तंगी से जूझते नॉर्थ कोरिया में 17 साल बाद पैसों के लिए दोबारा अपनाया जा रहा ये तरीका

तंगी से जूझते नॉर्थ कोरिया में 17 साल बाद पैसों के लिए दोबारा अपनाया जा रहा ये तरीका
किम जोंग अपने देश के अमीरों को जबर्दस्ती बांड बेचकर उनसे पैसों की उगाही कर रहे हैं

कोरोना (coronavirus) की वजह से सीमाएं बंद कर चुके नॉर्थ कोरिया (North Korea) में इन दिनों पैसों की काफी किल्लत हो चुकी है. यही वजह है कि किम जोंग (Kim Jong Un) देश के अमीरों को जबर्दस्ती बांड (bond) बेचकर उनसे पैसों की उगाही कर रहे हैं.

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लॉकडाउन (lockdown) का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था (effect of lockdown on global economy) पर पड़ा है. बॉर्डर सील करने की वजह से व्यापार बंद पड़े हैं. यही वजह है कि कई महीनों बाद अब देश उन देशों के लिए अपनी सीमाएं खोलने की सोच रहे हैं, जहां कोरोना संक्रमण (corona infection) की दर कम हो चुकी है. इधर उत्तर कोरिया (North Korea) की हालत सबसे खराब है. व्यापार-व्यवसाय के लिए ये देश लगभग पूरी तरह से चीन (China) पर निर्भर है. अब चूंकि बिजनेस हो नहीं पा रहा तो नुकसान पूरा करने के लिए किम जोंग (Kim Jong Un) ने एक अनोखा ही तरीका निकाला. इंटरनेशनल मीडिया के मुताबिक वो देश के रईसों को बांड खरीदने पर मजबूर कर रहे हैं.

दक्षिण कोरिया की वेबसाइट डेली एनके, जो कि उत्तर कोरिया के मुद्दों को उठाती है, उसमें इस आशय की खबर आई है. रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल महीने में ही किम की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी Politburo ने तय कर लिया था कि बांड जल्द से जल्द छापे जाएं. बांड छपकर उत्तर कोरिया के सेंट्रल बैंक में पहुंच गए और इसके बाद से उनकी बिक्री चालू है.

60% तक पब्लिक बांड कंपनियों और संस्थाओं को दिए गए हैं




ऐसी कंपनियां, जिन्हें किसी चीज की खरीदी के लिए पैसों की जरूरत है, उन्हें भी कथित तौर पर बैंक से पैसों की बजाए बांड लेने के लिए कहा गया है. इस बांड के बदले उन्हें जहां से भी जिसकी खरीदी करनी हो, वो की जा सकती है. इसे ऐसे समझते हैं कि जैसे उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में एक कंपनी जो कंस्ट्रक्शन का काम करती है, अगर उसे सीमेंट चाहिए हो तो वो सीमेंट फैक्ट्री को बांड देगी, जिसके बदले उसे सीमेंट मिलेगा.



माना जा रहा है कि 60% तक पब्लिक बांड कंपनियों और संस्थाओं को दिए गए हैं, जबकि 40% बांड कोरिया के अमीरों को बेचा जा रहा है. बता दें कि गरीब देश माने जाने वाले उत्तर कोरिया में काफी सारे रईस भी हैं, जिनका ताल्लुक बिजनेस से है. इस क्लास को donju कहते हैं. इन्हीं लोगों को 40 फीसदी बांड खरीदने को कहा गया है. बताया जा रहा है कि किम के इस फैसले से ये क्लास काफी नाखुश है और मान रहा है कि कोरोना के कारण बंद पड़ी इकोनॉमी को उनके घर के पैसों से 'फिक्स' करने की कोशिश हो रही है.

बांड बेचने को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि नॉर्थ कोरिया भी कोरोना से अछूता नहीं है. (Photo-pixabay)


फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक प्रतिबंध और कोरोना वायरस की वजह से नॉर्थ कोरिया दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है. इस बार की मंदी साल 1997 के बाद की मंदी से भी ज्यादा है. इसे ही ठीक करने के लिए किम जोंग की सरकार एक तरीके अपना रही है. इन्हीं में से एक है रेयर बांड की बिक्री. साल 2003 में नॉर्थ कोरिया में पैसों के लिए बांड की बिक्री की शुरुआत हुई थी. सरकार ने तब इसे People's Life Bond नाम दिया था और कहा गया था कि सरकार से बांड खरीदना राष्ट्रभक्ति है. सत्तर के दशक में कोरिया ने अपने बांड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेचे. लेकिन फिर साल 1984 में इसे डिफॉल्टर घोषित करते हुए कई देशों ने इसको खरीदने से मना कर दिया. हालांकि इसके बाद भी कई देश इस उम्मीद में ये बांड खरीदते रहे कि एक दिन इस देश की इकोनॉमी भी सुधरेगी.

फिलहाल पैसों के जुगाड़ के लिए एक बार फिर से बांड बेचने को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि नॉर्थ कोरिया भी कोरोना से अछूता नहीं है. बता दें कि देश अब तक भी इससे इनकार कर रहा है कि उनके यहां कोरोना के मामले हैं. हालांकि चीन के साथ सीमाएं बिल्कुल बंद करना और अब बांड बिक्री से यही इशारा मिलता है. चीन के अलावा इस देश के पास बिजनेस के लिए कोई खास सहारा नहीं क्योंकि आइसोलेट होने के कारण ज्यादातर देशों से इसका संपर्क नहीं है. परमाणु परीक्षण की वजह से अमेरिका भी इस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगा चुका है, इससे यहां की अर्थव्यवस्था और खराब पड़ी हुई है.

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First published: June 3, 2020, 1:26 PM IST
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