आतंकियों के निशाने पर क्यों थे शुजात बुखारी?

बुखारी को घाटी के बारे में अच्छी जानकारी थी. वो लोकतंत्र समर्थक थे. उन्होंने दुनिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संगठनों के लिए कॉलम लिखे थे.

News18Hindi
Updated: November 28, 2018, 11:44 AM IST
आतंकियों के निशाने पर क्यों थे शुजात बुखारी?
शुजात बुखारी (फाइल फोटो)
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Updated: November 28, 2018, 11:44 AM IST
इस साल जून में जम्मू-कश्मीर के सीनियर जर्नलिस्ट और राइजिंग कश्‍मीर के एडीटर शुजात बुखारी की हत्या हो गई थी. उनकी हत्या में शामिल लश्‍कर के आतंकी नावेद जट्ट बडगाम के एक एनकाउंटर में मारा गया है. 14 जून को श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव इलाके में उनकी हत्या कर दी गई थी. हत्यारों ने उनकी कार को निशाना बनाया था.

बुखारी लगभग एक दशक से श्रीनगर से अपना अखबार चला रहे थे. उनके पिता भी पत्रकार थे. महबूबा सरकार में उनके भाई सैयद बशरत बुखारी कश्‍मीर के कानून मंत्री हैं. वह मानवाधिकारों के हनन पर खुलकर लिखते थे.

बुखारी कश्‍मीर की समस्‍या के समाधान के लिए बातचीत के हमेशा समर्थक रहे. वह कश्‍मीर में 'द हिंदू' अखबार के ब्‍यूरो चीफ भी रहे थे. उन पर तीन बार हमले हुए.

उन्हें बंधक भी बनाया गया था 

'फ्री प्रेस कश्‍मीर' की रिपोर्ट के अनुसार, आठ जुलाई 1996 को सरकार समर्थक आतंकी ग्रुप इख्‍वान ने अनंतनाग जिले से 19 पत्रकारों का अपहरण किया था और उन्‍हें सात घंटे तक बंधक बनाए रखा था. इन पत्रकारों में बुखारी भी शामिल थे.

शुजात बुखारी (फाइल फोटो)


अंतरराष्‍ट्रीय एनजीओ रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने एक बार ifex.org को बताया था कि 2006 में बुखारी को दो लोगों ने अगवा कर लिया था. शहर से दूर ले जाकर उन्‍होंने गोली मारने की कोशिश की लेकिन बंदूक जाम होने से वह बच गए थे.
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लोकतंत्र समर्थक
बुखारी को घाटी के बारे में अच्छी जानकारी थी. वो लोकतंत्र समर्थक थे. उन्होंने दुनिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संगठनों के लिए कॉलम लिखे थे. उन्होंने कश्मीर टाइम्स से करियर की शुरुआत की थी. वो 15 सालों तक 'द हिंदू' के ब्यूरोचीफ भी रहे. अपने लेखों के दम पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली थी.

वे मानवधिकार के बड़े समर्थक थे. वो घाटी में कश्मीरी पंडितों और मुस्लिमों के बीच खाई पाटने की हमेशा कोशिश किया करते थे.  वो लगातार पाकिस्तानी सेना, आईएसआई और आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन की आंखों में खटकते थे. हिज्बुल के मुखिया सैय्यद सलाहुद्दीन से उनके जबरदस्त मतभेद थे.

कश्मीर में शांति बहाली के लिए सक्रिय थे 
कश्मीर में शांति बहाल करने को लेकर शुजात बुखारी सक्रिय लंबे समय से सक्रिय रहे थे. उन्‍होंने कश्‍मीर घाटी में शांति के लिए कई कॉन्‍फ्रेंस आयोजित कराने में अहम भूमिका निभाई थी. वह पाकिस्‍तान के साथ बातचीत के लिए ट्रेक 2 प्रकिया के भी हिस्‍सा थे.

जब शुजात की हत्या हुई तब केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने घटना पर दुख जताया था. वहीं राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घटना की निंदा करते हुए कहा था, शुजात बुखारी की मौत से वह सदमे और गहरे दुख में हैं. नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्‍दुल्‍ला ने भी बुखारी की मौत पर संवेदना जताई थी.
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