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जब अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी की बांह पकड़कर घर से निकालने पर आमादा हो गए थे बापू

News18Hindi
Updated: February 22, 2020, 12:03 PM IST
जब अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी की बांह पकड़कर घर से निकालने पर आमादा हो गए थे बापू
महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा में कस्तूरबा गांधी के धैर्य और सहनशीलता की प्रशंसा की है

महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि शुरुआत में वो कस्तूरबा (Kasturba) के लिए काफी आकर्षण महसूस करते थे. गांधीजी उस वक्त स्कूल में थे.

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  • Last Updated: February 22, 2020, 12:03 PM IST
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बापू की पत्नी कस्तूरबा गांधी (Kasturba Gandhi) की आज पुण्यतिथि है. आज ही के दिन 1944 में उनका निधन हुआ था. कस्तूरबा गांधी को गांधी आश्रम में लोग प्यार से बा कहते थे. वो इसी नाम से बाद में याद की गईं. कस्तूरबा गांधी का जन्म 11 अप्रैल 1869 को पोरबंदर में हुआ था. उनके पिता गोकुलदास मकनजी एक व्यापारी थे. कस्तूरबा गांधी के पिता गोकुलदास और गांधीजी के पिता करमचंद गांधी दोस्त थे. दोनों परिवारों में रही पुरानी जान पहचान की वजह से ही गांधी और कस्तूरबा के बीच रिश्ते की बुनियाद बनीं और दोनों की शादी हुई.

1882 में महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी की शादी हुई. दोनों शादीशुदा जोड़े की तरह रहने लगे. लेकिन कम उम्र होने की वजह से दोनों को ही शादी एक खेल की तरह लगती थी. वो एकसाथ खेलते हुए दोस्त बन गए थे और शादी की जिम्मेदारी को समझने में असमर्थ थे. एक बार बापू ने कहा था कि उस वक्त उनके लिए शादी का मतलब था- नए कपड़े, खाने के लिए मिठाइयां और रिश्तेदारों के साथ खिलंदड़पना.

कैसा था महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी का वैवाहिक जीवन
महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि शुरुआत में वो कस्तूरबा के लिए काफी आकर्षण महसूस करते थे. गांधीजी उस वक्त स्कूल में थे. एक जगह उन्होंने लिखा है कि स्कूल में भी वो कस्तूरबा के बारे में ही सोचा करते थे. बाद में वो अपने इस अहसास के लिए शर्मिंदा भी होते हैं. कस्तूरबा गांधी अशिक्षित थीं. बापू ने उन्हें पढ़ाना शुरू किया. लेकिन पढ़ाई को लेकर उनमें उतना उत्साह नहीं था, क्योंकि उन्हें घर के काम-काज भी निपटाने होते थे.



1897 में कस्तूरबा गांधी महात्मा गांधी के साथ साउथ अफ्रीका चली गईं. वहां गांधीजी कानून की पढ़ाई के लिए गए थे. वो गांधीजी के काम में सहयोग करतीं और हर काम में उनका अनुसरण करतीं. साउथ अफ्रीका में अश्वेतों के खिलाफ बरते जाने वाले भेदभाव के खिलाफ बापू के आंदोलन में भी कस्तूरबा गांधी ने उनका सहयोग किया और उन आंदोलन में सक्रीय भागीदारी निभाई.



जब महात्मा गांधी का अपनी पत्नी के साथ हुआ बुरी तरह का झगड़ा
महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी के वैवाहिक जीवन को लेकर कई बातें कही गई हैं. इसमें एक बात ये भी है कि दोनों के बीच बनती नहीं थी. अपने वैवाहिक जिंदगी को लेकर बापू ने आत्मकथा में खुद कुछ सच्चाई बयान की है और अपनी गलती कबूला है. ऐसा ही एक वाकया है बापू और कस्तूरबा गांधी के बीच हुआ एक झगड़ा, जिसमें बापू अपनी पत्नी कस्तूरबा को घर से निकालने पर आमादा हो गए थे.

साउथ अफ्रीका में महात्मा गांधी किसी अछूत को अपने यहां नौकर रखने पर राजी नहीं थे. उन्होंने कस्तूरबा गांधी को ही घर के काम-काज निपटाने के लिए कहा. हालांकि इस पर कस्तूरबा गांधी के विचार अलग थे. महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि कस्तूरबा ने अपनी आंखों के सामने अपने पति को बदलते देखा. बैरिस्टर के तौर पर महात्मा गांधी ने यूरोपियन वेशभूषा अपना ली थी. उन्हीं की तरह जीवन जीना सीख लिया था. उनकी पब्लिक के बीच सक्रियता बढ़ गई थी और इस दौरान उन्हें पुलिस प्रताड़ना का शिकार भी होना पड़ता था. कस्तूरबा को न सिर्फ उनकी देखभाल करनी पड़ती बल्कि उनसे मिलने आने वाले मेहमानों की भी देखरेख करनी पड़ती थी. कस्तूरबा गांधी की सेहत पर इन सबका बुरा प्रभाव पड़ा.

जब महात्मा गांधी ने कस्तूरबा गांधी को घर से निकल जाने को कहा
एक बार महात्मा गांधी ने कस्तूरबा गांधी को हैरान कर देने वाला आदेश सुना दिया. कस्तूरबा गांधी को उन्होंने अपने यहां आए मेहमान का टॉयलेट साफ करने को मजबूर कर दिया. इस बात पर कस्तूरबा गांधी फट पड़ी. उन्होंने कहा- अब बहुत हो चुका. इसके बाद दोनों के बीच बुरी तरह से झगड़ा होने लगा.

दोनों के बीच का झगड़ा इतना बढ़ गया कि गांधीजी ने कस्तूरबा से घर से निकल जाने को कह दिया. बात इतनी बढ़ गई कि महात्मा गांधी कस्तूरबा गांधी की बांह पकड़कर घर से बाहर निकालने लगे. बाद में इस पूरे वाकये पर उन्हें काफी पश्चाताप हुआ. उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि ‘ये ठीक उसी तरह से था, जैसे मुझे एक अंग्रेज अधिकारी ने ट्रेन से धक्का देकर बाहर निकाला था. कस्तूरबा की आंखों से लगातार आंसू बहे जा रहे थे. वो चिल्ला कर कह रही थी कि तुम्हें थोड़ी भी लाज शरम नहीं है? तुम अपनेआप को इतना भूल गए? मैं कहां जाऊंगी? तुम सोचते हो कि तुम्हारी बीवी रहते हुए मैं सिर्फ तुम्हारा ख्याल रखने और तुम्हारी ठोकरें खाने के लिए हूं. भगवान के लिए अपना व्यवहार ठीक करो और गेट को बंद कर दो. इस तरह का तमाशा मत खड़ा करो.'

इसके बाद बापू लिखते हैं कि वो अपने किए पर बहुत शर्मिंदा थे लेकिन उन्होंने चेहरे पर सख्ती लाते हुए दरवाजा बंद कर दिया. बापू ने लिखा है कि अगर मेरी बीवी मुझे नहीं छोड़ सकती तो मैं उसे कैसे छोड़ सकता हूं. हमारे बीच कई बार झगड़े हुए लेकिन आखिर में हमदोनों शांत रहे. बापू लिखते हैं कि कस्तूरबा मे असाधारण धैर्य और सहनशीलता थी, इसलिए वो हमेशा विजेता रही.

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First published: February 22, 2020, 12:01 PM IST
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