कौन हैं जस्टिस राकेश कुमार, जिनके आदेश से पटना हाईकोर्ट के जजों में मचा हड़कंप

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Updated: August 30, 2019, 4:26 PM IST
कौन हैं जस्टिस राकेश कुमार, जिनके आदेश से पटना हाईकोर्ट के जजों में मचा हड़कंप
जस्टिस राकेश कुमार

जस्टिस राकेश कुमार (Justice Rakesh Kumar) के एक आदेश के बाद पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) में हड़कंप मच गया था. गुरुवार को कोर्ट में चीफ जस्टिस एपी शाही के नेतृत्व में 11 जजों की एक बेंच गठित कर उस आदेश की समीक्षा की गई. हाईकोर्ट में करप्शन के मामले पर जजों के टकराव का ये अनोखा मामला है...

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पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) के इतिहास में गुरुवार को अब तक की सबसे बड़ी बेंच बैठी थी. 11 जजों की उस बेंच को अपने ही कोर्ट के एक जज के फैसले की समीक्षा करनी थी. पटना हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश कुमार (Justice Rakesh Kumar) के एक आदेश के बाद पटना हाईकोर्ट में हड़कंप मच गया था. गुरुवार को कोर्ट में चीफ जस्टिस एपी शाही के नेतृत्व में 11 जजों की एक बेंच का गठन हुआ.

11 जजों की बेंच ने कहा कि पहले वो राकेश कुमार के आदेश को पढ़ेगी. इसके साथ ही बेंच उठ गई. आधे घंटे बाद बेंच फिर बैठी और अपना आदेश लिखवाना शुरू किया. चीफ जस्टिस एपी शाही ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका के लिए आज का दिन सबसे अंधेरा दिन है. बेहद दुखी मन से एक साथ 11 जजों को जस्टिस राकेश कुमार के फैसले की समीक्षा करनी पड़ रही है.

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल खड़ा किया गया है. चीफ जस्टिस का कहना था कि जिस मामले का निपटारा एक साल पहले हो चुका था. उसे अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कोर्ट में सुनवाई के लिए लिस्ट करवा लिया गया. चीफ जस्टिस एपी शाही ने कहा कि सभी को अपनी सीमा में रहना होगा, इससे बाहर जाने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती.

इसके बाद जस्टिस राकेश कुमार से सारे काम वापस ले लिए गए. न्यायमूर्ति राकेश कुमार सस्पेंड चल रहे हैं. इस पूरे मामले में वकील भी दो गुट में बंट गए हैं. एक गुट ने राकेश कुमार के समर्थन में पटना हाईकोर्ट में नारेबाजी की. वहीं दूसरे बड़े गुट को न्यायपालिका की गरिमा की चिंता हो रही है.

अपने ही जज के खिलाफ क्यों बैठानी पड़ी 11 जजों की बेंच?

पटना हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश कुमार ने एक पूर्व आईएएस अफसर केपी रमैया के भ्रष्टाचार के एक मामले में फैसला सुनाया था. केपी रमैया को करप्शन के एक मामले में निचली अदालत से जमानत हासिल हुई थी. जबकि पटना हाईकोर्ट में जस्टिस राकेश कुमार ने ही उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत दी थी.

justice rakesh kumar profile why patna high court chief justice taken action against him
पटना हाईकोर्ट

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केपी रमैया के निचली अदालत से जमानत मिलने से राकेश कुमार दुखी थी. उन्होंने 20 पन्नों के अपने आदेश में कहा था कि एक पूर्व आईएएस अफसर को निचली अदालत ने जमानत कैसे दे दी? जबकि पटना हाईकोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट तक ने उसकी जमानत खारिज कर दी थी. इसके बाद उन्होंने 2 घंटे तक बोलकर अपना फैसला लिखाया.

राकेश कुमार ने कहा कि पटना हाईकोर्ट में चीजें सही तरह से नहीं चल रही है. यहां भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपियों को भी मामूली सजा देकर छोड़ दिया जाता है. उन्होंने पटना हाईकोर्ट की ज्यूडिशियल सिस्टम पर गंभीर आपत्ति जताई. यहां तक कह दिया कि पटना हाईकोर्ट के जज आगे बढ़ने के लिए चीफ जस्टिस को मस्का लगाते रहते हैं.

उन्होंने कहा कि भ्रष्ट न्यायिक अधिकारियों को संरक्षण देना हाईकोर्ट की परिपाटी बनती जा रही है. जस्टिस राकेश कुमार ने जजों के सरकारी बंगलों में रखरखाव के नाम पर होने वाले खर्चों पर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने पटना हाईकोर्ट में हुए एक स्टिंग ऑपरेशन की जांच भी सीबीआई को सौंप दी. इस स्टिंग ऑपरेशन में हाईकोर्ट के कुछ कर्मचारियों के घूस मांगते पकड़े गए थे. जस्टिस राकेश कुमार के इन्हीं आदेशों के बाद पटना हाईकोर्ट में हड़कंप मच गया.

क्या है केपी रमैया का मामला?

जस्टिस राकेश कुमार ने पूर्व आईएएस अधिकारी केपी रमैया के भ्रष्टाचार के मामले में ही पटना हाईकोर्ट के सिस्टम पर गंभीर टिप्पणी की थी. दरअसल केपी रमैया बिहार महादलित विकास मिशन के सीईओ के पद पर थे. उन्होंने वीआरएस लेने से कुछ दिन पहले 25 लाख और सवा दो करोड़ रुपए के दो चेक जारी किए थे. निगरानी विभाग ने इसको लेकर जांच बिठा दी.

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पटना हाईकोर्ट में जजों के टकराव का ये अनोखा मामला है


इस मामले में केपी रमैया को निचली अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई थी. रमैया ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन वहां से भी निराश होना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें राहत नहीं दी. लेकिन इसके बाद आश्चर्यजनक तरीके से निचली अदालत से उन्हें बेल मिल गई. इसी को लेकर जस्टिस राकेश कुमार ने आपत्ति जाहिर करते हुए सख्त टिप्पणी की थी.

कौन हैं जस्टिस राकेश कुमार

जस्टिस राकेश कुमार पटना हाईकोर्ट के तेज तर्रार वकील रहे हैं. 1983 से उन्होंने प्रैक्टिस की शुरुआत की. पटना हाईकोर्ट में उन्होंने करीब 26 वर्षों तक वकालत की है. उन्होंने क्रिमिनल और संविधान के पेंचीदे मसलों की पैरवी की है. जस्टिस राकेश कुमार 12 साल तक सीबीआई के वकील रहे हैं.

बिहार के चर्चित चारा घोटाले में सीबीआई की तरफ से राकेश कुमार ने ही पैरवी की थी. कोर्ट में उनके जोरदार बहस की वजह से चारा घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दी गई. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच को बरकरार रखा.

राकेश कुमार ने सीबीआई के वकील रहते हुए कई हाई प्रोफाइल मामलों में सीबीआई का पक्ष रखा. लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री रहने के दौरान एक विधायक की हत्या के मामले में भी राकेश कुमार सीबीआई के वकील थे. सीबीआई के बाद उन्हें निगरानी विभाग का वकील बनाया गया.

25 दिसंबर 2009 को उन्हें पटना हाईकोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया. उसके बाद वो 24 अक्टूबर 2011 को पटना हाईकोर्ट के स्थायी जज बन गए.

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First published: August 30, 2019, 4:26 PM IST
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