KBC सवाल: दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी, जो भारत में है

कौन बनेगा करोड़पति के 12वें सीजन में एक सवाल पूछा गया, जो कोरोना महामारी से संबंधित रहा- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
कौन बनेगा करोड़पति के 12वें सीजन में एक सवाल पूछा गया, जो कोरोना महामारी से संबंधित रहा- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट (Serum Institute of India) में हर साल लगभग 1.3 बिलियन वैक्सीन डोज बनते हैं. बता दें कि सालाना पूरी दुनिया में ही 8 बिलियन डोज बनाए जाते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 4:18 PM IST
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कौन बनेगा करोड़पति (Kaun Banega Crorepati) के 12वें सीजन में दूसरे दिन एक सवाल पूछा गया, जो कोरोना महामारी से संबंधित था. इसमें पूछा गया कि दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी, जो कि भारत में है, वो कौन-सी है. इसके 4 विकल्प थे- भारत बायोटेक, सीरम इंस्टीट्यूट, इंडियन इम्युनोलॉजिकल लिमिटेड और बायोजन इंडिया. इसमें सही जवाब है सीरम इंस्टीट्यूट जो कि पुणे में है. आइए, जानते हैं कि क्यों इस फार्मा कंपनी को वैक्सीन के निर्माण में दुनिया में चुनिंदा सबसे बड़ी कंपनियों में गिना जाता है. ऐसी क्या बात है जो इसे सबसे खास बनाती है.

क्या है कंपनी का इतिहास
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पुणे की वो फार्मा कंपनी है, जो इम्युनोबायोलॉजिकल ड्रग्स तैयार करती है. साल 1966 में साइरस पूनावाला ने इस कंपनी की शुरुआत की थी. पारसी मूल के इस बिजनेसमैन को भारत का वैक्सीन किंग भी कहा जाता है. इसी से कंपनी की शोहरत और काम का अंदाजा लगाया जा सकता है. सीरम इंस्टीट्यूट दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी है.

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इम्युनोबायोलॉजिकल ड्रग्स बनाती है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)




बनाती है भारी मात्रा में वैक्सीन
ये हर साल 130 करोड़ (1.3 बिलियन) वैक्सीन डोज तैयार करती है जो भारत से लेकर दुनिया के तमाम देशों में जाते हैं. बता दें कि पूरी दुनिया में हर साल लगभग 8 बिलियन वैक्सीन डोज बनाए जाते हैं. ये अलग-अलग तरह की वैक्सीन्स होतीं हैं, जैसे बच्चों को लगने वाली अनिवार्य वैक्सीन से लेकर फ्लू तक की वैक्सीन. इन वैक्सीन का बनना कम नहीं किया जा सकता है क्योंकि ये हर साल लाखों जानें बचाती हैं. इस तरह से वैक्सीन बनाने में सीरम इंस्टीट्यूट का बड़ा योगदान है.

कंपनी मुख्य तौर पर बीसीजी का टीका, पोलियों का टीका बनाती है, जिसके अलावा ऑर्डर पर दूसरे टीके तैयार होते हैं.

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शोध भी करती आई है
कंपनी केवल दवा नहीं बनाती, बल्कि रिसर्च में भी काफी आगे है. साल 2009 में ये स्वाइन फ्लू के लिए नाक से दी जाने वाली दवा बना रही थी. अमेरिका के मेसाच्युसेट्स मेडिकल स्कूल के साथ मिलकर इसने एंटी-रेबीज एजेंट तैयार किया जो तुरंत असर करता है. कंपनी को इंटरनेशनल स्तर पर पहचान साल 2012 में मिली, जब इसके काम का विदेशी स्तर पर भी फैलाव हुआ.

ये हैं वर्तमान सीईओ
अदर पूनावाला (Adar Poonawalla) इस वक्त सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ हैं, जो कंपनी के फाउंडर साइरस पूनावाला के बेटे हैं. साल 2011 में अदर के पद संभालने के बाद से कंपनी का विदेशी स्तर पर भी काफी प्रसार हुआ.

सीरम इंस्टीट्यूट हर साल 130 करोड़ (1.3 बिलियन) वैक्सीन डोज तैयार करती है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


कोरोना वैक्सीन पर हो रहा काम
फिलहाल सीरम इंस्टीट्यूट का सारा फोकस कोरोना वैक्सीन के काम पर है. इसके लिए ये ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर काम कर रही है. कंपनी ने AstraZeneca नाम की उस कंपनी के साथ टाई-अप कर रखा है जो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर वैक्सीन तैयार कर रही है. वैक्सीन का ट्रायल अपने आखिरी चरण में है और इसका केमिकल नाम भी तैयार हो चुका है.

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कितने डोज तैयार कर सकती है
ऑक्सफोर्ड का प्रोजेक्ट सफल होने के साथ सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया वैक्सीन का 10 करोड़ डोज तैयार करेगी. इनमें से 50 प्रतिशत हिस्सा भारत के लिए होगा और 50 प्रतिशत गरीब और मध्यम-आय वाले देशों के लिए. कम आय वाले परिवार भी इसे अफोर्ड कर सकें, इसके लिए एक वैक्सीन की कीमत लगभग 225 रुपए हो सकती है. वैक्सीन बनाने के लिए कई दूसरी विदेशी कंपनियों जैसे नोवावैक्स और मॉडर्ना के साथ भी इसका करार हुआ है.

देश में दूसरी कंपनियां भी अग्रणी
केबीसी के विकल्पों में शामिल एक और कंपनी भारत बायोटेक भी काफी अहम है, हालांकि वो सीरम इंस्टीट्यूट से पीछे ही है. हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के साथ मिलकर कोरोना की देशी वैक्सीन तैयार करने में लगी हुई है. बीच में खबर आई थी कि कंपनी 15 अगस्त को ही वैक्सीन ला सकती है लेकिन बाद में कंपनी और ICMR दोनों ने ही वैक्सीन की गुणवत्ता की बात रखते हुए इस बात को खारिज कर दिया.

केबीसी के विकल्पों में शामिल एक और कंपनी भारत बायोटेक भी काफी अहम है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


भारत बायोटेक कंपनी के जरिए बनाई जा रही कोरोना वैक्सीन का नाम है-Covaxin. इसका भी ह्यूमन ट्रायल शुरू हो चुका है.

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तीसरे विकल्प यानी तीसरी दवा निर्माता कंपनी इंडियन इम्युनोलॉजिकल लिमिटेड (IIL) का दफ्तर भी हैदराबाद में है. ऑस्ट्रेलिया के ग्रिफिथ विश्वविद्यालय के साथ कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार करने की कोशिश कर रही है. एक अन्य कंपनी बायोजन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एक गैर-सरकारी कंपनी है, जिसका दफ्तर दिल्ली में है. बीच में इस कंपनी के अधिकारियों पर कोरोना को लेकर लापरवाही का आरोप लगा था. कहा गया था कि उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग के नियम नहीं माने, जिसके कारण काफी लोग संक्रमित हुए.
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