अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव: बाइडेन की 10 खास बातें, जो उन्हें ट्रंप से अलग करती हैं

अमेरिकी चुनाव में दो प्रमुख उम्मीदवार ​बाइडेन और ट्रंप.
अमेरिकी चुनाव में दो प्रमुख उम्मीदवार ​बाइडेन और ट्रंप.

US Presidential Election 2020 : मिशिगन से चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत हो जाने के बाद भी कई तरह के सर्वे लगातार चर्चा में बने हुए हैं. जानना दिलचस्प है कि बाइडेन (Joe Biden) की पर्सनैलिटी और सोच उन्हें किस तरह से ट्रंप (Donald Trump) के उलट नेता बनाती है.

  • News18India
  • Last Updated: October 15, 2020, 2:07 PM IST
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इस साल होने जा रहे अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (US Elections) में अब करीब महीने भर का ही वक्त बाकी है. इस बार चुनाव में दो उम्मीदवार प्रमुख हैं. मौजूदा राष्ट्रपति (US President) डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट उम्मीदवार जोसेफ बाइडेन. दोनों के बीच डिबेट (US Presidential Debate) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. डिबेट के बाद दोनों उम्मीदवारों की तुलना का दौर चल रहा है. दोनों के व्यक्तित्व (Peronality) से लेकर सोच और नीतिगत विचार से लेकर व्यवहार तक, हर पहलू पर नज़र रखी जा रही है. दोनों नेता एक दूसरे से कितने अलग हैं और कौन से फीचर उन्हें एक दूसरे से अलग करते हैं, इस बारे में जानना दिलचस्प है.

77 वर्षीय बाइडेन छह बार सीनेटर रह चुके हैं और पहली बार 1972 में चुनाव जीते थे. अमेरिका के 47वें उप राष्ट्रपति रह चुके बाइडेन को पहले भी दो बार डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाया था. दूसरी तरफ, 74 वर्षीय ट्रंप अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति बने और इससे पहले रियल स्टेट डेवलपर और और रिएलिटी शो के होस्ट रह चुके थे.

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इस बार दोनों के बीच अच्छी टक्कर हो रही है और दोनों एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप की चालें चल चुके हैं. रिसर्चगेट, एनवाय टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल और अन्य प्रकाशनों के विश्लेषणों व लेखों पर आधारित इस रिपोर्ट में 10 पॉइंट्स में व्यक्तित्व और नीतियों से जुड़े वो फैक्टर जानिए, जो ट्रंप से बाइडेन को एकदम अलग बनाते हैं.
प्रोफाइल : बाइडेन करीब 50 साल के सार्वजनिक या राजनीतिक जीवन का अनुभव रखते हैं, जबकि ट्रंप के पास ऐसे अनुभव की कमी है. माना जा रहा है कि अगर बाइडेन व्हाइट हाउस पहुंचे तो वह ​बराक ओबामा की विरासत को आगे बढ़ाएंगे. ओबामा के समय में उप राष्ट्रपति रह चुके बाइडेन को कई सर्वेक्षणों में ट्रंप के मुकाबले बढ़त लेते हुए बताया जा चुका है.
हेल्थ केयर : बाइडेन की प्रमुख प्राथमिकता यही है. कोरोना काल में जहां ट्रंप पर देर से और लापरवाही से कदम उठाने के आरोप लगे, वहीं बाइडेन ने शुरू से ही वायरस को लेकर नीतियां बनाने, प्रशासनिक रवैये और लोगों के इलाज के इंतज़ाम आदि के संबंध में बयान और कार्यक्रम चलाए. एक तरह से बाइडेन को आपदा के समय कमांडर इन चीफ के तौर पर देखा गया. ओबामा के समय में भी बाइडेन अफोर्डेबल केयर एक्ट के चलते स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के लिए चर्चित हुए थे.
अमेरिकी चरित्र : बाइडेन अपने वक्तव्यों में बहुत शिद्दत और सकारात्मकता के साथ अमेरिका के किरदार के बारे में बात करते रहे हैं. अमेरिका के वैश्विक रोल को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनके बयानों से अमेरिका में उनकी छवि 'प्रो अमेरिका' नेता की रही है. 'अगर डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में 8 साल रहे तो अमेरिका का मूल कैरेक्टर हमेशा के लिए बदल जाएगा.' आक्रामक ट्रंप पर बाइडेन यह आरोप लगा चुके हैं.
व्यक्तित्व : मनोविज्ञान के विशेषज्ञों ने जो विश्लेषण तैयार किया, उसके मुताबिक बाइडेन के व्यक्तित्व के सबसे प्रमुख फैक्टर ऊर्जावान मिलनसार होना और सत्ता के लिए मोहग्रस्त न होना रहे. इसके अलावा, वह सबको साथ लेकर चलने वाले और सहयोगी व्यक्ति देखे गए. इसके बाद उनकी पर्सनैलिटी में महत्वाकांक्षा और आत्मविश्वास जैसे गुण देखे गए. साथ ही, हावी होना उनके व्यक्तित्व में 9 फीसदी लक्षण रहा और बेबाक होना 3 फीसदी.
छवि : बाइडेन की छवि अमेरिका में नवउदारवादी नेता की है, लेकिन लोकतांत्रिक और समाजवादी विचारधारा को साथ लेकर चलने वाले नेता की भी. ज़ाहिर तौर पर ट्रंप की कथित फासीवादी नेता वाली छवि से यह बिल्कुल अलग है. बाइडेन को लोकतांत्रिक संस्थाओं के पक्ष में और भेदभाव के खिलाफ खड़े होने वाले नेता के तौर पर देखा जाता है.
विदेश नीति : अरब देशों या ईरान जैसे देशों के साथ रवैये को लेकर ट्रंप और ​बाइडेन के बीच मतभेद ​साफ दिखते हैं और दोनों अलग किस्म की विदेश नीति के पक्षधर हैं. लेकिन अफगानिस्तान और मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियों को लेकर दोनों के मत तकरीबन समान हैं. बाइडेन की छवि समावेशी नेता की है इसलिए माना जा रहा है कि अमेरिका के बिगड़े संबंधों को सुधारने की दिशा में वो आगे बढ़ेंगे.
चीन नीति : ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति काल में चीन को खुले तौर पर सबसे बड़ा दुश्मन बना लिया है जबकि इससे पहले डेमोक्रेटिक नेताओं की सरकारों के दौरान अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक और व्यावसायिक रिश्ते ठीक चल रहे थे. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि चीन के साथ झगड़े को बढ़ावा देने वाली नीतियां अमेरिका अपनाएगा ही, लेकिन ​ट्रंप के मुकाबले बाइडेन हल निकालने के लिए ज़्यादा मुफीद नेता होंगे.
नस्लवाद : कोरोना काल में अमेरिका के सामने दूसरी सबसे प्रमुख समस्या नस्लभेद की रही. इस मोर्चे पर भी ट्रंप और उनका प्रशासन न केवल नाकाम रहा बल्कि सवालों के घेरे में भी. ओबामा की सोच और नीतियों के पक्षधर और उत्तराधिकारी माने जा रहे बाइडेन नस्लवाद, पुलिसिंग और अपराधों के मामले में समानता और न्याय के हिमायती नेता की छवि रखते हैं.
रोज़गार : इस बार व्हाइट हाउस में पहुंचते ही नए राष्ट्रपति के सामने सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था और रोज़गार संबंधी मुद्दों को हैंडल करने की होगी. महामारी से तगड़ा झटका खाने वाले अमेरिका की अर्थव्यवस्था और जॉब मार्केट को उबारने के लिए ट्रंप और बाइडेन दोनों ने ही लाखों रोज़गार देने के वादे किए हैं, लेकिन इसके लिए दोनों की नीतियां ज़ाहिर तौर पर काफी अलग हैं.
क्लाइमेट और अन्य मुद्दे : कैलिफोर्निया के जंगलात में आग की वारदात के पहले से बाइडेन के चुनाव अभियान में पर्यावरण हित संबंधी नीतियां खास थीं. दूसरी तरफ, ट्रंप ने पर्यावरण के मुद्दे को अहमियत नहीं दी. बाइडेन के आने से एनर्जी और पर्यावरण से जुड़े सेक्टर की कंपनियां बड़ा बदलाव देख सकती हैं. वहीं, वित्तीय, इमिग्रेशन, टैक्स, टेक और सीमाओं आदि को लेकर भी नीतियों के स्तर पर बाइडेन एक नज़र में ट्रंप से अलग नज़र आते हैं.
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