कारगिल दिवस: शहीद बेटे की आखिरी झलक के लिए मां को करना पड़ा 43 दिन का इंतजार

कारगिल युद्ध के दौरान कैप्टन हनीफ तुरतुक इलाके में तैनाथ थे. वो पाकिस्तानी सेना के साथ लगातार लड़ते रहे और आखिर में गोला-बारूद खत्म हो जाने की वजह से शहीद हो गए. परिवार को उनके पार्थिव शरीर के लिए 43 दिन तक इंतजार करना पड़ा

News18Hindi
Updated: July 25, 2019, 12:06 PM IST
कारगिल दिवस: शहीद बेटे की आखिरी झलक के लिए मां को करना पड़ा 43 दिन का इंतजार
कैप्टन हनीफ उद्दीन की शहादत के 43 दिन बाद मिली परिवार को उनकी बॉडी
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Updated: July 25, 2019, 12:06 PM IST
कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम के किस्से लंबे समय तक याद रखे जाएंगे. इस कठिन और चुनौतीपूर्ण युद्ध में भारतीय सेना के जांबाजों ने जिस साहस का प्रदर्शन किया, उसकी कई कहानियां सुनने को मिली. इन्हीं में से एक है भारतीय सेना के राजपूताना रेजिमेंट के कैप्टन हनीफ उद्दीन की कहानी. कैप्टन हनीफ के शौर्य और बलिदान और उनके परिवार के संघर्षों की दास्तां सुनकर किसी भी भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा. अपने परिवार के उम्मीदों के चिराग हनीफ दुश्मन से लड़ते हुए शहीद होकर देश को रोशन कर गए.

20 साल पहले कारगिल जंग के शुरुआती दिनों में कैप्टन हनीफ उद्दीन कारगिल के तुरतुक इलाके में तैनात थे. 18 हजार की ऊंचाई वाले इस इलाके से दुश्मन की हरकत पर पैनी निगाह रखी जा सकती थी. पाकिस्तानी सेना के साथ यहां जबरदस्त जंग जारी थी. कैप्टन हनीफ उद्दीन पूरी जांबाजी के साथ दुश्मन का मुकाबला कर रहे थे. वो 6 जून 1999 का दिन था. दो दिन से लगातार भीषण लड़ाई चल रही थी.

कैप्टन हनीफ के पास गोला-बारूद खत्म हो गया था

राजपूताना राइफल्स के 25 साल के कैप्टन हनीफ पूरी मजबूती से डटे थे. लेकिन 6 जून तक उनके पास जितने भी गोला-बारूद थे, वो खत्म हो गए. गोलियां की बौछार और बमों के हमले का जवाब देने के लिए उनके पास कुछ नहीं था. 6 जून 1999 को वीरता से लड़ते हुए कैप्टन हनीफ देशसेवा में शहीद हो गए.

हनीफ की शहादत पर पूरे परिवार को गर्व है. लेकिन सबसे दुखद स्थिति ये हुई कि शहीद होने के बाद भी उनका पार्थिव शरीर परिवार वालों को नहीं मिला. शहादत के 43वें दिन कैप्टन हनीफ का पार्थिव शरीर परिवार के पास पहुंचा. कैप्टन हनीफ जिस इलाके में तैनात थे, वहां लगातार लड़ाई चल रही थी. वहां से उनका पार्थिव शरीर ले जाना मुमकिन नहीं था. इसलिए जब लड़ाई खत्म हो गई, तब जाकर उनकी बॉडी परिवारवालों तक पहुंचाई जा सकी.



एक शहीद के परिवार को पता था कि उसका वीर बेटा देश के नाम पर कुर्बान हो गया लेकिन इसका सबसे दुखद पहलू ये था कि परिवार को अपने हनीफ की आखिरी झलक देखने के लिए 43 दिनों का इंतजार करना पड़ा.
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परिवार को अपने शहीद बेटे की आखिरी झलक के लिए करना पड़ा 43 दिन का इंतजार

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कैप्टन हनीफ की मां बताती हैं कि मैं उस वक्त बेंगलुरु में अपनी बहन के घर थी, जब मुझे अपने बेटे की शहादत की खबर मिली. मेरे बड़े बेटे ने दिल्ली से मुझे फोन पर ये जानकारी दी. मेरे घर पर परिवारवालों, पड़ोसियों और मीडिया का जमावाड़ा लगा था. लेकिन मेरे शहीद हुए बेटे की बॉडी नहीं थी.

कैप्टन हनीफ उद्दीन की मां हेमा अजीज दिल्ली में द्वारिका के सेक्टर 18 इलाके में रहती हैं. उन दिनों को याद करते हुए हेमा अजीज ने बताया कि शहादत के बाद भी मेरे बेटे का पार्थिव शरीर लगातार चल रही लड़ाई की वजह से हमें नहीं मिला. हमें उसकी आखिर झलक देखने के लिए 43 दिनों का इंतजार करना पड़ा. वो सबसे मुश्किल वक्त था. हर कुछ दिनों में हमारे पास कॉल आती कि फायरिंग रुक गई है, मौसम साफ हो गया है. लेकिन फिर भी हमें हमारे बेटे का पार्थिव शरीर नहीं मिला. जब लड़ाई खत्म हुई उसके बाद हमें हनीफ का पार्थिव शरीर हमारे पास पहुंचा.

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कारगिल की चोटियां अभी भी हमारे जवानों की शहादत की कहानियां सुनाती हैं


हनीफ की मां भी सेना के एंटरटेनमेंट विंग में रह चुकी हैं

कैप्टन हनीफ की मां भी सेना के इंटरटेनमेंट विंग में रह चुकी हैं. उन्होंने 18 वर्षों तक आर्म्ड फोर्सेज इंटरटेनमेंट विंग और दिल्ली के कत्थक केंद्र में सिंगर के बतौर काम किया है. इनका परिवार केरल से आता है. जब कैप्टन हनीफ महज 8 साल के थे, उनके सिर से पिता का साया उठ गया. उनके पिता यूपी से आते थे और उनका थियेटर से जुड़ाव था.

हेमा अजीज बताती हैं कि उनके परिवार का झुकाव कला और संस्कृति क्षेत्र से था. लेकिन हनीफ ने आर्मी में जाने को तरजीह दी. दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए करने के दौरान उनका सेलेक्शन इंडियन मिलिट्री एकेडमी के लिए हुआ. हेमा अजीज को अपने बेटे की शहादत पर गर्व है. वो कहती हैं जब मैं काम करती थी तो मेरी पहली प्राथमिकता मेरा काम थी. हनीफ के साथ भी ऐसा ही था. उसके जाने से परिवार को भारी दुख उठाना पड़ा. लेकिन हमें उनकी शहादत पर गर्व है.

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First published: July 25, 2019, 12:06 PM IST
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