4 जुलाई को ही भारतीय सेना ने रख दी थी करगिल जीत की बुनियाद, ऐसे आया टर्निंग पॉइंट

करगिल जीत की आधिकारिक घोषणा 26 जुलाई को हुई लेकिन इसके पहले ही करगिल के हालात भारत के पक्ष में हो गए थे. 4 जुलाई करगिल युद्ध में निर्णायक दिन साबित हुआ...

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Updated: July 26, 2019, 12:14 PM IST
4 जुलाई को ही भारतीय सेना ने रख दी थी करगिल जीत की बुनियाद, ऐसे आया टर्निंग पॉइंट
करगिल जीत की बुनियाद 4 जुलाई को ही रख दी गई थी
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Updated: July 26, 2019, 12:14 PM IST
26 जुलाई को करगिल दिवस के तौर पर मनाया जाता है. 1999 में इसी दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे से करगिल को वापस हासिल किया था. मई 1999 से शुरू हुई भारत-पाकिस्तान की करगिल में आमने-सामने की लड़ाई 26 जुलाई को खत्म हुई. भारत ने पाकिस्तान की चालबाजियों को मात देते हुए फतह हासिल की. हालांकि 26 जुलाई को करगिल पर विजय का दिन माना जाता है. लेकिन भारत के पक्ष में हालात काफी पहले ही बदल चुके थे.

वो 4 जुलाई 1999 का दिन था, जो भारत-पाकिस्तान के करगिल युद्ध में निर्णायक दिन साबित हुआ. उसी दिन से हालात भारत के पक्ष में बदल गए थे. पाकिस्तान की नॉर्दन लाइट इंफैंट्री ने भारतीय सेना के बंकरों पर कब्जा कर लिया था. वो बंकरों में छुपे बैठे थे. खासकर टाइगर हिल को पाकिस्तानी कब्जे से छुड़ाना मुश्किल लग रहा था. लेकिन भारतीय सेना ने गजब का पराक्रम दिखाया. पाकिस्तान की सेना भारतीय सेना के हाथों 3 हार पाकर भी सबक नहीं सीख पाई थी.

ऐसे आया करगिल युद्ध में टर्निंग पॉइंट

टाइगर हिल पर कब्जा करना भारतीय सेना के लिए चुनौतीपूर्ण था. ये करगिल द्रास सेक्टर की सबसे ऊंची चोटी है. यहां से श्रीनगर-लेह नेशनल हाइवे-1 ए नजर रखी जा सकती है. यही हाइवे सियाचीन को श्रीनगर और लेह से जोड़ता है. पाकिस्तानी सेना का मकसद सियाचीन की सप्लाई लाइन खत्म करना था. ताकि सियाचीन भारत के कब्जे से फिसल जाए.

kargil untold story turning point of war when indian army did against all odds and defeated pakistan military

टाइगर हिल पर कब्जे के लिए भारतीय सेना के 18 ग्रेनेडियर, 2 नागा और 8 सिख सैनिकों ने जंग छेड़ी. इसमें सबसे बड़ा योगदान ग्रेनेडियर योगेन्द्र यादव का रहा. योगेन्द्र यादव दुश्मन की गोलियों से जख्मी हो चुके थे, उनका कमांडर शहीद हो चुका था, उनके दूसरे साथी भी नहीं रहे लेकिन टाइगर हिल पर कब्जे की जंग में वो आगे बढ़ते रहे.

योगेन्द्र यादव के साथ घातक प्लाटून की एक छोटी टुकड़ी भी थी. ये लोग टाइगर हिल पर पहुंचने के लिए करीब-करीब पहाड़ की सीधी चढ़ाई चढ़ रहे थे. जबकि भारतीय सेना टाइगर हिल पर बैठी पाकिस्तान के सैनिकों पर लगातार बमबारी जारी रखे हुई थी.
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4 जुलाई को भारतीय सेना ने दिखाया था गजब का पराक्रम

4 जुलाई को ये टुकड़ी टाइगर हिल पर पहुंचने में कामयाब रही. पाकिस्तानी सेना अपने सामने भारतीय सेना के जांबाजों को देखकर हैरान रह गई. 4 जुलाई की अहले सुबह भारतीय सेना ने टाइगर हिल पर कब्जा कर लिया. पाकिस्तानी सेना की तरफ से मिल रही लगातार चुनौती के बीच ये भारतीय सेना की पहली जीत थी. यहीं के बाद से कहानी बदल गई. करगिल के हालात भारत के पक्ष में हो गए.

इसी बीच तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की उस वक्त के अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिटंन से मुलाकात हुई और पाकिस्तान भारतीय जमीन को खाली करने पर राजी हुआ. तब तक भारतीय सेना ने द्रास और बटालिक सेक्ट को कब्जे से मुक्त करवा लिया था. 26 जुलाई को करगिल विजय की आधिकारिक घोषणा हुई लेकिन 4 जुलाई से ही इसकी बुनियाद रखी जा चुकी थी.

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पाकिस्तान ने 1984 में ही बना लिया था करगिल में धोखेबाजी का प्लान

पाकिस्तान के मशहूर पत्रकार नजम सेठी ने भी करगिल युद्ध पर कुछ अहम जानकारी दी है. उनके मुताबिक पाकिस्तान ने करगिल घुसपैठ को भले ही 1999 में अंजाम दिया हो लेकिन इसकी प्लानिंग 1984 में ही हो गई थी. नजम सेठी ने एक पाकिस्तानी चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया था कि 1984 में पाकिस्तान में जनरल जिया उल हक का शासन था.

भारत ने सियाचीन की पहाड़ियों पर इसी वक्त कब्जा जमा लिया था. लेकिन जिया उल हक ने इसकी जानकारी अपने देश के नागरिकों को नहीं दी. उन्हें लग रहा था कि जानकारी बाहर आई तो उनके खिलाफ देश में गुस्सा पनपेगा. जिया उल हक ने पाकिस्तानी सेना के साथ उसी वक्त सियाचीन कब्जाने की प्लानिंग पर काम करना शुरू कर दिया था.

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First published: July 26, 2019, 11:13 AM IST
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