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Kazakhstan protests: क्या रूस के लिए यह एक मौका है या मुसीबत!

Kazakhstan protests: क्या रूस के लिए यह एक मौका है या मुसीबत!

रूसी सेना का कजाकिस्तान में जाना रूस (Russia) के लिए एक अवसर भी हो सकता है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

रूसी सेना का कजाकिस्तान में जाना रूस (Russia) के लिए एक अवसर भी हो सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

कजाकिस्तान (Kazakhstan) में इस साल के शुरुआत से ही ईंधन तेल की कीमतों (Oil Prices) में इजाफे पर बड़े पैमाने में विरोध बढ़ता जा रहा है. सरकार ने रूस (Russia) से सैन्य सहायता तो मांगी है लेकिन रूसी सेना के पहुंचने के बाद भी विरोध प्रदर्शन में कमी नहीं आई है. रूस और कजाकिस्तान के गहरे संबंधों और परस्परता के कारण यह समस्या रूप के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

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    कजाकिस्तान (Kazakhstan) में अस्थिरता का माहौल केवल अपने ही देश के लिए चिंता का विषय नहीं है. इसका असर पड़ोसी देश रूस (Russia) पर भी बहुत पड़ने वाला है. दोनों देश आपस में 7600 किलोमीटर लंबी सीमा ही साझा नहीं करते बल्कि कजाकिस्तान कई मामलों में रूस का रणनीतिक सहयोगी भी रहा है. सोवियत संघ के जमाने में भी कजाकिस्तान संघ का बहुत अहम हिस्सा रहा था. अलग होने के बाद भी दोनों देशों के बीच गहरे संबंध रहे हैं. ऐसे में कजाकिस्तान में अस्थिरता रूस के लिए भी गंभीर मामला बन गया है. पर क्या वहां सेना (Russian Army) भेजना रूस के लिए समस्या बनेगा या एक नया अवसर बन जाएगा यह एक बड़ा सवाल है.

    सोवियत काल में कजाकिस्तान
    सोवियत संघ के समय में भी रूस के बहुत से अहम सैन्य ठिकाने कजाकिस्तान में थे. उस समय की कई हथियार और आयुध कारखाने  अब भी कजाकिस्तान में हैं. अंतरिक्ष में प्रक्षेपण करने के लिए कजाकिस्तान के बाइकोनूर से रॉकेट उड़ान भरते हैं. ऐसी कई गतिविधियां दोनों देशों को जोड़ने का काम करती हैं. इसलिए कजाकिस्तान में रूसी सेना का जाना रूस के लिए अपने हितों के लिए बहुत मायने रखता है.

    दोनों में अब भी गहरे संबंध
    रूस और कजाकिस्तान सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (CSTO) के तहत सैन्य समझौते का हिस्सा हैं जिसमें छह पूर्व सोवियत राज्य वाले देश शामिल हैं. वैश्विक मामलों के रूसी विशेषज्ञ निकोलाई पेट्रोव ने डीडब्लू को बताया कि कजाकिस्तान में अस्थिरता खुद मास्को के लिए गंभीर खतरा है. क्योंकि अपने लंबाई की वजह से रूसी कजाक सीमा बहुत अधिक सुरक्षित नहीं है.

    रूस के लिए कजाकिस्तान
    कजाकिस्तान में सैन्य कारखानों के अलावा यहां के प्राकृतिक भंडारों में भी रूस की खासी रुचि है. यह मध्य एशिया में सबसे बड़ा और समृद्ध पूर्व सोवियत देश है. यहां के तेल भंडार और यूरेनियम के भंडार रूस के लिए बहुत अहम माने जाते हैं. कजाकिस्तान ने 2015 यूरोपीय यूनियन की तर्ज पर यूरेशियन आर्थिक संघ बनाने से रोकने में अहम भूमिका निभाई थी जो रूस के पक्ष में बड़ी बात मानी जाती है.

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    कजाकिस्तान (Kazakhstan) में इस तरह के प्रदर्शन नई बात नहीं है, लेकिन इस बार ये ज्यादा व्यापक और लंबे हो गए हैं. (तस्वीर: shutterstock)

    कजाकिस्तान के लिए रूस की अहमियत
    इतना ही नहीं कजाकिस्तान के लिए भी रूस बहुत मायने रखता है. पिछले साल रूस में 60 हजार कजाक छात्र पढ़ रहे थे. एक सर्वे के अलावा कम से कम एक तिहाई रूसी नागरिक बेलारूस के बाद सबसे ज्यादा दोस्ताना देश मानते हैं. दोनों देशों के बीच गहरे द्विपक्षीय व्यापार हैं जो पिछले साल सर्वोच्च पर थे. रूस बाइकोनूर स्पेस पोर्ट के लए हर साल 11.5 करोड़ डॉलर का सालाना किराया देता है.

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    कजाकिस्तान के लिए आदर्श नहीं रूस
    लेकिन मॉस्को के रशियन इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल के विशेषज्ञ जो सरकार के थिंक टैंक के बहुत नजदीक हैं, का मानना है कि रूस कजाकिस्तान के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए आकर्षक मॉडल नहीं है. रिपोर्टके मुताबिक यहां के लिए यूरोप, तुर्की से लेकर सिंगापुर तक और भी मॉडल हैं जो उसके लिए बेहतर हो सकते हैं.

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    सोशल मीडिया पर इस आशंकाओं की खूब चर्चाएं हैं कि व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) कजाकिस्तान पर कब्जा कर सकते हैं. (तस्वीर: shutterstock)

    कब्जा करने की आशंका
    कजाकिस्तान रूसी कर्ज से नहीं दबा है. नजदीकी संबंध होने के बाद भी यहां के राजनेता मॉस्को से दूरियां बना कर चलते हैं इसीलिए कुछ साल पहले इस देश की लिपी रूसी क्रिलिक से बदल कर लैटिन अक्षरों वाली कर दी गई थी. 1.9 करोड़ में से 35 लाख लोग रूसी मूल के हैं जो कजाकिस्तान के उत्तरी प्रांत में रहते हैं. कई लोगों को लगता है कि रूस क्रीमिया की तरह कजाकिस्तान पर भी कब्जा कर सकता है, लेकिन कजाक राष्ट्रपति कासिम तोकायेव कई सालों से इसे खारिज करते रहे हैं.

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    सोशल मीडिया पर ऐसी आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हालात का फायदा उठा कर कजाकिस्तान पर कब्जा जमा सकते हैं. फिलहाल यहां कोई रूसी सैन्य अड्डा नहीं है. लेकिन आगे जो भी हो अभी हालात रूस के लिए चिंताजनक ही है.रूस के पड़ोस में ऐसे जनविरोधों को रूस पश्चिम द्वारा ही प्रायोजित बताता रहा है. रूस केसभी पड़ोसी देशों में सामाजिक अस्थिरता का सामना कर चुके हैं या कर रहे हैं. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रूस में भी ऐसे हालात हो सकते हैं.

    Tags: Research, Russia, World

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