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असुरक्षित नौकरियों से पड़ रहा है पर्सनालिटी पर निगेटिव असर

News18Hindi
Updated: February 28, 2020, 6:21 PM IST
असुरक्षित नौकरियों से पड़ रहा है पर्सनालिटी पर निगेटिव असर
क्या कहता है जॉब असुरक्षा पर नया रिसर्च

दुनियाभर में असुरक्षित नौकरियां बढ़ती जा रही हैं. इसका असर हम सबकी पर्सनालिटी पर पड़ रहा है. एक ताजातरीन रिसर्च कहता है कि जॉब असुरक्षा हमारी पर्सनालिटी को निगेटिव बना रही है

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  • Last Updated: February 28, 2020, 6:21 PM IST
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एक नई रिसर्च सामने आई है कि आपकी मेंटल हेल्थ का सीधा रिश्ता आपकी जॉब सुरक्षा से होता है. अगर जॉब में असुरक्षा है तो ये पूरी पर्सनालिटी को नकारात्मक तौर पर बदल देती है. यानि इसका बहुत खराब असर व्यक्तित्व पर पड़ता है.
ये नई रिसर्च आस्ट्रेलिया के आरएमआईटी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने की है. इसके बाद ये अप्लाइड साइकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुई है. रिसर्च कहती है कि अगर आप जबरदस्त जॉब असुरक्षा की स्थिति से गुजर रहे हों तो ये आपकी पर्सनालिटी ना केवल बदल जाएगी बल्कि ये नकारात्मक भी हो जाएगी.

रिसर्च में कहा गया कि जो लोग चार साल से कहीं ज्यादा समय तक जॉब असुरक्षा की हालात में रहते हैं, वो भावनात्मक तौर पर खासे अस्थिर, बहुत कम किसी भी बात पर सहमत होने वाले और कम विवेकशील हो जाते हैं.

इस रिसर्च के जुड़े डॉ. लेना वांग कहते हैं कि रिसर्च आमतौर पर उन बढ़ते लोगों पर की गई जो जॉब असुरक्षा के कारण नकारात्मक धारणा वाले होते जा रहे थे.



शरीर और आत्म सम्मान पर अच्छा असर नहीं 
उन्होंने कहा, परंपरागत तौर पर हम जॉब असुरक्षा की छोटे समय की दिक्कतों या समस्याओं के बारे में सोचते हैं लेकिन असलियत ये भी है कि इसका असर शरीर और स्वाभिमान पर भी अच्छा नहीं पड़ता.
अब हम ये जानना चाह रहे हैं कि वास्तव में एक व्यक्ति में लंबे समय के लिए इसका क्या असर होता है, हो सकता है कि इसके बारे में आप खुद नहीं जान पाएं.

रिसर्च आमतौर पर उन बढ़ते लोगों पर की गई जो जॉब असुरक्षा के कारण नकारात्मक धारणा वाले होते जा रहे हैं.


इस स्टडी में कई तरह के डेटा लिए गए, जिसमें आस्ट्रेलिया में घर की स्थिति, आय और लेबर डायनामिक्स शामिल है. 1046 कर्मचारियों के नौ वर्ष के दौरान जॉब असुरक्षा और पर्सनालिटी से जुड़े सवाल किए गए.

इस शोध में पांच पहलुओं के आधार पर लोगों की पर्सनालिटी में बदलाव का अध्ययन किया गया- भावनात्मक स्थिरता, सहमत होना, विवेकशीलता, बहिर्मुखता और खुलापन.

जॉब असुरक्षा का नकारात्मक असर 
अध्ययन कहता है कि लंबे समय तक रहने वाली जॉब असुरक्षा बहुत हद तक नकारात्मक असर डालती है, जिसमें खुद का टारगेट तय करना, दूसरों के साथ रहना और तनाव से निपटना शामिल है.

ड़ॉ. वांग ने कहा, परिणाम कुछ अपेक्षाओं से उलट भी रहे. ये माना जाता रहा है कि जॉब असुरक्षा उत्पादकता बढ़ाती है, वर्कर अपने जॉब को बचाने के लिए कड़ी मेहनत करता है लेकिन ऐसा नहीं है.

जो लोग लगातार जॉब असुरक्षा का सामना करते हैं, वो धीरे धीरे अपने प्रयास कम करने लगते है, दृढ़इच्छाशक्ति कम होने के साथ उनके सकारात्मक कामकाजी रिश्ते बिगड़ने लगते हैं


लंबी अवधि में उत्पादकता पर भी पड़ता है असर
असल में जो लोग लगातार जॉब असुरक्षा का सामना करते हैं, वो धीरे धीरे अपने प्रयास कम करने लगते है, दृढ़इच्छाशक्ति कम होने से उनके सकारात्मक कामकाजी रिश्ते भी प्रभावित होते हैं और लंबी अवधि में उत्पादकता पर असर नजर आने लगता है.

दुनियाभर में बढ़ रहा है असुरक्षित काम का चलन
आजकल आमतौर पर दुनियाभर में असुरक्षित काम मसलन भाड़े की लेबर, कांट्रैक्ट, कैजुअल काम का चलन बढ़ रहा है. इससे दुनिया में नौकरियों को लेकर बेरोजगारी की स्थिति के साथ ढेर सारी दूसरी दिक्कतें भी सामने आ रही हैं.

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First published: February 28, 2020, 4:49 PM IST
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