जानिए डिस्को बॉल की तरह क्यों चमक रहा है गुरू ग्रह का चांद यूरोपा

यूरोपा (Europa) पर ऐसे विकरण (Radiation) पड़ने से शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि उसकी संरचना के बारे में जानकारी मिलेगी.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: @Nasa)
यूरोपा (Europa) पर ऐसे विकरण (Radiation) पड़ने से शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि उसकी संरचना के बारे में जानकारी मिलेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: @Nasa)

गुरू ग्रह (Jupiter) के चंद्रमा यूरोपा (Europa) पर तीव्र विकिरण (Radaition) गिर रहे हैं. गुरू ग्रह से इलेक्ट्रॉन और अन्य कण यूरोपा की सतह पर उच्च ऊर्जा के विकरण के रूप में आ रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 4:55 PM IST
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खगोलीय पिंडों में पृथ्वी (Earth) के पास होने के कारण हमारा चंद्रमा (Moon) बहुत चमकीला दिखाई देता है. लेकिन अगर दूरी को नजरअंदाज कर दिया जाए तो चंद्रमाओं में गुरू ग्रह (Jupiter) का चंद्रमा यूरोपा (Europa) हमारे चंद्रमा को मात देता दिख रहा है. बर्फीले महासागर से ढंके यूरोपा पर इस समय विकिरणों का हमला हुआ है. इलेक्ट्रॉन और अन्य कणों के विकिरण गुरू ग्रह से आए हैं जो यूरोपा पर गिरकर उसे इतनी ज्यादा ऊर्जा वाली चमक दे रहे हैं.

हमारे चंद्रमा की तरह नहीं
पृथ्वी के जीवन के लिहाज से देखा जाए तो इस तरह का विकरण बहुत हानिकारक होता है, लेकिन यूरोपा के लिए यह बहुत सुंदर प्रभाव दे रहा है जिसकी वजह से वह अंधेरे में बहुत चमकीला दिख रहा है, लेकिन पृथ्वी के चंद्रमा की तरह नहीं दिखाई दे रहा है जो सूर्य का प्रकाश प्रतिबिंबित करता है.

कैसा है यह प्रकाश
यह प्रकाश रिडियम स्टीकर्स की तरह होता है जो अंधेरे में चमकता है. ऐसे स्टीकर्स बच्चों के लिए बहुत उपयोग करते हैं. ऐसा ही कुछ यूरोपा के साथ हो रहा है. यह अवलोकन अमेरिका के दक्षिणई कैलनिफोर्निया स्थित नासा की जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी ने किया है. लैब ने बताया कि इस तरह के विकिरण से हमारा चंद्रमा कैसा दिखाई देगा. साथ ही यह भी बताया कि यूरोपा की बर्फीली सतह की रासायनिक संरचना कैसी है.



अलग अलग बर्फीली संचरना
उत्सर्जित रेडियशन हर नमकीन यौगिक में अलग होता है. बिना टेलीस्कोप के देखे जाने पर यह चमक हरे रंग की दिखाई देती है कभी कभी वह नीली भी दिखाई देती है, लेकिन विकिरण हुए पदार्थ के मुताबिक इसकी चमक बदल जाती है. स्पैक्ट्रोमीटर का उपयोग करने पर अलग अलग वेवलेंथ की बर्फीली संचरना के बारे में जानकारी दे रही हैं.

Space, Jupiter,Europa
ये विकिरण (Radiation) यूरोपा (Europa) पर गुरू ग्रह (Jupiter) से आए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


जीवन की मौजूदगी के सुराग
नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित इसअध्ययन के प्रमुख लेखक मूर्ति गुड़ीपति ने बताया, “रात के समय बर्फ की चमक यूरोपा की सतह की संरचना के बारे में अतिरिक्त जानकारी दे सकती है, हम यह अनुमान लगाने में सफल रहे. इस संरचना की विविधत जानकारी हमें इस बारे में सुराग दे सकती है कि क्या यूरोपा में जीवन पनपने के हालात हो सकते हैं.

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फिलहाल यह माना जाता है कि महासागर के बारे में
यूरोपा की बर्फीली सतह के नीचे विशाल महासागर हैं. सतह की संरचना का विश्लेषण हमें यह बताने में मदद कर सकता है कि नीचे क्या है. इससे पहले सतह के बारे में माना जाता था कि वहां बर्फ को सोडियम क्लोराइड ( सादा नमक) और मैग्नीशियम सल्फेट (एप्सोम सॉल्ट) जैसे नमक हैं.

कैसे आता है प्रकाश
जैसे ही सतह को भेदकर नीचे जाता है वह अंदर के अणुओं को उर्जा देता है और फिर ये अणु इस ऊर्जा को प्रकाश के रूप में छोड़ते हैं. लेकिन शोध ने इससे भी ज्यादा कुछ उजागर किया है. हर तरह की बर्फ का स्पैक्ट्रम अलग तरह का था. शोधकर्ताओं ने इसके अध्ययन के लिए एक सिम्यूलेटर बनाया जिसे उन्होंने आइस चेम्बर फोर यरोपाज हाई एनर्जी इलेक्ट्रॉन एंड रेडिएशन एनवायर्नमेंट टेस्टिंग (ICE-HEART) नाम दिया.

Europa, Moon Jupiter
यूरोपा(Europa) के बारे में कहा जाता है कि उसकी बर्फीली सतह के नीचे तरल पानी के महासागर है जहां जीवन होने की बहुत संभावना है. (तस्वीर @Nasa)


क्या पता लगा सिम्यूलेशन से
जब शोधकर्ताओं ने आइस हार्ट पर उच्च ऊर्जा वाली इलेक्ट्रॉन बीम बीम मैरीलैंड के गैथर्सबर्ग फैसिलिटी में डाली वे जानना चाहते थे कि कैसे बर्फ की सतह के नीचे का जैविक पदार्थ विकिरण से प्रतिक्रिया करता है. उन्होंने पाया कि बर्फीले बैंड अलग तरह से प्रतिबिंबित होते हैं.

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नासा का यूरोपा क्लिपर मिशन कुछ सालो में प्रक्षेपित होगा. यह उसकी सतह का अवलोकन करेगा. जिससे शोधकर्ता यह जान सकेंगे कि उनकी यूरोपा की अंधेरे में चमकने वाली अवधारणा किस हद तक सही है और उनके नमक की संरचना के नतीजे कितने सटीक
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