मुस्लिम 1000 साल पहले लेकर आए थे ऐसा समोसा, हमने किए थे ये बदलाव

भारत में समोसा ईरान से आया लेकिन यहां आकर उसमें ऐसे बदलाव हुए कि वो हो गया गजब का लज्जतदार, ये कहानी है कि समोसा के बदलाव और उसके मुरीदों की

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: April 2, 2019, 6:12 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: April 2, 2019, 6:12 PM IST
समोसा जरूर खाइए, लेकिन इसे खाते हुए अरबी सौदागरों का शुक्रिया भी अदा कीजिए. क्योंकि अपने देश के हिट स्नैक्स समोसे को 10वीं सदी में अरबी सौदागर ही यहां लेकर आए थे. जिसे हमने तुरंत लपक लिया और सैकड़ों सालों से इसका स्वाद हमारा दिलअजीज है. ये हमारी जिंदगियों में किस तरह से शुमार हो चुका है, ये कहने की जरूरत नहीं. अलबत्ता ये जरूर कह सकते हैं कि दुनिया को आलू का समोसा हमने ही दिया.

दुनिया में जितनी लंबी यात्रा समोसे ने की, उतनी शायद ही किसी और व्यंजन ने की हो. जिस तरह इसने खुद को तरह-तरह के स्वाद से जोड़ा, वो भी शायद किसी और डिश के साथ हुआ हो. इसे कई नामों से जाना जाता है. कई सदी पहले की किताबों और दस्तावेजों में इसका जिक्र संबोस्का, संबूसा, संबोसाज के तौर पर हुआ. अब भी इसके कई तरह के नाम हैं, मसलन-सिंघाड़ा, संबसा, चमुका, संबूसाज और न जाने क्या क्या.



एशिया में "समोसा साम्राज्य" ईरान से फैलना शुरू हुआ. वहां इसका जिक्र दसवीं शताब्दी में लिखी किताबों में हुआ है. ईरानी इतिहासकार अबोलफाजी बेहाकी ने "तारीख ए बेहाकी" में इसका जिक्र किया. हालांकि इसके कुछ और साल पहले पर्सियन कवि इशाक अल मावसिलीकी ने इस पर कविता लिख डाली थी. माना जाता है कि समोसे का जन्म मिस्र में हुआ. वहां से ये लीबिया पहुंचा. फिर मध्य पूर्व. ईरान में ये 16वीं सदी तक बहुत लोकप्रिय था, लेकिन फिर सिमटता चला गया.



अरबी व्यापारी लेकर आए थे  
इसे भारत लाने वाले वो अरबी व्यापारी थे, जो मध्यपूर्व से व्यापार के लिए मध्य एशिया और भारत आते थे. ये उन्हीं के साथ यहां आया. संभवतः दसवीं शताब्दी में. मुगलों का भी योगदान था इसे और लजीज और शाही बनाने में. इसके साथ कुछ नए प्रयोग करने में. लेकिन ये तय था कि ईरान और अरब से जो व्यापारी आते थे, समोसा उनका पसंदीदा व्यंजन था. आसानी से बन जाता था. जायकेदार होता था. लेकिन हम जिस समोसे की बात कर रहे हैं, वो मांसाहारी यानि नॉनवेज था. इसे मटन के कीमे और बादाम आदि के साथ मिलाकर बनाया जाता था. तेल में तला जाता था. हालांकि उन दिनों इसे बेक करने का तरीका भी प्रचलित था.

मुगलों ने दी नई शानमुगलों को समोसे से कुछ खास प्यार था. हर व्यंजन की तरह उनकी शाही रसोई ने समोसे को विकसित किया. अलग-अलग स्वाद और सामग्री वाले. दिल्ली सल्तनत के शायर अमीर खुसरो के अनुसार, "13वीं सदी में ये मुगल दरबार की पसंदीदा डिश थी." 16वीं सदी में अबुल फजल ने आइन-ए-अकबरी में लिखा, "इसे मुख्य खाने से पहले परोसा जाता था. इसमें कीमे के साथ बादाम, अखरोट, पिस्ता, मसाले मिले होते थे. आकार तिकोना होता था. गेहूं के आटे या मैदा के तिकोने में इसे भरकर बंद करते थे. घी में तलते थे."
जब इब्ने बबूता भारत पहुंचा तो उसने मोहम्मद बिन तुगलक के दरबार में लोगों को चाव से समोसा खाते देखा. फिर लिखा कि किस कदर हिंदुस्तान में समोसा का स्वाद सिर चढ़कर बोलता है.



कैसे बना आलू समोसा
समोसे में असली क्रांति तब हुई जब पुर्तगाली 16वीं सदी के आसपास आलू लेकर यहां आए. उसकी खेती होने लगी. तब समोसे में आलू, हरी धनिया, मिर्च और मसालों को मिलाकर भरा गया, फिर तो ये सुपरहिट हो गया. हम सबका प्रिय समोसा आलू वाला ही है. दुनियाभर में इसी समोसे का डंका ज्यादा बज रहा है. अलबत्ता हम भारतीय ये जरूर कह सकते हैं कि समोसे को शाकाहारी बनाने वाले हम ही हैं. "द ऑक्सफोर्ड कंपेनियन टू फूड" के लेखक एलन डेविडसन लिखते हैं, "दुनियाभर में मिस्र से लेकर जंजीबार तक और मध्य एशिया से चीन तक जितनी तरह के समोसे मिलते हैं, उसमें सबसे बेहतरीन आलू वाला भारतीय समोसा ही है." करीब एक हजार सालों से इसका आकार यही तिकोना है.

समय के साथ स्मार्ट होता समोसा
अब तो खैर भारत में समोसे इतने अलग-अलग तरीके के मिलते हैं कि आप हैरान रह जाएंगे. बल्कि ये भी कहा जा सकता है कि वक्त के साथ जितने स्मार्ट तरीके से कदम समोसे ने बढ़ाए हैं, वो दूसरे व्यंजनों के वश की बात ही नहीं. नूडल्स समोसा, मैकरोनी समोसा, राइस समोसा और ना जाने किस-किस तरह के समोसे. हर तरह का समोसा बाजार में उपलब्ध है. हर शहर में दो-चार रेस्तरां ऐसे जरूर मिल जाएंगे, जिनकी सूची में समोसे के 40-50 रूप शामिल होंगे.



हर राज्य का अपना अलग समोसा
वैसे भारत में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह के समोसे प्रचलित हैं. हैदराबाद में कॉर्न और प्याज के छोटे समोसे मिलेंगे तो बंगाल का सिंघाड़ा मछली भरकर भी बनाया जाता है. कर्नाटक, आंध्र और तमिलनाडु के समोसे कुछ दबे हुए होते हैं. कई जगहों पर केवल ड्राईफूट्स के समोसे मिलेंगे. दिल्ली और पंजाब के लोगों को आलू और पनीर का चटपटा समोसा पसंद आता है.

समोसा वीक
समोसे को कई तरह की चटनी के साथ परोसा जाता है. कई जगह इसे छोले और मटर के साथ मिलाकर नाश्ते के रूप में परोसा जाता है. ये तो तय है कि केवल भारत ही नहीं तकरीबन पूरी दुनिया में समोसा मिल जाएगा. कहीं इसे तलकर बनाया जाता है तो कहीं बेक करके, लेकिन असली समोसा तो वही है जो तलकर करारा-करारा बनाया जाए और जब धनिया की चटनी के साथ प्लेट में सामने आए तो खा बिना रहा ना जाए. समोसे पर इंग्लैंड इस कदर फिदा है कि वहां समोसा वीक मनाया जा रहा है. इसमें तरह-तरह के समोसों की परेड होगी, जो मुंह के रास्ते पेट तक पहुंचेगी
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