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के परासरन: ऐसा वकील जो अंगुलियों पर गिनकर बता सकता है रामजन्मभूमि विवाद का इतिहास

News18Hindi
Updated: February 5, 2020, 8:18 PM IST
के परासरन: ऐसा वकील जो अंगुलियों पर गिनकर बता सकता है रामजन्मभूमि विवाद का इतिहास
के. परासरन को राम मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है

के. परासरन (k. Parasaran) रामजन्मभूमि केस से इतने जुड़े हुए थे कि उन्हें अयोध्या मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीखें मुंहजबानी याद हैं. किस तारीख में कौन सी घटना हुई थी, ये सब वह अंगुली पर गिनकर बता सकते हैं. परासरन ने अयोध्या पर इतनी रिसर्च की है और इतना कुछ पढ़ा है कि उस पर एक किताब भी लिख सकते हैं.

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  • Last Updated: February 5, 2020, 8:18 PM IST
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अयोध्या (Ayodhya) में भव्य राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण के लिए पीएम मोदी ने श्री राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की घोषणा कर दी है. इसके कुछ घंटों के बाद ही श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट का गठन हो गया. ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य होंगे. जिनमें 9 स्थायी और 6 नामित सदस्य होंगे. दिलचस्प रूप से हिंदू पक्ष के वकील के. परासरन को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है. नवंबर में रामजन्मभूमि केस का फैसला आने के बाद के.परासरन पूरे देश के मीडिया में सुर्खियों में छा गए थे.

लड़ी अदालती लड़ाई
93 वर्षीय वरिष्ठ वकील के. परासरन (K Parasaran) ने हिंदू पक्ष की तरफ से दलीलें रखी थीं. पूर्व अटॉर्नी जनरल रह चुके पारासरन लंबे वक्त से पूरी लगन के साथ बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि (Babri Masjid-Ram Janmabhoomi dispute) पर हिंदू पक्ष की ओर से दलीलें कोर्ट में रख रहे थे.

जब फैसला आया था तब परासरन ने कहा था कि वह हमेशा से ही भगवान राम के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं. इसलिए उन्होंने ये केस लड़ा. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई से पहले उन्होंने इस केस के हर पहलू पर बारीकी से काम किया. परासरन रोजाना सुबह 10:30 बजे कानूनी दांवपेचों को समझने में जुट जाते थे. उनका काम देर शाम तक लगातार चलता रहता था.

अयोध्या मामले में हिंदुओं का पक्ष रखने वाले वकील के पारसरण (बीच में) अपनी टीम के साथ


ये है परासरन की टीम
परासरन की टीम भी इस बढ़ती उम्र में उनकी लगन, मेहनत और जुझारूपन को देखकर प्रेरित होती थी. वकील पीवी योगेश्वरन, अनिरुद्ध शर्मा, श्रीधर पोट्टाराजू, अदिति दानी, अश्विन कुमार डीएस और भक्ति वर्धन सिंह परासरन की टीम के सदस्य थे.अदालत में राजीव धवन से था आमना-सामना
परासरन इस केस से इतने जुड़े हुए थे कि उन्हें अयोध्या मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीखें मुंहजबानी याद हैं. किस तारीख में कौन सी घटना हुई थी, ये सब वह अंगुली पर गिनकर बता सकते हैं. परासरन ने अयोध्या पर इतनी रिसर्च की है और इतना कुछ पढ़ा है कि उस पर एक किताब भी लिख सकते हैं.

अयोध्या पर सुनवाई के दौरान के. परासरन का सामना मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन से था. धवन को अपने अकाट्य तर्कों के लिए जाना जाता है. लेकिन, पारासरन ने 40 साल तक जिरह करते हुए कभी अपना आपा नहीं खोया. यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब राजीव धवन ने हिंदू पक्ष की दलीलों की कथित कॉपी फाड़ दी थी, तब भी पारासरन शांत और सौम्य बने रहे.

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सुनवाई के बाद दिया था 'संदेश'
16 अक्टूबर को जब सर्वोच्च अदालत में अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी हुई, तब भी के. पारासरन ने 15 मिनट का इंतजार किया और राजीव धवन से मुलाकात की. इस दौरान दोनों वकीलों के बीच केस को लेकर बात हुई और फिर उन्होंने साथ में तस्वीरें भी खिंचवाईं. इसके जरिए परासरन का संदेश साधारण मगर बिल्कुल साफ था. उन्होंने ये बताने की कोशिश की थी कि वकील कोर्टरूम में भले ही एक-दूसरे के खिलाफ लड़ सकते हैं, लेकिन देश को जानना चाहिए कि वो असल में एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं.
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First published: February 5, 2020, 8:16 PM IST
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