निधन के चंद घंटों पहले ही चार दिनों की यात्रा करके लौटे थे नेहरू

रातभर वो करवटें बदलते रहे और दर्द की शिकायत करते रहे, सुबह 06.30 बजे उन्हें तगड़ा हार्ट अटैक हुआ

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 27, 2019, 6:10 PM IST
निधन के चंद घंटों पहले ही चार दिनों की यात्रा करके लौटे थे नेहरू
जवाहरलाल नेहरू अपने नाती राजीव गांधी के साथ (फाइल फोटो)
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 27, 2019, 6:10 PM IST
26 मई को जवाहर लाल नेहरू थके हुए थे. वो आमदिनों की तुलना में जल्दी सोने चले गए थे. रातभर उनकी बेचैनी में बीती. वो कई बार उठे. हर बार उनका विश्वस्त सेवक नाथूराम उन्हें दर्द निवारक दवाएं देता रहा.

इससे पहले वो हेलीकॉप्टर से देहरादून से शाम 04.00-05.00 बजे के आसपास दिल्ली के लिए चले थे. देहरादून के पोलो ग्राउंड पर उनका हैलीकॉप्टर उन्हें दिल्ली ले जाने के लिए खड़ा था. छोटी सी भीड़ उन्हें विदा करने आई थी.


मिड-डे ने कुछ साल पहले देहरादून के एक पुराने पत्रकार राज कंवर के हवाले एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. जिसमें बताया गया था कि उस शाम नेहरू जब देहरादून से विदा हुए तो कैसे लग रहे थे.

चार दिन के अवकाश पर देहरादून गए थे

नेहरू दरअसल देहरादून में चार दिनों के अल्प अवकाश पर आए थे. उनकी सेहत जनवरी में भुवनेश्वर के हार्ट अटैक के बाद सुधर नहीं पाई थी. उनका रूटीन प्रभावित हो चुका था. उनका ज्यादातर काम बिना विभाग के मंत्री लाल बहादुर शास्त्री को दे दिया गया था. नेहरू जब चलते थे तो उनका बायां पैर दिक्कत में लगता था.

कितने घंटे सोते थे और कितने घंटे काम करते थे जवाहरलाल नेहरू 

उस शाम वो आखिरी बार देखे गए थे
Loading...

देहरादून की 26 मई को वो शाम आखिरी शाम थी, जब नेहरू को आखिरी बार सार्वजनिक तौर पर देखा गया था. वो बेटी इंदिरा गांधी के साथ हेलिकॉप्टर में चढ़े.

26 मई 1964 की शाम नेहरू जब देहरादून से रवाना हुए तो वो कमजोर नजर आ रहे थे. उन्होंने अपने चेहरे पर मुस्कुराहट लाने की कोशिश की लेकिन चेहरे पर दर्द को छिपाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था


हेलिकॉप्टर के दरवाजे पर खड़े होकर हाथ हिलाया. तब राज कंवर ने महसूस किया कि बायां हाथ ऊपर उठाते समय नेहरू के चेहरे पर कुछ दर्द सा उभर आया था. उनकी बेटी इंदिरा उन्हें सहारा देने के लिए खड़ी थी. बाएं पैर के मूवमेंट में भी दिक्कत महसूस हो रही थी. उन्होंने चेहरे पर भरपूर मुस्कुराहट लाने की कोशिश की लेकिन पूरे तौर पर ऐसा कर नहीं पाए.

रातभर करवटें बदलते रहे
नेहरू करीब आठ बजे के आसपास दिल्ली पहुंचे. सीधे प्रधानमंत्री हाउस चले गए. रिपोर्ट्स की मानें तो वो थके हुए थे. पिछले कुछ समय वो अस्वस्थ चल रहे थे,लिहाजा उनके रूटीन पर भी इसका असर पड़ा था. वो रातभर करवटें बदलते रहे और पीठ के साथ कंधे में दर्द की शिकायत करते रहे. विश्वस्त सेवक नाथूराम उन्हें दवाएं देकर सुलाने का प्रयास करते रहे.

Nehru Death Anniversary: भारत विभाजन के लिए क्यों तैयार हो गए थे नेहरू, देखें इंटरव्यू

सुबह अटैक के बाद कोमा में चले गए
द गार्जियन की 27 मई 1964 की रिपोर्ट कहती है कि सुबह 06.30 बजे उन्हें पहले पैरालिटिक अटैक हुआ और फिर हार्ट अटैक. इसके बाद वो अचेत हुो गए. इंदिरा गांधी ने तुरंत उनके डॉक्टरों को फोन किया. तीन डॉक्टर तुरंत पीएम हाउस पहुंच गए. उन्होंने अपनी ओर से भरपूर कोशिश की लेकिन नेहरू का शरीर कोमा में पहुंच चुका था. शरीर से कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा था, जिससे पता लगे कि इलाज कुछ असर कर भी रहा है या नहीं. कई घंटे की कोशिश के बाद डॉक्टरों ने जवाब दे दिया.

27 मई से लोकसभा का सात दिनों का विशेष सत्र बुलाया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री नेहरू खासतौर पर कश्मीर और शेख अब्दुल्ला के बारे में कुछ सवालों का जवाब देने वाले थे. जब वो संसद में नहीं पहुंच तो बताया गया कि अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई है.

26 मई की सारी रात नेहरू बिस्तर पर करवटें बदलते रहे. वो पीठ और कंधे में दर्द की शिकायत कर रहे थे


दोपहर दो बजे निधन की घोषणा हुई
दोपहर 02.00 बजे स्टील मंत्री कोयम्बटूर सुब्रह्मणियम राज्यसभा में दाखिल हुए. उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ी हुईं थीं. उन्होंने बुझे हुए स्वर में केवल इतना कहा, रोशनी खत्म हो गई है. लोकसभा तुरंत स्थगित कर दी गई. कुछ घंटों बाद गुलजारी लाल नंदा को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा की गई.

ये हैं सबसे खूबसूरत सांसद, पश्चिम बंगाल से चुनाव जीतकर पहुंची संसद

आठ घंटे कोमा में रहे
दोपहर 02.05 बजे तक संसद में हर सांसद के पास ये खबर पहुंच चुकी थी. द न्यूयार्क टाइम्स ने तुरंत नेहरू के निधन पर एक अतिरिक्त संस्करण प्रकाशित किया, देश में भी समाचार पत्रों में दिन में विशेष संस्करण प्रकाशित हुए. द न्यूयार्क टाइम्स ने नेहरू आठ घंटे तक कोमा में रहे, उन्हें बचाया नहीं जा सका. गार्जियन ने घर के अंदरूनी सूत्रों का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी कि उन्हें आतंरिक हैमरेज हुआ था. इसमें पहले पैरालिटिक स्ट्रोक और फिर हार्ट अटैक हुआ.

शाम 04.00 बजे भीड़ प्रधानमंत्री हाउस के सामने इकट्ठा होने लगी. इसमें नेता, राजनयिक, आम जनता शामिल थी. अगले दिन उनका पार्थिव शरीर जनता के आखिरी दर्शन के लिए रखा गया. 29 मई को उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीतिरि्वाजों से हुआ.

मैं लंबे समय तक जिंदा रहूंगा
हालांकि निधन के मुश्किल से एक सप्ताह पहले नेहरू ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था, चिंता ना करें, मैं अभी लंबे समय तक जिंदा रहूंगा.

उस दिन शादियों का बड़ा साया था
27 मई को देशभर में शादियों का बड़ा साया था. जैसे ही नेहरू के निधन की खबर फैली. तुरंत सदमे की शोक की स्थिति हो गई. शादियां तो हुईं लेकिन कहीं कोई बाजा-गाजा नहीं बजा.

इन खूबसूरत सांसदों को देखकर थम जाएंगी लोकसभा की धड़कनें
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...