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KBC सवाल : इंग्लैंड में पहली टेस्ट सीरीज जीतने पर प्रशंसक मैदान में क्यों ले आए थे हाथी

बेला नाम की वो हाथी जिसे भारतीय प्रशंसक मैदान पर ले आए थे.

बेला नाम की वो हाथी जिसे भारतीय प्रशंसक मैदान पर ले आए थे.

ये बात 1971 की है. भारत ने तब इंग्लैंड में जाकर उसकी उसी की जमीन पर पहली बार टेस्ट क्रिकेट सीरीज में हराया था. ये सवाल ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

केबीसी में क्रिकेट को लेकर पूछा गया एक रोचक सवाल
51 साल पहले भारतीय प्रशंसक मैदान पर एक हाथी को लेकर आए थे
इस हाथी का आना किस तरह भारतीय टीम के लिए शुभ भी रहा

कौन बनेगा करोड़पति में अमिताभ बच्चन ने हॉट सीट पर बैठे प्रतियोगी से पूछा कि जब भारत ने 1971 में जब पहली बार इंग्लैंड में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज जीती तो भारतीय प्रशंसक किस जानवर को पकड़कर मैदान में ले आए. इसका जवाब तो खैर जितना रोचक था, वो तो है ही लेकिन ये वाकया भी उतना ही दिलचस्प था.

भारत ने पिछले ही साल 24 अगस्त को इंग्लैंड के खिलाफ इंग्लैंड में पहली सीरीज की जीत की 50वीं वर्षगांठ मनाई थी. तब भारतीय टीम के कप्तान अजीत वाडेकर थे.

भारत और इंग्लैंड के बीच इस टेस्ट सीरीज का आखिरी टेस्ट ओवल क्रिकेट स्टेडियम में हुआ. उस दिन गुरुवार का दिन था. भारतीय प्रशंसकों ने उस दिन जो काम किया, वो फिर कभी किसी क्रिकेट मैदान में नहीं दोहराया गया.

ये कहानी अब आप भी जानिए कि किस तरह उस दिन भारतीय प्रशंसक मैदान के करीब स्थित चेसिंगटन जू से हाथी किराए पर लेकर चले आए. इस हाथी के बच्चे का नाम बेला था. वो इस हाथी को ओवल मैच के बीच में ही मैदान पर ले आए. दरअसल उस दिन गणेश चतुर्थी भी थी, जिसने मैदान पर हाथी को लाना प्रतीकात्मक बना दिया.

जब हाथी मैदान पर आया तो ये शुभ कैसे हो गया
हालांकि मैदान के बीच जब बेला हाथी को मैदान पर लाया गया तो भारतीय टीम ने इस बात को अपने लिए शुभ के तौर पर लिया. टीम इससे और उत्साहित हो गई. इसके बारे में तत्कालीन कप्तान अजीत वाडेकर ने कहा कि तब टीम मैनेजर हेमू अधिकारी को भी लगा था कि इतने खास दिन हाथी का आना टीम के
लिए बहुत शुभ था. टीम को यही लगा कि गणेश चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश खुद टीम को सौभाग्य बनकर उनके सामने आए हैं.

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जब बेला हाथी मैदान पर पहुंची तो उस दिन गणेश चतुर्दशी थी और भारतीय टीम के साथ शुभ ही शुभ होने लगा.

वाडेकर ने भी माना था उस दिन शुभ संकेत हो रहे थे
कप्तान वाडेकर ने भी माना था कि उस दिन भारतीय क्रिकेट टीम के साथ इतने बेहतर संयोग बने कि लगा कि भगवान उनके साथ ही है. भाग्य भी उस दिन पूरी तरह टीम के साथ था. इससे पहले दो टेस्ट भारत और इंग्लैंड ने ड्रा खेले थे.

चंद्रशेखर ने पलट दिया था वो टेस्ट 
आखिरी टेस्ट में इंग्लैंड ने 355 रन बनाए और फिर भारत ने इसके जवाब में 284 रन बनाए. दूसरी पारी में स्पिनर चंद्रशेखर ने पासा ही पलट दिया. उन्होंने 38 रन देकर 06 विकेट लिया और इंग्लैंड की टीम त्राहि त्राहि करने लगी. दरअसल बचपन से चंद्रशेखर का एक हाथ पोलियोग्रस्त हो गया था लेकिन इसके बाद भी उन्होंने बॉलर बनकर दिखाया. अपने उसी हाथ से वो ऐसी भऱमाने वाली गूगली गेंदें फेंकते थे कि विपक्षी टीम उसको भांप नहीं पाती थी. दूसरे उनकी गेंदबाजी की एक खासियत ये भी थी कि वो बहुत तेज गेंद कराते थे. स्पिनर होने के बाद भी उनकी स्पीड अच्छी खासी थी.

मिल रीफ घोड़े की कहानी भी रोचक है
अब भारत को जीत के लिए 173 का रन का टारगेट मिला. चंद्रशेखर ने बाद में बताया, जब वो बॉलिंग कर रहे थे तो दिलीप सरदेसाई पीछे से चिल्लाए कि मिल रीफ गेंद फेंको. मिल रीफ की कहानी भी रोचक है.

दरअसल इंग्लैंड में एक मिल रीफ नाम का घोडा़ था. जिसने 1971 की एप्सम डर्बी में सारी रेस जीती थी. और उसकी गति तो गजब की थी. चंद्रशेखर की स्पिन गेंदें भी वैसी ही तेज, अचूक और घूमती हुई होती थीं. उन्होंने 58 टेस्ट में 242 विकेट लिये थे.

फेड्रिक कतई कुछ नहीं कर पाए
उन्होंने बाद में कहा. उस टेस्ट में वह जान फेड्रिक के खिलाफ गूगली गेंद करना चाहते थे लेकिन फिर सोचा कि दिलीप सरदेसाई की सलाह पर वैसी ही गेंद फेंकूं. उस टेस्ट में चंद्रशेखर ने खतरनाक बैट्समैन जान फेड्रिक को शून्य पर आउट किया था.

भारत ने जीत के लिए जरूरी 173 रन आराम से बना लिये. अजीत वाडेकर, दिलीप सरदेसाई, गुंडप्पा विश्वनाथ और फारूख इंजीनियर ने बढ़िया रन बनाए. भारत ने वह टेस्ट 04 विकेट से जीतकर सीरीज पहली बार इंग्लैंड में जीती.

Tags: Amitabh Bachachan, Cricket, Kaun banega crorepati, KBC, Oval Test

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