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Explained: क्यों जापान के लोग अपनी ही सेना के लिए खतरा बन चुके हैं?

जापान की बड़ी आबादी उम्रदराज है, जिसके कारण जापान अनोखी ही समस्या से जूझ रहा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
जापान की बड़ी आबादी उम्रदराज है, जिसके कारण जापान अनोखी ही समस्या से जूझ रहा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन (Pentagon) हर साल लगभग 200,000 युवाओं को सेना में भर्ती करता है. जबकि जापान अपनी सेना में (Japan army)सालाना केवल 14,000 नई भर्तियां कर पाता है, वो भी काफी मुश्किलों के बाद.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 29, 2020, 2:34 PM IST
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कई एशियाई देशों में चीन की दादागिरी को देखकर डरा हुआ जापान अपना सैन्य बजट बढ़ा चुका है. इसके साथ ही वो रक्षा बजट के मामले में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर आ चुका है, जबकि भारत खिसककर चौथे स्थान पर है. वैसे जापान भले ही अपना सैन्य बजट बढ़ा चुका लेकिन उसके साथ असल समस्या ये है कि सेना में आखिर भर्ती किसे करें. जापान की बड़ी आबादी उम्रदराज है, जिसके कारण जापान अनोखी ही समस्या से जूझ रहा है.

एक्सपर्ट इस देश को डेमोग्राफिक टाइम बम पर बैठा मान रहे हैं. बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर जोड़ों ने संतान जन्म पर ध्यान नहीं दिया तो अगले 20 सालों में यहां की 35 प्रतिशत आबादी 80 साल से ज्यादा आयु वालों की होगी. वहीं अगले 5 ही सालों में यानी 2025 तक जापान का हर 3 में से 1 इंसान 65 साल की उम्र से ज्यादा का होगा.

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बुजुर्ग आबादी बढ़ने का सीधा असर जनसंख्या पर होगा और ये कम होती जाएगी. विशेषज्ञों को डर है कि अगर जनसंख्या न बढ़ाई गई तो अगले 50 सालों में आबादी घटकर महज 80 मिलियन रह जाएगी, और 100 सालों में केवल 40 मिलियन. यानी केवल बुजुर्ग आबादी नहीं बढ़ रही, बल्कि आबादी घट भी रही है.
बुजुर्ग आबादी बढ़ने का सीधा असर जनसंख्या पर होगा और ये कम होती जाएगी- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


नतीजा ये हुआ कि तकनीक और अनुशासन के मामले में काफी आगे रहा जापान अब सारे अजीबोगरीब कारणों से जाना जा रहा है. जैसे यहां इंसानों से ज्यादा कुत्ते-बिल्लियों के जन्म का रजिस्ट्रेशन हो रहा है. और एडल्ट डायपर, बेबी डायपर की जगह ले चुका है.

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ये नेशनल पावर में सीधी कमी है, जो जापान की संसद को डरा रही है. इसका असर सेना पर भी दिखने लगा. जापान के रक्षा मंत्रालय की एनुअल रिपोर्ट में इस बारे में बात की गई है. फोर्ब्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे सेना की सबसे बड़ी समस्या नई भर्तियां बन चुकी हैं.

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जापान को हर साल 14,000 नई भर्तियां करनी होती हैं ताकि सेना का साइज सही बना रहे यानी लोग रिटायर हों तो नए लोग उनकी जगह ले सकें. लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा. सेना को भर्ती के लिए 18 से 26 साल के और सेना में भर्ती के इच्छुक लोग कम मिल रहे हैं. बता दें कि जापान में सेना के पेशे की बजाए लोग तकनीक या शिक्षा जैसी चीजों में काम को वरीयता देते हैं. यही कारण है कि हाल के सालों में मिलिट्री में लो रैंक में भर्तियां 26% तक कम हो गईं.

सेना को भर्ती के लिए 18 से 26 साल के और सेना में भर्ती के इच्छुक लोग कम मिल रहे हैं- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


अब जापान सरकार मिलिट्री में भर्ती के लायक उम्र के लोगों की आबादी और घटने का अनुमान लगा रही है. वो मान रही है साल 2028 तक 18 से 26 साल की आबादी घटकर केवल 8 मिलियन रह जाएगी. अमेरिका से तुलना करें तो जापान की हालत साफ पता चलती है. अमेरिका में साल 2020 में 18 से 26 साल के 30 मिलियन से ज्यादा युवा हैं. पेंटागन हर साल लगभग 200,000 युवाओं को सेना में भर्ती करने का अभियान चलाता है. जबकि जापान सालाना केवल 14,000 नई भर्तियां कर पाता है, वो भी काफी संघर्ष के बाद.

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चीन एक-बच्चा पॉलिसी के बाद भी इनसे आगे है. वहां 18 से 23 साल की उम्र के 104 मिलियन लोग हैं. पीपल्स लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) हर साल 400,000 लोगों की आर्मी में नियुक्ति करती है. यानी हर 260 में से एक चीनी युवा आर्मी में जाता है.

इन हालातों में अगर दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो गई तो तकनीकी तौर पर समृद्ध होने के बाद भी जापान के लिए भारी मुश्किल हो सकती है. यही कारण है कि जापान सरकार जन्मदर बढ़ाने और लोगों को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित करने के अभियान चला रही है. साथ ही साथ सेना में भर्ती की उम्र 26 साल से बढ़ाते हुए 32 साल करने की चर्चा हो रही है.

जापान सरकार जन्मदर बढ़ाने और लोगों को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित करने के अभियान चला रही है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


इसके अलावा विकल्प के ही तौर पर जापान रक्षा बजट बढ़ा रहा है. जैसे वहां की कैबिनेट ने साल 2021-22 का सैन्य बजट बढ़ाते हुए उसे 51.7 बिलियन डॉलर कर दिया. साथ ही वो अत्याधुनिक हथियारों की खरीदी में भी इसका बड़ा हिस्सा लगा रहा है. इस सारी कवायद के बीच जापान में लगातार लोगों को शादी और संतान पैदा करने के लिए प्रेरित करने की कोशिश रही है.

इसी साल अप्रैल से सरकार ने 35 साल तक की उम्र के कपल के शादी करने पर उनके लिए 4 लाख 25 हजार रुपए इंसेंटिव देने का एलान किया. कुछ शर्तें भी हैं, जैसे शादी करने वाले जोड़े की उम्र 40 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और उनकी सालाना आय 33 लाख रुपए से ज्यादा नहीं हो. इसे बेबी बोनस कहा जा रहा है. साथ में कंपनियां भी जोड़ों को संतान जन्म पर लंबी पेड लीव दे रही हैं.

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इधर चीन में वन चाइल्ड पॉलिसी का अलग ही असर हुआ. वहां पुरानी सोच वाले चीनी कपल ने लड़कों के जन्म को तवज्जो दी. इस वजह से चीन में आज लड़कियों का प्रतिशत लड़कों से काफी कम है. हालात इतने बिगड़े कि अब चीन में शादी के लिए पुरुषों को दुल्हनें नहीं मिल रहीं. यहां तक कि वहां शादियों के लिए गरीब देशों से लड़कियों की तस्करी की जा रही है. यही सब देखते हुए सरकार ने वहां साल 2013 के अंत में वन चाइल्ड पॉलिसी को विराम दे दिया. अब वहां जोड़े दो बच्चे पैदा कर सकते हैं. हालांकि इसपर किसी तरह का इंसेंटिव नहीं है.
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