने पर तुरंत क्या करना चाहिए इसकी बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है. जापान की सरकार कई तरह के मॉक ड्रिल  चलाती है जिससे लोगों को भूकंप के आने पर हालात से तुरंत कैसे निपटना चाहिए इसकी जानकारी बनी रहे.

    घातक भूकंप के बाद सुनामी
    लेकिन रिक्टर स्केल पर 9 की तीव्रता का भूकंप बहुत ही घातक होता है. इस भूकंप के कारण पूरे प्रशांत तटीय क्षेत्रों के करीब 20 देशों में सुनामी की चेतावनी जारी की गई.  जापान के भी तटीय इलाकों को खाली कराया गया. लेकिन ऐसी महाविनाशक सुनामी की किसी को उम्मीद नहीं थी. भूकंप के कारण 6 से दस मीटर ऊंची सुनामी लहरें पैदा हुईं जिन्होंने जापान के तटीय इलाकों में बड़े पैमाने पर कहर ढाते हुए तट से 10 किलोमीटर अंदर तक आकर तबाही मचा दी.

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    बहुत सारी सम्पत्ति को नुकसान
    भूकंप और उसके बाद सुनामी ने जापान को तहस नहस कर दिया. सड़कों और रेलवेको तो भारी नुकासन हुआ ही कई जगह आग लगने की घटना के साथ एक  बांध के ढ़हने की भी खबर आई. पूर्वोत्तर जापान में 44 लाख घरों की बिजली ठप्प हो ईऔर 14 लाख घरों में पेयजल आपूर्ति ठप्प हो गई. बहुत सारे बिजली घर बंद हो गए.

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    फुकुशिमा (Fukushima) संयंत्र को पूरी तरह से बंद होने में 30 से 40 साल लगेंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)




    परमाणु संयंत्र में विस्फोट
    इस हादसे में लोगों की जान जाने के अलावा सबसे बड़ा और खतरनाक नुकसान यह हुआ कि कम से कम दो परमाणु बिजली संयंत्रों से रेडियोधर्मी विकिरण का खतरा पैदा हो गयाथा. इसकी वजह से इनके आसपास के इलाकों को खाली कराया गया और उन क्षेत्रों में आपातकाल लगा दिया गया. फुकोशिमा 1 परमाणु संयंत्र में भूकंप के पहले झटके के 24 घंटे बाद एक विस्फोट हुआ  जिससे संयंत्र के बाहरी कंक्रीट ढांचे को नुकसान हुआ, लेकिन भीतरी भाग सुरक्षित बताया गया.

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    30-40 साल लगेंगे संयंत्र बंद होने में
    फुकोशिमा हादसे के समय जापान में  दो परमाणु संयंत्र निर्माणाधीन थे. जबकि 54 संयंत्र देश की 30 प्रतिशत बिजली आपूर्ति को पूरा करते थे. फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को अभी बंद ही रखा गया है. उसके द्वारा निकले विकिरण अब भी जांचे जा रहे हैं. जापान की टेपको यानि टोक्यो इलेक्ट्रिक पॉवर कंपनी का कहना है कि संयंत्र पूरी तरह से  बंद होने में ही 30 से 40 साल और लगेंगे.

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    फुकुशिमा (Fukushima) शहर आर्थिक रुप से काफी कुछ इस हादसे से उबर चुका है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    कितना खर्च कर चुका है जापान
    बताया  जा रहा है कि इस हादसे के कारण जापान को  25 ट्रिलियन येन का नुकसान हुआ था. जापान ने खुद को फिर से बसाने के लिए 31.3 ट्रिलियन येन खर्च किए. बताया जाता है कि यह राशि मिस्र की अर्थव्यवस्था के बराबर है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक  अगले पांच साल में जापान 16 ट्रिलियन येन और ज्यादा खर्च करने वाला है.

    यह जापान में अब तक का आया सबसे खतरनाक भूकंप और सबसे विनाशाकारी सुनामी  हादसा था. यूं तो आर्थिक रूप से जापान काफी कुछ उबर गया है जो बेमिसाल है, लेकिन जिन लोगों ने अपनों को खोया है उनके जख्म अभी तक नहीं भरे हैं जिन्होंने इस हादसे में अपनों को खोयाहै.
    Published by:Vikas Sharma
    First published: