क्या अश्वेत लोगों के साथ रहने पर आदतें बिगड़ने का डर था गांधी जी को?

क्या अश्वेत लोगों के साथ रहने पर आदतें बिगड़ने का डर था गांधी जी को?
अमेरिका में अज्ञात प्रदर्शनकारियों ने भारतीय दूतावास के सामने लगी महात्मा गांधी की मूर्ति को भी नुकसान पहुंचाया (Photo-pixabay)

महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को अंग्रेजों से शिकायत थी कि वे भारतीयों और अश्वेतों के साथ समान व्यवहार करते हैं. उन्हें डर था कि इससे भारतीयों की आदतें भी अश्वेतों जैसी हो सकती हैं.

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अमेरिका (America) में अश्वेत मूल के नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस की बर्बरता के कारण मौत (Death of George Floyd) हो गई. इसके बाद से पूरा अमेरिका सुलग रहा है. प्रदर्शनों की आग वॉशिंगटन तक भी पहुंची, जहां अज्ञात प्रदर्शनकारियों ने भारतीय दूतावास के सामने लगी महात्मा गांधी की मूर्ति को भी नुकसान (vandalized statue of Mahatma Gandhi in Washington) पहुंचाया. वैसे गांधी जी की मूर्ति से छेड़छाड़ की ये पहली घटना नहीं. इससे पहले भी अफ्रीकी मुल्कों में ऐसा हो चुका है. वहां गांधीजी को नस्लभेदी (racism in Mahatma Gandhi) माना जाता था.

साल 2018 में घाना की नामी-गिरामी यूनिवर्सिटी से महात्मा गांधी की मूर्ति रातोंरात हटा दी गई, क्योंकि अफ्रीकी मूल के लोगों का मानना है कि गांधीजी नस्लभेदी थे. राजधानी अकरा की यूनिवर्सिटी ऑफ घाना में ये मूर्ति दो साल पहले ही भारत-घाना की मैत्री के प्रतीक के तौर पर लगाई गई थी. इसके बाद तो गांधीजी के लिए अफ्रीकन छात्र और प्रोफेसरों का गुस्सा फूटकर बह निकला. 'रेसिस्ट' गांधी की मूर्ति हटवाने के लिए उन्होंने लगातार प्रदर्शन किया और आखिरकार ऐसा करवाकर ही माने. जिन गांधीजी को पूरी दुनिया में अहिंसा और प्रेम का प्रतीक माना जाता है आखिर क्यों अफ्रीका में उनके खिलाफ इतना गुस्सा है, इसके पीछे कई वजहें गिनाई जाती हैं.





भारतीयों से कमतर मानते थे
गांधीजी की खिलाफ गुस्से की वजह अफ्रीका प्रवास के दौरान लिखा उनका एक पत्र है. बता दें कि साल 1893 से 1915 के दौरान महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में एक वकील की हैसियत से काम किया था. इसी दौरान अपने एक पत्र में उन्होंने किसी से जिक्र किया कि भारतीयों और अफ्रीकन लोगों को एक ही दरवाजे से प्रवेश करने की इजाजत है. खत का मजमून शिकायत से भरा था.
साल 1904 में लिखे इस पत्र में लिखा था- भारतीयों के साथ उनका मेलजोल...मैं मानता हूं कि इससे मुझे गुस्सा आ जाता है. 2015 में अफ्रीकी मूल के दो लेखकों ने भी इस बात का उल्लेख किया था कि गांधीजी को अपने और अफ्रीकन लोगों के लिए समान व्यवहार से काफी शिकायत थी. उन्हें डर था कि इससे उनकी आदतें भी खराब हो सकती हैं.



साउथ अफ्रीका का गांधी...
अफ्रीकी मूल के शोधार्थियों अश्विन देसाई और गूलम वाहिद ने सात सालों तक गांधीजी पर शोध किया. उन्होंने उन सारे सालों के बारे में खंगाला, जिस दौरान वे अफ्रीका में रहे. इसके बाद सामने आई किताब द साउथ अफ्रीकन गांधी... (The South African Gandhi: Stretcher-Bearer of Empire) ने विवादों के नए झरोखे खोल दिए. लेखकों ने अपनी किताब में लिखा कि गांधीजी आजादी के लिए भारतीयों के संघर्ष को अफ्रीकी लोगों के संघर्ष से बड़ा मानते थे. किताब में इसका भी जिक्र मिलता है कि गांधीजी अफ्रीकी मूल के लोगों को अफ्रीकन काफिर कहा करते थे.

किताब द साउथ अफ्रीकन गांधी... (The South African Gandhi: Stretcher-Bearer of Empire) ने विवादों के नए झरोखे खोल दिए


किताब के मुताबिक, 'वर्ष 1904 में जोहेंसबर्ग के एक हेल्थ ऑफिसर को लिखे पत्र में उन्होंने कुली लोकेशन नामक एक स्लम का जिक्र किया. पत्र में उन्होंने साफ लिखा कि कॉन्सिल को काफिरों को भारतीयों के साथ एक ही बस्ती में रहने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए.' इसमें लिखा गया है कि अगले ही साल जब डर्बन में प्लेग के प्रकोप से सैकड़ों जानें जा रही थीं, गांधीजी ने लिखा कि जब तक भारतीयों और ब्लैक काफिरों को बिना भेदभाव एक साथ इलाज मिलता रहेगा, तब तक बीमारी बनी रहेगी.

गांधीजी के विचारों और उनके कामों को अफ्रीका में दो अलग-अलग तरह से देखा जाने लगा है. उनके आंदोलन ने भारत को आजादी दिलाई तो अफ्रीका और पूरी दुनिया में भी गांधीजी के समर्थकों ने नस्लभेद खत्म करने के लिए काफी काम किया. मार्टिन लूथर किंग जूनियर इनमें मुख्य नाम हैं, जो महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित थे और पूरी जिंदगी नस्लभेद और रंगभेद को खत्म करने के लिए काम करते रहे.

गांधीजी के विचारों और उनके कामों को अफ्रीका में दो अलग-अलग तरह से देखा जाने लगा है (Photo-pixabay)


मूर्ति गिराने के लिए सोशल मीडिया कैंपेन
किताब के मुताबिक, एक तरफ गांधीजी का अहिंसा प्रेम, एकता पर जोर तो दूसरी तरफ अफ्रीका में रहने के दौरान वहां के मूल निवासियों और भारतीयों के लिए एक ही दरवाजे का होना उन्हें खला करता था.' इन बातों के सामने आने के बाद घाना के विद्यार्थियों को कैंपस में गांधीजी की मूर्ति उनके उसी भेदभाव की याद दिलाती थी. यही वजह है कि मूर्ति को हटाने के लिए सबने लगातार प्रदर्शन किया. यहां तक कि गांधीजी को रेसिस्ट बताते हुए ट्विटर पर बाकायदा एक मुहिम चली हुई है #Ghandimustfall

ब्रिटेन की मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में भी स्टूडेंट्स ने कैंपस में महात्मा गांधी की प्रतिमा लगाए जाने का विरोध किया. गांधी की 150 सालगिरह पर वहां उनकी 9 फीट ऊंची मूर्ति लगाई जानी थी. इसपर स्टूडेंट यूनियन ने गांधी जी को नस्लभेदी बताते हुए किसी ऐसे अश्वेत एक्टिविस्ट की मूर्ति लगाने को कहा, जिसका मैनचेस्टर से भी संबंध रहा हो, जैसे कि स्टीव बिको या ओलिव मॉरिस.

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