तमिलनाडु में पिता-पुत्र की मौत की तुलना अमेरिका के जॉर्ज फ्लॉयड से क्यों हो रही है?

तमिलनाडु में पिता-पुत्र की मौत की तुलना अमेरिका के जॉर्ज फ्लॉयड से क्यों हो रही है?
तमिलनाडु में पुलिस हिरासत में पिता-पुत्र की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है

तमिलनाडु में पुलिस हिरासत में पिता-पुत्र की मौत के मामले (death of father-son duo in police custody in Tamil Nadu) ने तूल पकड़ लिया है. यहां तक कि इसकी तुलना अमेरिका में अश्वेत मूल के जॉर्ज फ्लॉयड की मौत (Killing of George Floyd) से की जा रही है.

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पुलिस हिरासत में मौत के मामले अब वैश्विक स्तर पर गरमाने लगे हैं. जैसे लगभग डेढ़ महीने पहले अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस की बर्बरता से मौत हो गई. इसके बाद न सिर्फ अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया में इसे लेकर विरोध हुआ. मृतक को इंसाफ दिलाने की मांग से लेकर पुलिस में सुधार तक की मांग हो गई. अब देश में भी मिलता-जुलता मामला आया है. इसमें कस्टडी में एक नहीं, बल्कि दो लोगों की मौत हुई. पिता-पुत्र की मौत कथित तौर पर भयावह पुलिस टॉर्चर से हुई. इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों के लिए इंसाफ की मांग जोर पकड़ने लगी. पुलिस के खिलाफ गुस्सा इसलिए भी है कि दोनों कोई अपराधी नहीं थे. जानिए, क्या है पूरा मामला और क्यों तूल पकड़ रहा है.

घटना 19 जून की रात तमिलनाडु के थुथूकुड़ी (Thoothukudi) में है. वहां नाडर व्यापारी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले पिता-पुत्र पी जयराज (58) और जे फेनिक्स (38) ने अपनी मोबाइल की दुकान तय समय से ज्यादा देर तक खुली रखी थी. बता दें कि तमिलनाडु में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए शाम 7 बजे के बाद दुकानें बंद करने का आदेश है. निर्धारित समय से ज्यादा देर तक दुकान खुली होने की सूचना मिलने पर पुलिस आई और दोनों को पकड़कर थाने ले गई. हिरासत में लिए जाने के दो रोज के भीतर ही दोनों ही काफी रक्तस्त्राव से मौत हो गई.

घरवालों का कहना है कि कस्टडी में दोनों के साथ भयंकर मारपीट हुई




मृतकों के घरवालों का कहना है कि कस्टडी में दोनों के साथ भयंकर मारपीट हुई और यहां तक कि यौन प्रताड़ना भी दी गई, जिसके कारण उनकी मौत हो गई. परिजन 20 जून को हिरासत में रखे गए पिता-पुत्र से मिलने पहुंचे तो पुलिस ने इसकी इजाजत तक नहीं दी. इंतजार कराने के बाद उनसे अस्पताल जाने के लिए गाड़ी का बंदोबस्त करने को कहा गया. जब गाड़ी आकर दोनों को अस्पताल ले जा रही थी तो भी वे पुलिसवालों से घिरे हुए थे. उनकी झलक से ये दिख सका कि दोनों के ही कपड़े खून से सने हुए थे.



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परिजनों का कहना है कि हिरासत में पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं. दोनों के प्राइवेट पार्ट्स पर भी हमला किया गया. द लॉजिकल इंडियन की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ सूत्रों का कहना है कि दोनों के रेक्टम में लोहे का रॉड डाला गया. गंभीर रूप से जख्मी होने के बाद दोनों को अस्पताल ले जाया, जहां काफी कोशिशों के बाद भी खून नहीं रुक सका और 22 तारीख की रात दोनों की मौत हो गई. मामला गरमाने के बाद चार पुलिस कर्मियों को सस्पेंड किया गया और एक का ट्रांसफर हो चुका है.

मामले में घोर लापरवाही या फिर कथित तौर पर पुलिस की गलतियों को छिपाने की कोशिश दिख रही है


मामले में घोर लापरवाही या फिर पुलिस की गलतियों को छिपाने की कोशिश दिख रही है. अपनी आंतरिक रिपोर्ट में पुलिस ने बताया है कि दोनों ने ही हिरासत में खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, जिससे वे घायल हो गए. हालांकि कस्टडी के दौरान किस तरह से उन्होंने खुद को इस बुरी तरह से घायल किया, इसकी कोई जानकारी नहीं है. मृतकों का पोस्टमॉर्टम होने के बाद रिपोर्ट कोर्ट में जा चुकी है.

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जैसे ही हिरासत में मौत की खबर बाहर आई, लोग एक्शन की मांग करने लगे. जल्दी ही मामला सोशल मीडिया पर भी आ गया. लोग इसपर हैरत जताने लगे कि बहुत से भारतीय भी अमेरिकी व्यक्ति की हत्या पर इतना गुस्सा थे और सोशल मीडिया पर लगातार लिखते रहे, अब भारत में मिलता-जुलता मामला आने पर वे शांत क्यों हैं? कई तरह के वीडियो शेयर किए जा रहे हैं. बहुत से लोग इसपर भड़के हुए हैं कि दक्षिण भारत देश से कटा हुआ माना जाता है और यहां की खबरें मुद्दा नहीं बन पातीं. चाहे वो ह्यूमन राइट्स के मुद्दे हों. इस बात पर भी गुस्सा है कि जॉर्ड फ्लॉयड की हत्या पर अमेरिका में तुरंत एक्शन हुआ, जबकि यहां दो-दो हत्याओं के बाद भी पुलिसवालों का केवल ट्रांसफर हो रहा है, या सस्पेंड किए जा रहे हैं.

देश में पुलिस बर्बरता के मामले जब-तब सामने आते रहे हैं


अब मामला हाई प्रोफाइल बन चुका है, जिसमें राजनेता और क्रिकेटर भी इनवॉल्व हो रहे हैं. जैसे विपक्षी दल डीएमके ने इस घटना पर एआईएडीएमके सरकार पर हमला बोल दिया. उनका आरोप है कि पुलिसिया बर्बरता को सरकार की हामी होगी तभी इतना बड़ा कदम लिया गया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस बारे में विपक्ष से जवाव मांगा. निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने पुलिस हिरासत में मौत की तुलना सीधे-सीधे जॉर्ज फ्लॉयड की मौत से की. उन्होंने ट्वीट किया- प्रिय बॉलीवुड सेलेब्स, क्या आपने सुना तमिलनाडु में क्या हुआ है? क्या आप दूसरे देशों में होने वाली घटनाओं पर ही इंस्टाग्राम पर एक्टिव होंगे? भारत में कई ऐसे जॉर्ज फ्लॉयड्स हैं. जो पुलिस हिंसा और यौन शोषण का शिकार हो जाते हैं.

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वैसे देश में पुलिस बर्बरता के मामले जब-तब सामने आते रहे हैं. यही वजह है कि कस्टोडियल टॉर्चर पर कई NGOs भी काम कर रहे हैं और ह्यूमन राइट्स का मुद्दा उठा रहे हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इसपर UNITED NGO CAMPAIGN AGAINST TORTURE की शीट बताती है कि साल 2019 में 1731 लोगों की पुलिस कस्टडी में संदेहास्पद तरीके से मौत हुई. इसका मतलब है कि एक दिन में औसतन पांच मौतें हिरासत में हुईं.

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रिपोर्ट में पुलिस द्वारा टॉर्चर के तरीके भी बताए गए हैं कि किन प्रचलित तरीके से आरोपी को मारा जाता है. पुलिस की क्रूरता के कथित मामलों के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने भी साल 2006 में एक अहम फैसला लिया. इसके तहत हर राज्य से कहा गया कि वो पुलिस के खिलाफ शिकायत के लिए एक बॉडी तैयार करे, जिसतक आम लोग पुलिस की शिकायत पहुंचा सकें. हालांकि अब भी ज्यादातर राज्यों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. यही वजह है कि अब लोग मुद्दे उठाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं.
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