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इस चीनी 'फॉर्मूले' से सुधरेंगे कश्मीर में हालात! क्या मोदी सरकार अपनाएगी ये नीति?

कश्मीर में आतंकवाद पर काबू पाने में क्या हम चीन से कुछ सीख सकते हैं.

कश्मीर में आतंकवाद पर काबू पाने में क्या हम चीन से कुछ सीख सकते हैं.

Kashmiri Pandits Killing In Kashmir: कश्मीर में हिंदू और सिख समुदाय के लोगों को निशाना बनाए जाने के बाद घाटी की समस्या एक बार फिर सुर्खियों में है. ऐसे में क्या हम चीन की उइगर मुस्लिमों के प्रति नीति से कुछ सीख सकते हैं?

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Kashmiri Pandits Killing In Kashmir: कश्मीर में हिंदू और सिख समुदाय के लोगों को निशाना बनाए जाने (why kashmiri pandits left kashmir) के बाद एक बार फिर वहां दहशत का माहौल है. लोगों को करीब तीन दशक पहले की वो स्थिति याद आने लगी है जब कश्मीर में आतंकवादियों ने अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया था और इस कारण करीब 80 हजार हिंदू परिवारों को घाटी छोड़कर जाना पड़ा था. तब से कश्मीर में हिंसा और आतंकवाद भारत सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. अभी तक इस समस्या (Solution of kashmir problem) का कोई कारगर समाधान नहीं दिख रहा है.

ऐसे में एक चीनी फॉर्मूले की चर्चा लाजिमी है. दरअसल, चीन भी अपने एक प्रांत में कश्मीर जैसी ही समस्या का सामना कर रहा था. इसके लिए उसने बेहद कड़े कदम उठाए. हालांकि उसके इस फॉर्मूले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब आलोचना भी हुई. लेकिन इस फॉर्मूले से भारत पूरी तरह तो नहीं लेकिन काफी हद तक कुछ सीख सकता है. आइए जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर चीन का वो फॉर्मूला क्या था और कश्मीर के मामले में वो कितना कारगर है?

चीन में कश्मीर जैसी समस्या
दरअसल, चीन का प्रांत शिनजियांग उइगर मुस्लिम बहुल इलाका है. लेकिन भारत के जम्मू-कश्मीर प्रांत की तरह वहां भी अलगाववाद की समस्या थी. वहां भी हिंसा की कई घटनाएं घटीं. इसके बाद चीन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया और स्थिति पर पूरी तरह से नियंत्रण स्थापित कर लिया. हालांकि, इस काम में उस पर मानवाधिकार के उल्लंघन के कई आरोप लगे, लेकिन चीन की ताकत के सामने पूरी दुनिया ने एक तरह से चुप्पी साध ली.

शिविर में रखे गए 15 लाख लोग
शिनजियांग में हिंसा और चीन विरोधी भावनाओं के उग्र होने के बाद कम्युनिस्ट सरकार ने वर्ष 2014 से बेहद कड़ी रणनीति अपनाई. इसके तहत चीन ने कई स्तरों पर काम किया. सबसे पहले उसने इलाके में उच्च तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया. इसके बाद वहां के अल्पसंख्यक उइगर मुस्लिमों की पुनर्शिक्षा और राजनीतिक सोच ठीक करने के लिए उन्हें बंदी शिविरों में रखा गया. बंदी शिविरों में रखे गए ऐसे लोगों की संख्या करीब 15 लाख बताई जाती है. उइगर मुस्लिमों में अलगाववाद की प्रवृत्ति खत्म करने के लिए चीन के मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग की खूब प्रशंसा हुई. हालांकि पश्चिमी देशों ने जिनपिंग के इस कदम को नरसंहार करार दिया.

कश्मीर की तरह शिनजियांग का भौगोलिक महत्व
जिस तरह से भारत के लिए जम्मू-कश्मीर का भौगोलिक महत्व है ठीक उसी तरह चीन के लिए शिनजियांग है. इस क्षेत्र से चीन का मध्य एशिया, पश्चिम एशिया और यूरोप के बाजारों तक सीधा संपर्क स्थापित होता है. यह क्षेत्र चीन के चर्चित बेल्ट एंड रोड इनेशिएटिव का दिल कहा जाता है. इतना ही नहीं विवादित चीन-पाकिस्तान कॉरिडोर की शुरुआत भी इसी क्षेत्र से होती है.

जनसांख्यिकी में बदलाव
कश्मीर की तरह चीन का यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल इलाका रहा है. जम्मू-कश्मीर की कुल आबादी में करीब 68 फीसदी मुस्लिम और 28 फीसदी हिंदू हैं. यह दो संभागों जम्मू और कश्मीर में बंटा हुआ है. कश्मीर पूरी तरह मुस्लिम बहुल इलाका है तो जम्मू में हिंदू आबादी बहुमत में हैं.

चीन ने रणनीति के तहत शिनजियांग की जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश की. रिपोर्ट के मुताबिक 1945 में शिनजियांग में चीन के मूल निवासी जिन्हें हान कहा जाता है उनकी हिस्सेदारी केवल छह फीसदी थी. लेकिन, 2010 में वहीं कुल आबादी में हान की भागीदारी 40 फीसदी तक पहुंच गई थी. दरअसल, चीन ने इस इलाके की समस्या को काफी पहले समझ लिया था और उसने इलाके पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए वहां की जनसांख्यिकी को बदलने की जरूरत को काफी पहले समझ लिया था.

चीन की आलोचना
वैसे चीन की इस रणनीति की आलोचना भी होती है. इसका मुख्य कारण है कि इस इलाके में हान लोगों का वर्चस्व काफी मजबूत है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इलाके की उच्च सरकारी नौकरियों में 65 फीसदी हान लोग हैं वहीं वहां के मूल उइगर मुस्लिमों की 81 फीसदी आबादी कृषि से जुड़े कामों में लगी है.

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जाता है कि जनसांख्यिकी में बदलाव और मूल आबादी के आर्थिक शोषण की वजह से वहां अलगाववाद की प्रवृत्ति पैदा हुई. लेकिन इस अलगाव की प्रवृत्ति को कुचलने के लिए चीन के मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सबसे आक्रामक रुख अपनाया. उनसे पहले के राष्ट्रपति शिनजियांग के विकास पर जोर देते रहे जिससे कि वहां असमानता को खत्म कर मूल आबादी को चीन की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके.

लेकिन शी जिनपिंग ने वर्ष 2014 में शिनजियांग के प्रति चीन की नीति में व्यापक बदलाव किया. उन्होंने मूल आबादी की जनसंख्या वृद्धि रोकने से लेकर उनकी सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने तक के लिए कदम उठाए गए. उइगर मुस्लिमों पर दो से अधिक बच्चे पैदा करने पर भारी जुर्माना लगाया गया. गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय पर गर्भपात कराने के लिए महिलाओं के विवश किया गया. इन उपायों की वजह से उइगर मुस्लिमों की जनसंख्या वृद्धि दर में 84 फीसदी की कमी आई. इन अभियानों पर चीन की सरकार ने कथित तौर अरबों डॉलर की रकम खर्च की है.

1200 कैंप बनवाए
शिनजियांग में चीन के इन कदमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दमकारी करार दिया गया. चीन ने इस इलाके में 1200 से ज्याद कैंप बनवाए जिन्हें रि-एजुकेशन कैंप्स नाम दिया गया. इन शिविरों में 15 लाख से अधिक उइगर मुस्लिमों को रखा गया. एक लीक हुई रिपोर्ट के मुताबिक यहां पर उन मुस्लिम पुरुषों को रखा गया जो लंबी दाढ़ी रखते थे. यहां बुर्का पहनने वाली महिलाओं को भी रखा गया. उन्हें चीन के प्रति वफादारी के पाठ पढ़ाए गए. उन्हें मंदारिन सिखाई गई. उन्हें इस्लामिक संस्कृति की निंदा करने के लिए मजबूर किया गया.

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