वैक्सीन पर WTO प्रस्ताव- क्या दलील दे रही हैं दवा कंपनी पेटेंट छूट के विरोध में

दवा कंपनियों (Pharmaceutical companies) ने इस प्रस्ताव का विरोध जताते हुए कहा है इससे नकली वैक्सीन को बढ़ावा मिलेगा.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

दवा कंपनियों (Pharmaceutical companies) ने इस प्रस्ताव का विरोध जताते हुए कहा है इससे नकली वैक्सीन को बढ़ावा मिलेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

बाइडन प्रशासन (Biden Administration) के कोविड वैक्सीन के लिए पेटेंट में छूट (Waiving Patent) के प्रस्ताव से दवा कंपनियां (Pharmaceutical companies) खुश नहीं हैं.

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अमेरिका में जो बाइडन प्रशासन (Biden Administraion) के कोरोना वैक्सीन के लिए पेटेंट में छूट देने का फैसला दवा कंपनियों (Pharmaceutical companies) को रास नहीं आ रहा है. भारत और दक्षिण अफ्रीका ने विकासशील देशों में कोविड-19 की खतरनाक स्थिति की कारण प्रस्ताव दिया है कि इन देशों में वैक्सीन के लिए बहुत ज्यादा जरूरत है. इसलिए अमेरिका विश्व व्यापार संगठन (WTO) में उनका समर्थन कर वैक्सीन तक पहुंच बनाने में उनकी मदद करे.

पेटेंट को समर्थन भी

अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन टाइन ने बाइडन प्रशासन की ओर से ऐलान करते हुए कहा कि यह वैश्विक आपदा के हालात में ‘असामान्य कदम उठाने की जरूरत’ है. वहीं डब्ल्यूटीओ के अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा संरक्षण नियमों में बदलाव के लिए सर्वसम्मति की जरूरत होगी, जिसमें काफी समय लग जाएगा. टाई ने यह भी कहा कि अमेरिका बैद्धिक संपदा संरक्षण का मजबूत समर्थक है.

दवा कंपनियों की दलील
इस मामले में दवा कंपनियां सहमत नहीं हैं बल्कि वे इसके नुकसान को भी रेखांकित कर रही हैं. न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक फार्मास्यूटिकल्स रिसर्च एंड मैन्यूफैक्चरर्स ऑफ अमेरिका के मुख्य कार्यकारी और अध्यक्ष स्टीफन जे यूबल कहते हैं इससे महामारी से लड़ने के प्रयासों को नुकसान होगा. इस फैसले से सार्वजनिक और निजी साझेदारों में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाएगी.

और ये बड़ी आशंका भी

यूबल का कहना है कि इससे पहले से ही बहुत दबाव में काम कर रही सप्लाई चेन कमजोर हो जाएंगी. इसके अलाव इससे नकली वैक्सीन के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा. यूबल ने यह भी कहा कि इसका एक खतरनाक असर यह भी होगा कि अमेरिकी खोजें उन देशों में पहुंच जाएंगी जो अमेरिका की बायोमेडिकल खोज को नुकसान पहुंचाना चाहती हैं.



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जो बाइनड (Joe Biden) के प्रशासन ने कहा है कि वह अब भी बैद्धिक संपदा संरक्षण के मजूबत पक्षधर है.. (ANI)

फिर कौन बनाएगा वैक्सीन

दवा उद्योग की दलील है कि पेटेंट संरक्षण में छूट से जोखिम लेने और नवाचारको बहुत नुकसान होगा एलैर्जन के पूर्व मुख्य कार्यकारी ब्रेन्ट सॉन्डर्स ने अपने ट्वीट में सवाल किया है कि ऐसे में वैक्सीन कौन बनाएगा. दूसरी ओर इस छूट की मांग कर रहे वैश्विक स्वास्थय कार्यकर्ताओं ने बाइडन प्रशासन के इस फैसला की सराहना की है.इनिशिएटिव फॉर मेडिसिन्स, एक्सेस एंड नॉलेज की कार्यकारी निदेशक प्रीति क्रिस्थेल का कहना है कि बाइजन ने दर्शाया है कि वे अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लीडर हैं.

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लेकिन ये समस्याएं भी तो हैं

दवा उद्योग का कहना है कि पेटेंट में छूट वैक्सीन उत्पादन में तेजी नहीं लाएगा. उसका कहना है कि इसमें और भी बहुत सी बाधाएं हैं जिसमें कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर वितरण प्रमुख हैं. फाइजर का कहना है कि कंपनी को वैक्सीन के लिए 19 देशों के 86 सप्लायर्स से 280 चीजों की जरूरत होती है. इसके साथ ही विशेष कर्मचारी और उपकरण अलग से लगते हैं.

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दवा कंपनियां (Pharmaceutical companies) पेटेंट में छूट के नुकसान गिनाने लगी हैं.

कितना मददगार होगा कदम?

बायोटेक्नोलॉजी इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष डॉ मिशेल मैकमरी का कहना है कि यह देशों को बिना जरूरी सामग्री के रेसिपी बुक को देने की तरह होगा. इससे वैक्सीन का इंतजार कर रहे लोगों को मदद नहीं मिलेगी. बाइडन प्रशासन के समर्थन वाले बयान से बायोएटेक मोडर्नना और नोवावैक्स जैसी कंपनियों के शेयर मार्केट में भाव गिर गए हैं.

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मोडर्ना ने पिछले साल अक्टूबर में ही घोषणा की थी वह महामारी से लड़ने  के लिए वैक्सीन बनाने वालों पर पेटेंट लागू करने पर जोर नहीं देगी. लेकिन बाइडन प्रशासन के फैसले के आलोचकों का यह भी कहना है कि यह कदम दवा कंपनियों को हतोत्साहित ही करेगा.

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