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देश के 13 शहर, कैसे बन गए कोविड 19 के नए हॉटस्पाट?

ऊना जिले में कोरोना के केस.

ऊना जिले में कोरोना के केस.

इन 13 ज़िलों को हिदायत है कि कोरोना वायरस (Corona Virus) के लक्षणों के आधार पर टेस्टिंग की संख्या और क्षमता बढ़ाई जाए, आईसीयू बिस्तर की तादाद बढ़ाकर एडवांस तैयारी रखी जाए, इसके साथ ही ऑक्सीजन सप्लाई और अनुमानित ग्रोथ रेट (Growth Rate) के हिसाब से केस लोड को देखते हुए सारे इंतज़ाम किए जाएं. यानी ये सब नहीं हो रहा है?

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    भारत में कोरोना वायरस (Corona Virus) वैश्विक महामारी से जितनी मौतें हो रही हैं, उनमें से 14% केवल 13 शहरों में. इसका मतलब यह हुआ कि देश में Covid-19 हर सातवीं मौत इन 13 में से ही किसी शहर में हो रही है. इस चिंताजनक ट्रेंड को देखते हुए सरकार ने इन 13 ज़िलों को टेस्टिंग बढ़ाने के साथ ही यह भी हिदायत दी है कि टेस्ट के नतीजों में देर न की जाए. कौन से हैं ये 13 ज़िले और कैसे महामारी यहां पांव पसार रही है?

    पहले इन शहरों के बारे में जान लीजिए और उसके बाद हम यहां महामारी के फैलाव को लेकर तमाम ज़रूरी जानकारियां भी बताएंगे. ये ज़िले हैं : असम में कामरूप मेट्रो, बिहार में पटना, झारखंड में रांची, केरल में अलप्पुझा और तिरुअनंतपुरम, ओडिशा में गंजम, उत्तर प्रदेश में लखनऊ, पश्चिम बंगाल में कोलकाता, मालदा, हुगली और नॉर्थ 24 परगना और दिल्ली.

    क्या कह रहे हैं केस फैटेलिटी रेट के आंकड़े?
    सोमवार शाम तक के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक देश भर में 44,386 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं और कुल संक्रमण केसों की संख्या 22 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है. कन्फर्म केसों के हिसाब से मौतें होने की दर यानी सीएफआर देश में 2.04% बताई गई है जबकि दिल्ली में यह रेट 2.8% है यानी देश के औसत से ज़्यादा. इससे पहले दिल्ली में सीएफआर 4.1% तक थी.

    कम टेस्ट होना भी चिंताजनक
    केंद्रीय सरकार के स्वास्थ्य विभाग में लगातार हो रही बैठकों में यह बात सामने आई कि इन 13 ज़िलों में देश भर के करीब 9% एक्टिव केस मौजूद हैं. जबकि देश में कोविड 19 से हो रही मौतों का 14% हिस्सा इन ज़िलों में है. रिपोर्ट के मुताबिक इन ज़िलों में प्रति दस लाख की आबादी पर देश के औसत से कम टेस्ट हो रहे हैं और टेस्ट में पॉज़िटिव केस आने की दर भी ज़्यादा है.

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    न्यूज़18 क्रिएटिव


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    एडमिट होने के 48 घंटों में मौत!
    केंद्र सरकार के मुताबिक कामरूप, लखनऊ, तिरुअनंतपुरम और अलप्पुझा में रोज़ाना आने वाले नए केसों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है. दूसरी तरफ केंद्र सरकार का यह भी कहना है कि कुछ इलाकों से ऐसी भी खबरें हैं कि कोविड 19 के मरीज़ों के कोविड केयर अस्पतालों में भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर मौत हो रही है. यहां मरीजों को समय से अस्पताल में भर्ती और रेफर किए जाने को लेकर निर्देश दिए गए हैं.

    फिर भी देश में कम है मृत्यु दर!
    हालांकि पिछले कुछ दिनों में कन्फर्म केसों की संख्या देश भर में तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन भारत में कोविड 19 से होने वाली मौतों की दर काफी कम देखी जा रही है. प्रति दस लाख की आबादी पर भारत में 30 मौतों का आंकड़ा है जबकि दुनिया भर में यह औसत 91 मौतों का है. सबसे ज़्यादा मौतों का औसत यूनाइटेड किंगडम में है यानी प्रति दस लाख आबादी पर 684 मौतें. इसके बाद अमेरिका में 475 मौतों का औसत सबसे बड़ा है.

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    इस संदर्भ में बीते शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने चार राज्यों गुजरात, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक के 16 अन्य ज़िलों को हिदायतें इसलिए दी थीं क्योंकि यहां देश और राज्यों के औसत से ज़्यादा कोविड 19 मृत्यु दर देखी गई.

    क्या हो सकती है मौतें बढ़ने की वजह?
    बेंगलूरु के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस के संक्रामक रोग रिसर्च में असोसिएट प्रोफेसर अमित सिंह के हवाले से खबरों में कहा गया कि सामान्य सर्दी की शिकायत पैदा करने के लिए चार और तरह के कोरोना वायरस भी ज़िम्मेदार होते हैं. हो सकता है कि कोविड 19 के कारण कोरोना वायरस को इन वायरसों के साथ कन्फ्यूज़ किया गया हो.

    एक आशंका यह भी हो सकती है कि कोविड के ज़्यादातर मरीज़ों को इलाज के लिए बीसीजी का टीका दिया गया. हालांकि यह विवादास्पद विषय है लेकिन सिंह मानते हैं कि संभव है कि स्टडीज़ बताएं कि कोविड 19 के खिलाफ इस वैक्सीन से टी-कोशिकाओं वाली इम्युनिटी वाकई कारगर साबित हुई या नहीं.

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