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क्या PK कभी जेडीयू के 'वफादार' थे? हमेशा सवालों के घेरे में रही उनकी भूमिका

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: January 29, 2020, 5:16 PM IST
क्या PK कभी जेडीयू के 'वफादार' थे? हमेशा सवालों के घेरे में रही उनकी भूमिका
प्रशांत किशोर को जेडीयू ने पार्टी से बाहर कर दिया है

2018 में जेडीयू (JDU) में प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) को शामिल करने का ऐलान करते हुए नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने उन्हें पार्टी का 'भविष्य' बताया था. उस वक्त नीतीश के बयान का मतलब ये निकाला गया कि शायद अब जेडीयू में नीतीश कुमार के बाद नंबर दो की पोजिशन पर प्रशांत किशोर ही होंगे...

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  • Last Updated: January 29, 2020, 5:16 PM IST
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2018 में पूरे रुतबे और रसूख के साथ प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की जेडीयू (JDU) में एंट्री हुई थी. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने प्रशांत किशोर को बिल्कुल अपने बगल में दाहिनी ओर बिठाकर पार्टी की सदस्यता दिलवाई थी. जेडीयू में उन्हें शामिल करने का ऐलान करते हुए नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को पार्टी का 'भविष्य' बताया था. उस वक्त नीतीश के बयान का मतलब ये निकाला गया कि शायद अब जेडीयू में नीतीश कुमार के बाद नंबर दो की पोजिशन पर प्रशांत किशोर ही होंगे.

उसी वक्त ये कयास लगने लगे कि जेडीयू को उसका उत्तराधिकारी मिल गया है. प्रशांत किशोर के जेडीयू में बड़ा ओहदा दिए जाने की संभावना भी जताई जाने लगी. हालांकि उत्तराधिकार के सवाल पर नीतीश ने कभी खुलकर बयान नहीं दिया था. लेकिन 2019 के आने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए ये कयास लगाया जाने लगा कि प्रशांत किशोर की जेडीयू में काफी अहम भूमिका रहने वाली है.

हालांकि जितने दमखम से प्रशांत किशोर का स्वागत हुआ था. अंदरखाने में इसे लेकर उतनी ही हलचल मची थी. उस वक्त बताया गया था कि पार्टी के कुछ बड़े जमीनी नेता प्रशांत किशोर की पार्टी में इतनी मजबूत हैसियत से खुश नहीं थे. प्रशांत किशोर और पार्टी के कुछ सीनियर नेताओं के मतभेद की खबरें लगातार सामने आती रही थीं. उस वक्त बिहार जेडीयू के कुछ वरिष्ठ नेताओं का प्रशांत किशोर को लेकर मानना था कि वो एक प्रोफेशनल रणनीतिकार रहे हैं, प्रोफेशनल तरीके से चुनावी कैंपेन को संभालते हैं, उनके पास प्रोफेशनल्स की टीम है, जो 2019 के चुनाव में पार्टी को फायदा पहुंचाएंगे, इसलिए उन्हें पार्टी में शामिल किया गया है.

जब वरिष्ठों को दरकिनार कर प्रशांत किशोर बनाए गए जेडीयू के उपाध्यक्ष

पार्टी में शामिल होने के एक महीने के भीतर ही प्रशांत किशोर को पार्टी का उपाध्यक्ष बना दिया गया. इससे एक बार फिर लगा कि नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर पर पूरा भरोसा जताया है. एक महीने के भीतर ही पार्टी उपाध्यक्ष का पद मिलने से एकबारगी पार्टी के भीतर हलचल मच गई. उस वक्त भी पार्टी के कुछ सीनियर नेताओं ने प्रशांत किशोर को इतना बड़ा पद मिलने पर दबे छिपे नाराजगी जाहिर की थी.

jdu expel prashant kishor how rift started between nitish kumar and pk
पूरे दम खम से प्रशांत किशोर ने जेडीयू जॉइन की थी


प्रोफेशनल्स की टीम के साथ सबकुछ टेबल पर फिक्स करने वाले प्रशांत किशोर को बिहार के जमीन से जुड़े नेता पसंद नहीं करते थे. उन्हें लगता था कि बिहार की चुनावी राजनीति मे जीत के लिए बिना जमीन पर उतरे कुछ हासिल नहीं किया जा सकता. प्रशांत किशोर के हाई-फाई अप्रोच को लेकर बिहार के देशी नेताओं के बीच नाराजगी बनी रही. खासकर ये बड़ी बात थी कि नीतीश कुमार ने ललन सिंह और आरसीपी सिंह जैसे बड़े और भरोसेमंद नेताओं को किनारे कर प्रशांत किशोर को चुना था.केसी त्यागी ने उस वक्त माहौल को शांत करने के लिए बयान दिया था कि प्रशांत किशोर की वजह से हमें अपने पारंपरिक वोटर्स के साथ समाज के दूसरे वर्गों से भी जुड़ने का मौका मिलेगा. वो समाजवाद के पारंपरिक राजनीति से अलग हटकर काम करेंगे, जिसका फायदा जेडीयू को मिलेगा.

 

 

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले निभाई अहम भूमिका
2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच सीट बंटवारे में प्रशांत किशोर की अहम भूमिका रही. उस वक्त कहा गया कि प्रशांत किशोर की वजह से बिना अड़चन के गठबंधन में सीटों का बंटवारा हो पाया. हालांकि इन सबके बावजूद भी पार्टी के भीतर प्रशांत किशोर को लेकर एक अस्वीकार्यता की स्थिति लगातार बनी रही. खासकर उनके काम करने की शैली को लेकर. पार्टी के कई सीनियर नेताओं ने कई बार इसको लेकर नाराजगी भी जाहिर की.

सवाल उठाए गए कि जो व्यक्ति चुनावी जीत के लिए विभिन्न पार्टियों को अपनी प्रोफेशनल सेवाएं दे रहा हो, वो किसी एक पार्टी की विचारधारा से जुड़कर कैसे रह सकता है? प्रशांत किशोर के आईपैक संस्था ने बीजेपी, कांग्रेस से लेकर टीआरएस जैसी दलों को अपनी प्रोफेशनल सेवाएं दी थीं.

जब प्रशांत किशोर को लेकर जेडीयू के भीतर बढ़ने लगे अंतर्विरोध
हालांकि प्रशांत किशोर के लिए उस वक्त मुश्किल स्थिति सामने आ गई, जब उनकी संस्था आईपैक ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की चुनावी रणनीति बनाने की कमान संभाली. जुलाई 2019 में ममता बनर्जी और प्रशांत किशोर के बीच मुलाकात हुई. अगस्त में ये पक्का हो गया कि आने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की टीम ममता बनर्जी की पार्टी को अपनी प्रोफेशनल सेवाएं देने जा रहे हैं.

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प्रशांत किशोर की काम करने की शैली को लेकर पार्टी के भीतर पहले भी आलोचना होती रही थी


इस मामले को लेकर भी जेडीयू के अंदर सुगबुगाहट हुई. हालांकि प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के साथ मुलाकात कर इस मसले पर सफाई दे दी. इसके बाद दिल्ली विधानसभा के चुनाव में प्रशांत किशोर ने आम आदमी पार्टी के लिए रणनीति बनाने के जिम्मेदारी संभाल ली.

इसी के बाद प्रशांत किशोर और पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ नीतीश कुमार से भी दूरी बढ़ने लगी. कहा जाता है कि पिछले दिनों नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर का विरोध करने वाले पार्टी के सीनियर नेताओं को टोकना भी बंद कर दिया था. इसी बीच सीएए और एनआरसी पर जेडीयू के स्टैंड से अलग जाकर ट्वीट करने के बाद लगने लगा था कि प्रशांत किशोर शायद अपने लिए अलग राह चुन रहे हैं.

इसके बाद बिहार के डिप्टी चीफ मिनिस्टर सुशील कुमार मोदी पर राजनीतिक बयानबाजी के जरिए प्रशांत किशोर ने हलचल मचा दी. प्रशांत किशोर ने एक पुराना वीडियो भी शेयर कर दिया, जिसमें वो नीतीश कुमार की आलोचना करते दिख रहे थे. इसके बाद नीतीश कुमार ने भी प्रशांत किशोर के सवाल पर दो टूक कह दिया- प्रशांत किशोर को अमित शाह के कहने पर पार्टी में शामिल किया था. लेकिन अब वो दूसरी पार्टियों के लिए रणनीति बना रहे हैं. उन्हें कहीं और जाने की महत्वाकांक्षा है. वो कहीं भी जा सकते हैं. इसके जवाब में प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार को झूठा तक कह दिया. इसके बाद तकरीबन तय हो गया था कि प्रशांत किशोर की जेडीयू से विदाई निश्चित है.

 

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First published: January 29, 2020, 5:07 PM IST
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