केबीसी सवाल: कौन थी लोपामुद्रा, जिन्हें जिस ऋषि ने बनाया, उन्हीं से हुई शादी

लोपामुद्रा ऋषि के हिमालय जाने या फिर लंबी साधना में लीन होने के बाद अकेली रह जाती थीं. ऐसे में वन के पेड़ पौधे और जन्तु के साथ वनवासी बच्चे उनके सखा होते थे.
लोपामुद्रा ऋषि के हिमालय जाने या फिर लंबी साधना में लीन होने के बाद अकेली रह जाती थीं. ऐसे में वन के पेड़ पौधे और जन्तु के साथ वनवासी बच्चे उनके सखा होते थे.

केबीसी-12 यानि कौन बनेगा करोड़पति में एक सवाल पूछा गया कि वो कौन से ऋषि थे, जिन्होंने एक कन्या की रचना की और फिर उसी से शादी कर ली. वो लोपामुद्रा थीं. जिनके रूप के चर्चे हर ओर थे. लेकिन वो बहुत विदुषी स्त्री भी थीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 27, 2020, 10:25 AM IST
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केबीसी के 12 वें सीजन में हॉटसीट में बैठी प्रतियोगी से अमिताभ बच्चन ने सवाल पूछा कि लोपामुद्रा कौन थीं. किस ऋषि ने उनकी सृष्टि की थी, जिससे फिर उनकी शादी भी हुई. इसका जवाब है ऋषि अगस्त्य. लेकिन क्यों अगस्त्य ने उन्हें बनाया. फिर कैसे उनकी शादी ऋषि से हुई. इसकी भी रोचक कहानी है.

कुल मिलाकर लोपामुद्रा के बारे में जो कुछ कहा जाता है. उसके अनुसार वो बहुत सुंदर और बुद्धिमान थीं. उनके सौंदर्य के चर्चे तब हर ओर थे. लिहाजा जब उन्होंने ऋषि अगस्त्य से शादी करना स्वीकार किया, उससे लोगों को हैरानी भी हुई कि ऐसी रूपवती और राजसी कन्या क्यों किसी ऋषि से शादी कर रही है और उस शादी के लिए अपना ऐश्वर्य छोड़ देगी.

दार्शनिक भी थीं
लोपामुद्रा प्राचीन भारत की एक दार्शनिक नारी भी थीं. उनका पालनपोषण विदर्भराज निमि या क्रथपुत्र भीम ने किया इसलिए इन्हें 'वैदर्भी' भी कहते थे. अगस्त्य से विवाह हो जाने पर राजवस्त्र और आभूषण का त्याग कर उन्होंने पति के अनुरूप वल्कल एवं मृगचर्म धारण किया. दोनों के समागम से 'दृढस्यु' नामक पराक्रमी पुत्र का जन्म हुआ.
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राजा नहीं चाहता था कि उनका विवाह ऋषि से हो
महाभारत की कथा के अनुसार अगस्त्य मुनि को अपने पितरों की मुक्ति के लिए विवाह करने की इच्छा हुई. अपने योग्य कोई कन्या न मिलने पर उन्होंने विभिन्न जंतुओं के अंश लेकर एक कन्या की रचना की. उसे संतान के लिए आतुर विदर्भराज को दे दिया. यही लोपामुद्रा थीं.

ऋषि अगस्त्य के साथ लोपामुद्रा


लोपामुद्रा के युवा होने पर अगस्त्य ने उससे विवाह करने की इच्छा प्रकट की. राजा ऐसा नहीं करना चाहता था लेकिन उसे शाप का भी डर था. इस पर लोपामुद्रा ने पिता से कहा, "मुझे मुनि को देकर आप अपनी रक्षा करें."

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वनवास में राम गए थे अगस्त्य और लोपामुद्रा से मिलने
रामचंद्र जी जब वनवास के लिए गए थे तो लोपामुद्रा तथा अगस्त्य से मिलने उनके आश्रम गए थे. वहाँ ऋषि ने उन्हें उपहारस्वरूप धनुष, अक्षय तूणीर तथा खड्ग दिए थे.

लोपामुद्रा के पास थी अक्षय थाली
पुराणों के अनुसार लोपामुद्रा को काशी के राजा से विपुल सम्पत्ति प्राप्त हुई थी. 'आनन्द रामायण' में उसके पास अपरिमित मात्रा में अन्न देने वाली एक 'अक्षय थाली' होने का भी उल्लेख है.

वहीं अगस्त्य ऋषि के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने कड़ा तप करके अपार शक्ति हासिल की थी. उनके हाथ के त्रिशूल और कुल्हाड़ी में अपार शक्ति थी. ऋषि अगस्त्य की सफलता के पीछे उनकी पत्नी लोपामुद्रा का भी हाथ रहा. उन्होंने ऋषि के उदंड और रुखे व्यक्तित्व को मांजकर उसे कोमल और उर्वर बनाया.

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एकाकी समय वनवासी बच्चों को शिक्षित करतीं
कहा जाता है कि जब ऋषि तप कर रहे होते, साधना में होते या फिर हिमालय की ओर कूच कर गए होते तो लोपामुद्रा एकाकी जीवन गुजारती थीं, तब पेड़-पौधे, वनवासी बच्चे और जानवर ही उनके सखा होते थे. उस दौरान वो वनवासी बच्चों और ऋषिकुमारों को शिक्षित भी करती थीं.

साबित किया कि योग और भोग दोनों जरूरी
लोपामुद्रा को महात्रिपुरसुंदरी से श्रीविद्या का ज्ञान और वर दोनों मिला. उन्होंने साबित किया कि मनुष्य जीवन में योग और भोग दोनों चाहिए. उन्होंने अपने वेदमंत्रों में पुरुष और स्त्री संबंधों की व्याख्या की. उनकी वाणी में आत्मबल का तेज था. जो अतीव सुंदरी होने के बाद भी एक प्रौढ़ ऋषि से शादी करती हैं.

अगस्त्य सप्त ऋषियों में एक थे
रामायण और महाभारत में संत अगस्त्य मुनि का उल्लेख मिलता है. वह प्रसिद्ध सप्त ऋषियों में एक और प्रसिद्ध 18 सिद्धों में एक हैं. ऐसा माना जाता है कि वह 5000 से अधिक वर्षों तक जीवित रहे. कहा जाता है कि वह कई वर्षों तक पोथिगई पहाड़ियों में रहे थे.
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