क्या बचेगी कुमारस्वामी सरकार? स्पीकर के पास हैं ये 4 ऑप्शन

कर्नाटक में सियासी हलचल तेजी से बदल रही है. ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि अब क्या राजनीतिक स्थितियां बनने वाली हैं

News18Hindi
Updated: July 9, 2019, 3:17 PM IST
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Updated: July 9, 2019, 3:17 PM IST
कांग्रेस के भीतर घमासान मचा है. एक तरफ राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद नए अध्यक्ष का मसला अभी तक नहीं सुलझा है. वहीं कर्नाटक में दो निर्दलीय विधायकों के मंत्रीपद से इस्तीफे और उसके बाद कांग्रेस-जेडीएस के सभी 20 मंत्रियों के मंत्री पद से इस्तीफे के बाद कर्नाटक की सरकार पर संकट पैदा हो गया है. कर्नाटक के कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के सामने अपनी सरकार बचाए रखने की चुनौती है. वहीं बीजेपी अपने पास 107 विधायकों को होने का दावा कर रही है, लेकिन फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में है. बीजेपी अपने 105 विधायकों के साथ 2 और विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है. दो निर्दलीय विधायकों ने राज्यपाल से मिलकर बीजेपी का समर्थन करने की बात कही है.

कैसे शुरू हुई राजनीतिक हलचल?
दो निर्दलीय विधायकों एच नागेश और आर शंकर के मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कर्नाटक की सरकार के सामने मुश्किल आ गई. इन दोनों को 14 जुलाई को ही मंत्रीमंडल में शामिल किया गया था. शनिवार को कांग्रेस के 10 और जेडीएस के 3 विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया. इसके बाद विधानसभा में कांग्रेस जेडीएस गठबंधन का संख्याबल 104 ही रह गया है. फिलहाल कांग्रेस के पास 69 और जेडीएस के पास 34 विधायक हैं. एक विधायक बीएसपी का है. वहीं बीजेपी के पास 107 ( बीजेपी 105+ निर्दलीय 2 ) विधायक का समर्थन है. कर्नाटक विधानसभा का संख्याबल कुल 224 सदस्यों का है.

अब राजनीतिक हालात कैसे बनने वाले हैं?

अब सबकी नजर कांग्रेस विधानमंडल की बैठक पर रहेगी. इसमें सभी विधायक अपने विचार रखेंगे. इसमें डिप्टी सीएम जी परमेश्वरा के साथ पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, मंत्री डीके शिवकुमार जैसे कांग्रेस के रणनीतिकार भी शामिल होंगे. बागी विधायक स्पीकर के आर रमेश के सामने अपने इस्तीफे की वजह बताएंगे. देखना होगा कि स्पीकर इनके इस्तीफे पर क्या फैसला लेते हैं.

कांग्रेस-जेडीएस अपने मंत्रिमंडल का फिर से गठन करेगी. कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि मंत्रीमंडल के फिर से गठन के बाद राजनीतिक हालात सामान्य हो जाएंगे. वो बीजेपी पर विधायकों के खरीद-फरोख्त और उन्हें मंत्रीपद देने का लालच देने के आरोप लगा रहे हैं.

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राज्यपाल को मंत्रीपद से इस्तीफा सौंपते निर्दलीय विधायक आर रमेश

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कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल की तरफ से कहा गया है कि ‘कुछ विधायकों की शिकायत थी. कुछ विधायक मंत्रीमंडल का विस्तार चाह रहे थे. पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस के मंत्रियों ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है. जिन लोगों ने इस्तीफा दिया है वो वापस लौटकर पार्टी को मजबूत करेंगे. हम पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि वो वापस लौटेंगे और हमें पूरा विश्वास है कि सरकार पहले की तरह चलती रहेगी. पिछले एक साल के दौरान बीजेपी की सरकार को गिराने की छठी कोशिश नाकाम होगी.’

विधानसभा में कांग्रेस के नेता सिद्धारमैया ने कहा है कि ‘मैं चाहता हूं कि कांग्रेस के जिन विधायकों ने मंत्री नहीं बनाए जाने की वजह से इस्तीफा दिया है वो मिल बैठकर मामले का समाधान निकालें. उनकी शिकायतें सुनी जाएंगी. उन्हें जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए. इस बार के फेरबदल के बाद हम चाहेंगे कि एक और फेरबदल हो ताकि सभी की शिकायतें सुनी जा सकें.’

वहीं मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का कहना है कि इस राजनीति हलचल से उन्हें जरा भी भय नहीं है. वो अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में लगे हैं. उन्होंने कहा है कि वो किसी भी तरह की राजनीतिक उलटफेर के बारे में नहीं बोलेंगे. मुझे बीजेपी या उनके लोग जो कर रहे हैं उनके बारे में कुछ भी नहीं कहना है.

संविधान के जानकारों के मुताबिक, सियासी संकट की स्थिति में अब विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार के सामने 4 ऑप्शन हैं:-

>>पहला ऑप्शन:- स्पीकर हर एक विधायक को व्यक्तिगत तौर पर मिलने बुला सकते हैं और उनकी बात सुनने के बाद इस्तीफा मंजूर कर सकते हैं. इस स्थिति में कुमारस्वामी सरकार बहुमत खो देगी. जिसके बाद राज्यपाल के हाथ में फैसला होगा.

>>दूसरा ऑप्शन:- स्पीकर सभी विधायकों को नोटिस जारी कर इस्तीफे पर फैसले को लटकाए रख सकते हैं.

>>तीसरा ऑप्शन:- स्पीकर चाहे तो सभी विधायकों के इस्तीफे नामंजूर कर सकते हैं. जिसके बाद 14 बागी विधायकों स्पीकर के फैसले को कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं.

>>चौथा ऑप्शन:- ये रास्ता कुमारस्वामी के लिए भी है. कुमारस्वामी चाहे तो खुद ही सभी बागी विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य करार दे सकते हैं. जिसके बाद ये विधायक कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.

क्या बची रह पाएगी कुमारस्वामी की सरकार?
बताया जा रहा है कि कांग्रेस के दो बागी विधायक लौट सकते हैं. विधायक सौम्या रेड्डी दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से मुलाकात करने के बाद बेंगलुरु लौट आई हैं. वो विधानमंडल की बैठक में हिस्सा ले सकती हैं. सौम्या रेड्डी और उनके पिता रामलिंगा रेड्डी बागी विधायकों के गुट में थे. कुमारस्वामी ने कांग्रेस नेताओं से रेड्डी से बातचीत की अपील की थी. उनके मुताबिक इससे कम से कम 5 विधायक वापस लौट सकते हैं.
जेडीएस भी अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने में लगी हुई है. कांग्रेस की तरह ही वो बैठक करने वाले हैं. ताकि 12 जुलाई को जब विधानसभा का सेशन शुरू हो तो गठबंधन का संख्याबल बना रहे.

उधर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि कुमारस्वामी सरकार ने अपना बहुमत खो दिया है और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए.

रणनीतिकार डीके शिवकुमार पर कांग्रेस को भरोसा
कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार एक बार फिर से संकटमोचक की भूमिका में हैं. वो कांग्रेस के बागी विधायकों को समझाने में लगे हैं. कांग्रेस-जेडीएस के सरकार गठन में भी उनका अहम रोल रहा था. इस बार भी कांग्रेस के अहम रणनीतिकार रहे डीके शिवकुमार की कोशिशों पर नजर रहेगी.

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First published: July 9, 2019, 10:03 AM IST
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