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वो वैज्ञानिक जिसने 97 साल की उम्र में पाया नोबेल प्राइज

जॉन बी. गुडइनफ को 97 साल की उम्र में नोबेल प्राइज मिला है

जॉन बी. गुडइनफ को 97 साल की उम्र में नोबेल प्राइज मिला है

जॉन गुडइनफ (John Goodenough) को केमिस्ट्री (Chemistry) के क्षेत्र में इस साल का नोबेल प्राइज (Noble Prize) मिला है. वो सबसे ज्यादा उम्र में नोबेल प्राइज पाने वाले वैज्ञानिक बन गए हैं...

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    इस साल केमिस्ट्री (Chemnistry) का नोबेल प्राइज (Nobel Prize) तीन वैज्ञानिकों को दिया गया है. इन तीन वैज्ञानिकों में जॉन गुडइनफ (John Goodenough) का नाम भी शामिल है. जॉन गुडइनफ नोबेल प्राइज पाने वाले सबसे उम्रदराज शख्सियत बन गए हैं. 97 साल की उम्र में उन्हें ये सम्मान मिला है.

    बुधवार को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले तीन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार देने का ऐलान हुआ. इसमें जॉन गुडइनफ के साथ ब्रिटिश अमेरिकी वैज्ञानिक एम स्टेनली विटिंगम और जापान के वैज्ञानिक अकिरा योशिना के नाम शामिल हैं. इन तीनों को लिथियम आयन बैटरी की खोज के लिए इस साल का नोबेल प्राइज दिया जा रहा है.

    सबसे ज्यादा उम्र में नोबेल प्राइज पाने वाले वैज्ञानिक
    97 साल के जॉन गुडइनफ सबसे ज्यादा उम्र में नोबेल प्राइज पाने वाले वैज्ञानिक बन गए हैं. इसके पहले नोबेल प्राइज पाने वाले सबसे उम्रदराज वैज्ञानिक ऑर्थर अस्किन थे. ऑर्थर अस्किन को 96 साल की उम्र में नोबेल प्राइज मिला था. ऑर्थर अस्किन को पिछले साल फिजिक्स के क्षेत्र में नोबेल प्राइज मिला था. उनके रिकॉर्ड को अब जॉन गुडइनफ ने तोड़ा है.

    97 साल की उम्र में भी काम करते हैं जॉन गुडइनफ
    जॉन गुडइनफ जर्मन-अमेरिकी वैज्ञानिक हैं. उनका जन्म जर्मनी में 25 जुलाई 1922 को हुआ. जॉन गुडइनफ 97 साल की उम्र में भी काम कर रहे हैं. वो यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और मैटेरियल्स साइंस के प्रोफेसर हैं. नोबेल प्राइज मिलने पर उन्होंने कहा, ‘टेक्सास यूनिवर्सिटी की यही अच्छी बात है. ये आपको रिटायर नहीं करते हैं. इसलिए मुझे काम करने के लिए अतिरिक्त 33 साल मिले. इस दौरान मैं अच्छा काम कर सका.’

    john goodenough oldest nobel prize winner at the age of 97 in chemistry
    जॉन बी. गुडइनफ


    जॉन गुडइनफ ने मॉर्डन लाइफ में सबसे कारगर रहने वाली लिथियम आयन बैटरी को बनाया है. आपके मोबाइल और लैपटॉप से लेकर कई चीजों में इसी बैटरी का इस्तेमाल होता है. इस बैटरी की वजह से फॉसिल ईंधन पर निर्भरता कम हुई है. जॉन गुडइनफ ने ऐसे मैटेरियल्स की खोज की जो हायर वोल्टेज पर भी काम कर सकते थे. उन मैटेरियल्स में ज्यादा एनर्जी को स्टोर किया जा सकता है. जानकारों के मुताबिक यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है.

    बैटरी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लेकर आए
    जॉन गुडइनफ ने 90 के दशक में ही हल्की लिथियम बैटरी की खोज कर ली थी. इसके पहले बैटरियों के फूल जाने और खराब होने की काफी समस्या रहती थी. जॉन गुडइनफ के खोज के बाद बैटरी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आए. ज्यादा पावरफुल और छोटे साइज की बैटरियां डेवलप हुई. जो ज्यादा वक्त तक चलती थीं.

    इस तरह की बैटरियों का इस्तेमाल मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक कार से लेकर पेसमेकर में भी होता है. इन बैटरियों का महत्व समझा जा सकता है.

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    जॉन बी. गुडइनफ


    जॉन गुडइनफ को मिले हैं कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान
    जॉन गुडइनफ का जन्म जर्मनी के जेन में हुआ था. उनके पिता येल यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर थे. जॉन गुडइनफ ने येल से ग्रेजुएशन की डिग्री ली. सेकेंड वर्ल्ड वार के दौरान उन्होंने सेना में मेटरोलॉजिस्ट (अंतरिक्षविज्ञानशास्त्री) के बतौर काम किया. इसके बाद उन्होंने शिकागो यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में पीएचडी की डिग्री ली. उन्होंने एमआईटी लिंकन लेबोरेट्ररी में रिसर्चर के बतौर काम किया.

    फिजिक्स के क्षेत्र में पीएचडी की डिग्री लेने के बाद उन्होंने केमिस्ट्री के क्षेत्र में काम किया. उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री लेबोरेट्ररी के हेड की जिम्मेदारी संभाली. 1986 से वो टेक्सास यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे हैं.

    सबसे बड़ी बात है कि इतनी उम्र के बाद भी जॉन गुडइनफ सक्रिय हैं. वो कॉलेज के छात्रों को पढ़ाते हैं. नियमित तौर पर क्लास लेते हैं. नोबेल प्राइज से पहले भी उन्हें कई तरह के अवॉर्ड मिल चुके हैं. उन्हें नेशनल मेडल ऑफ साइंस, कोप्ले मेडल, फर्मी अवॉर्ड, द ड्रैपर प्राइज और जापान प्राइज जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुका है.

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