कस्तूरबा जन्मदिन : मोहनदास से शादी के किस्से समेत 10 कम सुने फैक्ट्स जानिए

मोहनदास करमचंद गांधी और कस्तूर बाई.

मोहनदास करमचंद गांधी और कस्तूर बाई.

महात्मा बनने से पहले गांधी (Mahatma Gandhi) काफी हद तक एक सामान्य मनुष्य की कमज़ोरियों की मिसाल भी माने जाते हैं. उनकी शादी और शुरूआती समय के किस्से बताते हैं कि कैसे कस्तूरबा गांधी ने उनके सामने उदाहरण पेश किए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 11, 2021, 7:39 AM IST
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11 अप्रैल 1869 को जन्मीं कस्तूर बाई कपाड़िया को महात्मा गांधी की पत्नी के अलावा एक राजनीतिक ​एक्टिविस्ट के तौर पर याद किया जाता है,​ जिन्होंने भारत की आज़ादी की लड़ाई (Freedom Struggle of India) में खासी भूमिका निभाई. इतिहास के हवालों से कहा जाता है कि कस्तूरबा की इस लड़ाई के पीछे प्रेरणा उनके पति ही रहे. साल 1883 में जब कस्तूरबा 14 साल की थीं, तब उनकी शादी मोहनदास करमचंद गांधी के साथ हुई थी और यह भी एक फैक्ट है कि 2 अक्टूबर 1869 को जन्मे गांधी वास्तव में कस्तूरबा से उम्र में करीब छह महीने छोटे थे.

कस्तूरबा के बारे में कुछ कम सुने गए फैक्ट्स आपको बताएंगे लेकिन उससे पहले उनकी शादी का किस्सा बताते हैं. मोहनदास की उम्र 14 साल नहीं थी, जब उनकी शादी हुई थी. हालांकि गुजरात के पोरबंदर में हुई यह शादी दोनों के परिवारों ने ही आपसी सहमति से तय की थी, लेकिन कस्तूरबा और मोहन दोनों ही इस शादी के लिए उम्र के लिहाज़ से परिपक्व नहीं थे.

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शादी और मनमुटाव
मोहनदास को जब अपनी शादी के बारे में पता चला तो उन्हें खुशी सिर्फ इसी बात की थी कि उन्हें नए कपड़े मिलेंगे और खेलने के लिए एक नया दोस्त मिल जाएगा. मोहनदास और कस्तूरबा की शादी को लेकर रोचक किस्से बॉम्बे सर्वोदय मंडल और गांधी रिसर्च फाउंडेशन द्वारा बनाई गई विव​रणिका वेबसाइट www.mkgandhi.org पर दिए गए हैं. उम्र के साथ मोहनदास को एहसास होता गया कि शादी क्या होती है और बाद में तो उन्होंने बाल विवाह प्रथा का विरोध भी किया.

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मोहनदास की प्रेरणा से ही कस्तूरबा दक्षिण अफ्रीका में राजनीति में आईं.


इस लेख के मुताबिक शुरूआती समय में मोहन और कस्तूरबा के बीच सब कुछ आदर्श या अच्छा नहीं था. भोली और विनम्र कस्तूरबा के प्रति मोहन अच्छा व्यवहार नहीं करते थे. महात्मा गांधी के जीवन के कई पहलुओं को बताने वाली इस वेबसाइट के लेख के मुताबिक कस्तूरबा की हर गतिविधि पर नज़र रखते थे.



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कस्तूरबा को मोहन का यह बर्ताव खलता था. जितना ज़्यादा मोहन निगरानी और नियंत्रण रखने की कोशिश करते, कस्तूरबा उतनी ही शिद्दत से इन आदतों का विरोध किया करतीं. इसी कश्मकश में दोनों के बीच मनमुटाव बना रहता और कई कई दिनों तक दोनों के बीच बातचीत बंद हो जाया करती थी.

गांधी ने अपनी आत्मकथा 'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' में भी विवाह के शुरूआती समय की कुछ अप्रिय घटनाएं दर्ज की हैं और ​गांधी के जीवन पर बनी रिचर्ड एटनबरॉ की प्रामाणिक फिल्म में भी इस तरह के प्रसंग दिखाए गए जिनमें कस्तूरबा के प्रति उनका बर्ताव आदर्श नहीं था.  गांधी पर लिखी गईं कुछ पुस्तकों और प्रामाणिक लेखों के ​आधार पर कस्तूरबा के बारे में 10 कम सुने फैक्ट्स जानिए.

* कस्तूरबा गांधी के पिता गोकुलदास कपाड़िया थे, जो समुद्र किनारे बसे शहर पोरबंदर में एक व्यापारी के तौर पर रहते थे. कपाड़िया परिवार काफी संपन्न परिवारों में शुमार होता था और गुजराती​ हिंदुओं के मोध बनिया समुदाय से ताल्लुक रखता था.

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* मोहनदास से महात्मा बनने तक गांधी के साथ कस्तूरबा का वैवाहिक जीवन कुल 62 सालों का रहा और कस्तूरबा अपने पति से चार साल पहले ही दुनिया को विदा कह गई थीं.

* कस्तूरबा और महात्मा के जो चार बेटे वयस्क उम्र तक जीवित रहे - हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास थे. कहा जाता है कि कस्तूरबा अपने पहले बच्चे की मृत्यु के दुख से कभी उबर नहीं सकीं.

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1940 के दशक में बापू और बा की ऐतिहासिक तस्वीर.


* मोहनदास से शादी के बाद कस्तूरबा कभी स्कूल नहीं जा सकीं. शादी के बाद मोहनदास तो स्कूल गए और प्रतिभावान छात्र के तौर पर विदेश तक पढ़ने गए लेकिन कस्तूरबा की पढ़ाई घर पर ही हुई और मोहनदास ने भी उन्हें शिक्षित किया.

* जन्म के समय जो मुश्किलें पेश आई थीं, उनके चलते कस्तूरबा का गंभीर ब्रोंकाइटिस रोग रहा. यह रोग निमोनिया के साथ और भी खराब होता चला गया था.

* एक प्रामाणिक लेख के हवाले से एक रिपोर्ट की मानें तो मोहनदास इंग्लैंड जाकर कानून की शिक्षा ले सकें, इसके लिए कस्तूरबा के गहने और तमाम ज़ेवर बेचकर पैसा जुटाया गया था.

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* कस्तूरबा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत दक्षिण अफ्रीका में 1904 में अपने पति के साथ ही की थी. 1913 में वो अफ्रीका में विरोध प्रदर्शनों के चलते जेल भी गईं. 1906 में जब गांधी ने ब्रह्मचर्य के पालन का संकल्प किया था, तब कुछ रिपोर्ट्स में लिखा गया था कि कस्तूरबा ने इस कदम को अपने लिए एक पारंपरिक हिंदू पत्नी की भूमिका से अलग माना था.

* 1913 में जेल में रहने के दौरान कस्तूरबा ने अन्य महिलाओं को प्रार्थना का महत्व बताते हुए उन्हें संगठित किया था. साथ ही, शिक्षित महिलाओं को आंदोलित किया कि वो अशिक्षित महिलाओं को पढ़ाएं.

* कस्तूरबा अपने संग्राम के दौरान कई बार जेल गईं. एक बार राजकोट में महिलाओं के आंदोलन का नेतृत्व करने के कारण उन्हें एक महीने से ज़्यादा कठोर सज़ा के तहत कालकोठरी में रखा गया.

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* गांधी के जेल में होने वक्त अनुयायियों और समर्थकों के लिए कस्तूरबा ही संबोधन दिया करती थीं. गांधी के जेल के समय उपवास आदि करने से कस्तूरबा का स्वास्थ्य और खराब हुआ था लेकिन उन्होंने एक्टिविज़्म जारी रखा. 22 फरवरी 1944 की शाम 7:35 पर कस्तूरबा का देहांत हुआ था.
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