बीटेक के बाद चाहिए जॉब तो अब एक और परीक्षा करनी होगी पास!

सभी मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेज से पास हुए छात्र इस परीक्षा के लिए बाध्य होंगे.

Ankit Francis | News18Hindi
Updated: February 6, 2019, 2:08 PM IST
बीटेक के बाद चाहिए जॉब तो अब एक और परीक्षा करनी होगी पास!
(सांकेतिक तस्वीर)
Ankit Francis | News18Hindi
Updated: February 6, 2019, 2:08 PM IST
सरकार जल्द ही इंजीनियरिंग के बाद नौकरी ढूंढ रहे लोगों के लिए एक नई लाइसेंसी व्यवस्था को अपनाने की तैयारी में है. दरअसल मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए काम करने वाली मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) और वकीलों की बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की तर्ज पर जल्द ही इंडियन काउंसिल ऑफ इंजीनियर्स (ICE) बनाए जाने का प्रस्ताव है. ये काउंसिल एक परीक्षा आयोजित करेगी, जिसे पास करने पर ही जॉब मिल पाना संभव होगा.

क्या है नई परीक्षा ?
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) एक नए प्रस्ताव प्रोफेशनल इंजीनियरिंग बिल-2019 पर काम कर रही है. इस बिल के मुताबिक बीटेक या एमटेक करने वाले स्टूडेंट्स को पढ़ाई पूरी करने के बाद इंडियन काउंसिल ऑफ इंजीनियर्स की एक परीक्षा पास करनी होगी. काउंसिल की इस परीक्षा के बाद उन्हें एक लाइसेंस दिया जाएगा और उसी के बाद उन्हें कहीं जॉब मिल पाएगी.

कौन से कॉलेज होंगे दायरे में?

इस बिल के मुताबिक सभी मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेज से पास हुए छात्र इस परीक्षा के लिए बाध्य होंगे. आईआईटी, एनआईटी, एआईसीटीई और अन्य मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेजों के स्टूडेंट्स को ये परीक्षा पास करने के बाद ही नौकरी मिल पाएगी. इंजीनियरिंग से जुड़ी सभी सरकारी नौकरियों के लिए ये अनिवार्य होगी. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के मुख्यालय में 10 फरवरी को एक बैठक होने जा रही है, जिसमें इस बिल के मसौदे पर चर्चा की जाएगी. बिल तैयार होने के बाद संसद में इसे पारित कर इसे जल्द से जल्द कानून बना दिया जाएगा.



दो तरह की होगी परीक्षा
एआईसीटीई सूत्रों के मुताबिक बिल के मसौदे में दो तरह की परीक्षाओं का प्रावधान है. एक परीक्षा सभी बीटेक छात्रों के लिए अनिवार्य होगी, जबकि दूसरी परीक्षा स्पेशलाइजेशन करने वालों के लिए होगी, ये विषय आधारित होगी. दूसरी परीक्षा एमटेक और पीएचडी स्टूडेंट्स के लिए होगी जो इंजीनियरिंग के किसी ख़ास सब्जेक्ट में स्पेशलाइजेशन कर रहे हैं.
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विदेशों में भी होगा मान्य
इस परीक्षा से लाइसेंस हासिल करने वाले स्टूडेंट्स विदेशों में भी नौकरियों के लिए योग्य माने जाएंगे. असल में बीते कुछ सालों में लगातार ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जब भारतीय इंजीनियर्स को ये कहकर नौकरी से हटा दिया गया कि उनकी डिग्री उक्त देश के मानकों के अनुरूप नहीं है. इस लाइसेंसी व्यवस्था के बाद भारत और अन्य देशों के बीच इस बात पर सहमति बनेगी कि इंजीनियर्स की जॉब के लिए यूनिफॉर्म मानक बनाए जाएं.

इंजीनियरिंग कॉलेजों में बढ़ी हैं सीटें
देशभर के इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी व आर्किटेक्चर कॉलेजों में 2019 से सामान्य वर्ग के गरीबों को दस फीसदी आरक्षण का लाभ मिलने के चलते सरकार ने 25 फीसदी अतिरिक्त सीट बढ़ाने का आदेश भी जारी कर दिया है. एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में 2019 से 25% अधिक दाखिले होंगे. वित्त मंत्री पियूष गोयल ने भी अपने बजट भाषण में कहा था कि देश भर के सरकारी कॉलेजों में 2 लाख अतिरिक्त सीटें उपलब्ध कराई जाएंगी.

घट रहे हैं इंजीनियरिंग के छात्र
ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक के छात्रों की संख्या में पिछले पांच सालों में काफी तेजी से गिरावट हुई है. काउंसिल की अप्रूवल प्रॉसेस हैंडबुक में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक डिप्लोमा/पोस्ट डिप्लोमा सर्टिफिकेट (पॉलिटेक्निक) के लिए सत्र 2018-19 में कुल 1199401 छात्रों का एडमिशन हुआ, जबकि यह संख्या सत्र 2017-18 में 1261059 थी. यही हालात इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में भी है. सत्र 2017-18 में इस कोर्स में 1662488 छात्र थे, जो सत्र 2018-19 में घटकर 1586341 पर पहुंच गई.

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