जयललिता की दूसरी पुण्यतिथि: जानिए, अभिनेत्री से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

जयललिता की दूसरी पुण्यतिथि: जानिए, अभिनेत्री से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर
जयललिता (फाइल फोटो)

बचपन से ही एक्टिंग का शौक रखने वाली 'जया' ने 1961 में 13 साल की उम्र में पहली बार अंग्रेजी फिल्म 'एपीसल' में एक बाल कलाकार के तौर पर सुनहरे पर्दे पर कदम रखा.

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  • Last Updated: December 5, 2018, 7:34 AM IST
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तमिल फिल्मों की सुपर स्टार और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की आज दूसरी पुण्यतिथि है. 5 दिसंबर 2016 को जयललिता ने रात 11 बजकर 30 मिनट पर चेन्नई के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली थी. उन्हें रविवार को कार्डियेक अरेस्ट हुआ था. तमिल फिल्मों की सफल अभिनेत्री जयललिता ने राजनीति के क्षेत्र में भी अपना लोहा मनवाया. जानिए उनके जीवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें.

बचपन से ही था एक्टिंग का क्रेज
आजादी के एक साल बाद 24 फरवरी 1948 को कर्नाटक के मैसूर जिले के मेलूकोट शहर में जयललिता का जन्म हुआ था. बचपन से ही एक्टिंग का शौक रखने वाली 'जया' ने 1961 में 13 साल की उम्र में पहली बार अंग्रेजी फिल्म 'एपीसल' में एक बाल कलाकार के तौर पर सुनहरे पर्दे पर कदम रखा. 1965 में एमजी रामचंद्रन के साथ तमिल फिल्म 'वेनिरा आदाई' में बतौर अभिनेत्री उन्होंने काम किया. बाद में रामचंद्रन के मार्गदर्शन में ही उन्होंने राजनीति में कदम रखा.

जयललिता की दिलचस्पी तमिल फिल्मों में काम करने से अधिक राजनीति में बढ़ती जा रही थी. 1980 में उन्होंने अपनी अंतिम तमिल फिल्म 'थेड़ी वंधा कादला' में बतौर अभिनेत्री काम किया.
रामचंद्रन के मार्गदर्शन में रखा राजनीति में कदम


अपने फिल्मी करियर को अलविदा कहने के बाद एम जी रामचंद्रन के नेतृत्व में पहली बार 1982 में 'जया' ने राजनीति में कदम रखा और अन्नाद्रमुक की सदस्यता ग्रहण की. जयललिता की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उन्होंने तमिलनाडु के कुद्दालोर में पहली बार रैली की तो लोगों की भारी भीड़ उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ी.

जयललिता की लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें 1983 में अन्नाद्रमुक की प्रचार टीम का हिस्सा बनाया गया. उन्हें प्रचार प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई. पहली बार थिरुचेंदुर सीट पर हुए उपचुनाव में उन्होंने पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार भी किया.

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कद बढ़ने के साथ-साथ रामचंद्रन से भी बढ़ती गई दूरी
जयललिता की लोकप्रियता जैसे-जैसे बढ़ती गई पार्टी प्रमुख रामचंद्रन के साथ उनके रिश्तो में भी दरार बढ़ने लगी. 1984 में 'जया' को पार्टी के कई पदों से हटा दिया गया. 1987 में रामचंद्रन की मृत्यु के बाद अन्नाद्रमुक दो टुकड़ों में बंट गई. एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन और जयललिता दोनों के पक्ष में समर्थक-कार्यकर्ता बंट चुके थे. 1988 में रामचंद्रन की पत्नी जानकी तमिलनाडु की मुख्यमंत्री तो बनीं, लेकिन सिर्फ 21 दिनों के छोटे से कार्यकाल के लिए. जानकी के हटते ही प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया.

जानकी के इस्तीफे के साथ एआईडीएमके में आया 'अम्मा' का राज
राष्ट्रपति शासन हटने के बाद तमिलनाडु में चुनाव हुआ, जिसमें करुणानीधि की पार्टी डीएमके को भारी जीत मिली. पार्टी की हार के बाद जानकी ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. जानकी के पार्टी छोड़ने से जयललिता के लिए आगे की राह आसान हो गई.

बदसलूकी पर ली थी मुख्यमंत्री बन सदन में वापस आने की प्रतिज्ञा
25 मार्च 1989 को तमिलनाडु विधानसभा में बजट पेश किया जा रहा था. इस दौरान डीएमके और एआईडीएमके के बीच तल्खी काफी बढ़ गई. जयललिता के सदन से निकलने के क्रम में डीएमके के एक सदस्य ने उन्हें रोकने की कोशिश की. उसने उनकी साड़ी इस तरह से खींची कि उनका पल्लू गिर गया और जयललिता भी ज़मीन पर गिर गईं.

अपमानित जयललिता ने प्रतिज्ञा ली की कि वे इस सदन में तभी कदम रखेंगी जब वो महिलाओं के लिए सुरक्षित हो जाएगा. दूसरे शब्दों में वे अपने आप से कह रही थीं कि वे अब तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री के तौर पर ही वापस आएंगी.

1991 में पहली बार बनी मुख्यमंत्री और उन पर आय से अधिक संपत्ति मामले में जेल गईं. इसके बाद 1991 विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक और कांग्रेस के गठबंधन ने डीएमके को करारी शिकस्त दी. पहली बार जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं. 1996 में बतौर मुख्यमंत्री पांच साल पूरा करने के बाद जयललिता चुनाव की तैयारी में थी कि उसी समय उन पर और उनकी सहयोगी शशिकला पर आय से अधिक संपत्ति मामले में 48 केस दर्ज हुए और उन्हें जेल तक जाना पड़ा.

दोबारा मिली जीत के बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी से रहना पड़ा दूर
पांच सालों तक सत्ता से दूर रहीं जयललिता अपनी पार्टी के जीत के बावजूद 2001 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने में असफल रहीं. अन्नाद्रमुक ने निर्विरोध तौर पर उन्हें अपना अपना नेता तो चुना, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता को दोबारा मुख्यमंत्री बनने से रोक दिया. कोर्ट के आदेश के बाद एआईडीएमके के विधायकों ने जयललिता के करीबी पन्नीर सेल्वम को सदन में अपना नेता चुना और वो मुख्यमंत्री बने.

कोर्ट से इजाजत मिलने पर फिर से लड़ा चुनाव और दूसरी बार मुख्यमंत्री बनीं
2003 में जब कोर्ट ने जयललिता को चुनाव लड़ने की इजाजत दी तो उन्होंने अंदीपट्टी सीट से चुनाव लड़ा और दूसरी बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने में सफल रहीं.

2006 में हुए चुनाव में डीएमके गठबंधन चुनाव से मिली हार के बाद 'अम्मा' को 2011 तक विपक्ष के नेता के तौर पर रहना पड़ा. 2011 में जब पुन: विधानसभा चुनाव हुआ तो अन्नाद्रमुक राज्य में जीत दर्ज करने में सफल रही और जयललिता फिर से मुख्यमंत्री चुनी गईं. इधर, जयललिता की सहयोगी और करीबी माने जाने वाली शशिकला से उनकी दूरी भी बढ़ती गई.

2014 में फिर से कुछ दिनों के लिए जाना पड़ा जेल, करीबी पन्नीर सेल्वम ने संभाली सत्ता
तीसरी बार तमिलनाडु की सत्ता संभालने के 3 साल बाद ही 2014 में आय से अधिक की संपत्ति के केस में जयललिता पर 4 साल के लिए जेल की सजा के साथ 100 करोड़ रुपए जुर्माना लगाया गया. कोर्ट के आदेश के बाद जयललिता को हिरासत में लिया गया. 29 सितंबर 2014 को 'अम्मा' के सहयोगी पन्नीर सेल्वम ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. जयललिता ज्यादा दिनों तक सत्ता से दूर नहीं रही और कोर्ट से निर्दोष साबित होने के बाद 22 मई 2015 को फिर से मुख्यमंत्री बन गईं.

5 नवंबर 2016 को ली अंतिम सांस
दो महीने से अधिक समय तक बीमार रही जयललिता को 4 दिसंबर को कार्डियेक अटैक हुआ था. 5 दिसंबर (सोमवार) को रात 11 बजकर 30 मिनट पर चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली.

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