KBC सवाल : गैलिलियो नहीं बल्कि एक चश्मा बनाने वाले की थी दूरबीन की खोज

वैटिकन के सीनेट को अपनी दूरबीन दिखाता हुआ गैलिलियो
वैटिकन के सीनेट को अपनी दूरबीन दिखाता हुआ गैलिलियो

कौन बनेगा करोड़पति ( Kaun Banega Crorepati) के सीजन 12 के पहले दिन दूरबीन (telescope) के आविष्कार करने को लेकर एक सवाल पूछा गया, जिससे जाहिर हुआ कि ये आविष्कार गैलिलियो (Galileo) ने नहीं बल्कि एक जर्मन व्यापारी ने किया था, जो नीदरलैंड में रहता था

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 29, 2020, 4:45 PM IST
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लोकप्रिय और जानकारीपूर्ण टीवी शो "कौन बनेगा करोड़पति" (Kaun Banega Crorepati )  की शुरुआत हो गई है. इसके 12 वें सीजन का 28 सितंबर को पहला दिन था. ज्यादातर लोगों को मालूम है कि दूरबीन का आविष्कार गैलिलियो ने किया था. इसी मामले में केबीसी अलग हट कर है कि वो हमारे दिमाग में लंबे समय से कई उन सवालों के जवाब की जगह हमें सही जवाब से रू-ब-रू कराता है. पहले दिन एक सवाल दूरबीन के आविष्कार करने वाले को लेकर था. जिस पर शो के होस्ट अमिताभ बच्चन के सामने बैठी प्रतियोगी ही नहीं बोल्ड हुई बल्कि तमाम दर्शन भी.

दरअसल दूरबीन का आविष्कार नीदरलैंड (Neatherlands) एक ऐसे शख्स ने किया है, जिसका नाम लोग शायद ही जानते हों. ज्यादातर को यही लगता है कि ये आविष्कार यूनान के गैलिलियो गैलिली (Galileo Galili) ने किया था. जबकि ये गलत जवाब है. गैलिलियो ने इस आविष्कार को और बेहतर किया था. ये आविष्कार चश्मे की दुकान चलाने वाले एक शख्स ने किया था, जो ग्राहकों को चश्मा बनाकर बेचता था.

इस शख्स ने किया था दूरबीन का आविष्कार 
इस चश्मे वाले का नाम था हेंस लिपरशी (Hans Lippershey) था.वो कोई बहुत ज्यादा पढ़ा-लिखा भी नहीं था. बस रोजी-रोटी की तलाश में संघर्ष करते हुए वो इस पेशे में आ गया. लेकिन उसके साथ एक ही बात अच्छी थी कि वो अपने चश्मे के लैंसों से लगातार कुछ नया बनाने की भी कोशिश करता रहता था. उससे कभी कभी मजेदार चीजें हो जाती थीं.
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ये हैं हेंस लिपरशी. जर्मनी में पैदा हुए और नीदरलैंड में चश्मा बनाने का व्यापार करने वाले इस शख्स ने बनाई थी दुनिया की पहली दूरबीन




क्या होती है दूरबीन
अब हम आपको बताते हैं कि दूरबीन दरअसल होती क्या है. ये एक ऐसी चीज है जो कि बहुत दूर की चीज को बहुत नजदीक दिखाती है. पहले तो इस आविष्कार पर विश्वास ही नहीं किया गया. बाद में जिसने इससे देखा, उससे ये चमत्कार ज्यादा लगी.

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तब ये किसी चमत्कार की तरह था
ये उस समय चमत्कार की तरह था कि इतनी दूर की चीज को अपने पास देख लीजिए. तब ये माना जाने लगा कि इसका अविष्कार करने वाला आदमी भगवान से कम नहीं है. असलियत ये है कि दूरबीन का आविष्कार सोच समझकर नहीं किया गया था बल्कि हो गया. हालांकि जब बार दूरबीन का आविष्कार हो गया तो फिर इसे समय के साथ और बेहतर किया गया. इस में बदलाव आता गया.

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ये है वो दूरबीन जो बाद में गैलिलियो ने बनाई, ये कहीं ज्यादा ताकतवर थी


कौन था हेंस लिपरशी
अब जानते हैं हैंस हेंस लिपरशी के बारे में. जिसे दूरबीन बनाने वाला पहला शख्स माना गया. वो बहुत बढ़िया किस्म के चश्मे बनाता था. उसके पास तरह तरह के लैंस थे. उसने एक दिन कुछ लैंस आपस में मिला कर देखा तो उसने पाया कि जिस वस्तु को वो देख रहा है वो तीन गुना ज्यादा पास नजर आ रही है.

1608 में पेटेंट कराया गया
1608 में उसने नीदरलैंड सरकार से इसका पेटेंट करा दिया.फिर लिपरशी ने दोनों आंखों से देखा जाने वाला दूरबीन बनाया. द्विनेत्रीय दूरबीन बनाया जो की दोनों आँखों पर लगा कर देख सकते थे. इस दूरबीन में उत्तल लेंस और अवतल लेंस दोनों का उपयोग किया गया था.

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दूरबीन के आविष्कार का एक और किस्सा
हालांकि दूरबीन बनाने का एक किस्सा और किताबों में मिलता है. दूरबीन का अविष्कार सही मायने में हेंस लिपरशी ने नही बल्कि उसके छोटे शैतान बेटे ने खेल खेल में किया. स्कूल की छुट्टी वाले दिन वो दुकान पर हाथ बंटाने के लिए आया हुआ था.
बेटे ने हर रंगीन कांच को आंखों में लगाकर दरवाजे के बाहर देखना शुरू किया. कभी लाल कभी पीला. जब उसने सबको साथ मिलाकर देखना शुरू किया; तो सामने की गिरजाघर की मीनार एकदम पास आ गई. उसने जब पिता को ये दिखाया तो उससे दूरबीन का आविष्कार हुआ.

galileo
गैलिलियो को जब पहली दूरबीन बनने का पता लगा तो उसने उन्हीं जानकारियों के आधार पर ऐसी दूरबीन बनाई जो बहुत ज्यादा दूर की वस्तुओं को पास दिखा सकती थी.


गैलिलियो ने ज्यादा ताकतवर दूरबीन बनाई
गैलिलियो ने इसके बाद कहीं ज्यादा और ताकतवर लैंस का इस्तेमाल करके ऐसी दूरबीन बनाई तो किसी भी वस्तु को 20 से 30 गुणा पास ला सकती थी. इससे गैलिलियो खगोलशास्त्र का अध्ययन करने में सक्षम हुआ.

ये जरूर कहा जा सकता है कि गैलिलियो वो पहले शख्स थे जिन्होंने एक सफल दूरबीन का आविष्कार किया. इससे उन्होंने आकाश के रहस्यों का पता लगाया. अब तो दुनियाभर में आधुनिक वेधशालाएं हैं. जहां ऐसी दूरबीनें हैं, जो हजारों किलोमीटर दूर आसमान में झांक सकती है. वैसे अंतरिक्ष में एक घूमती हुई नासा की हबल दूरबीन भी लगातार तस्वीरें भेजती रहती है.
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