कौन है ये 9 साल की एक्टिविस्ट, जो नीट व जेईई एग्ज़ाम के विरोध में डटी है

कौन है ये 9 साल की एक्टिविस्ट, जो नीट व जेईई एग्ज़ाम के विरोध में डटी है
9 वर्षीय एक्टिविस्ट लिसीप्रिया.

मणिपुर (Manipur) की मूल निवासी इस नन्ही सी एक्टिविस्ट का कहना है कि एक तो Covid-19, 11 राज्यों में तेज़ी से केसों के बढ़ने, कई राज्यों में बाढ़ के हालात होने के चलते छात्र इम्तिहानों में कैसे शामिल होंगे और कितने तैयार होंगे. ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) समेत दुनिया के एक्टिविस्टों का सपोर्ट जुटाने वाली इस बच्ची के बारे में जानिए.

  • News18India
  • Last Updated: August 30, 2020, 6:37 PM IST
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लिसीप्रिया कंगुजम (Licypriya Kangujam) की उम्र सिर्फ 9 साल है. उसे अभी करीब 10 साल हैं, कॉलेज पहुंचने के लिए, फिर भी वो NEET और JEE परीक्षाएं टालने के लिए मांग कर रही है. इस नन्ही सी एक्टिविस्ट (Climate Change Activist) का कहना है कि अगर इस साल वो इन परीक्षाओं (Examinations) के लिए प्रतिस्पर्धी होती, तो वह परीक्षा देने के लिए किसी सेंटर पर जाने से अपने घर पर ही रहना ज़्यादा सही समझती.

जबसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तय समय पर मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाएं आयोजित करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सहमति मिली है, तबसे देश भर में सड़कों से लेकर सोशल ​मीडिया तक छात्र और अन्य लोग आवाज़ उठा रहे हैं. परीक्षाएं न आयोजित किए जाने के समर्थन में जो आवाज़ें उठ रही हैं, उनमें लिसीप्रिया भी शामिल है, जिसे ट्विटर पर 78 हज़ार से ज़्यादा लोग फॉलो करते हैं. इस नन्ही सी एक्टिविस्ट के बारे में जानने लायक बहुत कुछ है.

लिसीप्रिया के ट्वीट्स और उनका असर
देश में कोविड 19 के फैलने के दौरान होने जा रहीं परीक्षाओं को टालने के लिए लिसीप्रिया ने दिन ब दिन अपने ट्वीट्स तेज़ कर दिए हैं. लिसीप्रिया के ट्वीट्स का असर ये है कि उनके कई साथी क्लाइमेट एक्टिविस्ट इस मुद्दे पर ट्वीट कर रहे हैं. यहां तक कि पिछले साल क्लाइमेट चेंज के ग्लोबल मंच से चर्चित हुईं ग्रेटा थनबर्ग ने भी NEET और JEE को टालने के लिए ट्वीट किया.
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ग्रेटा थनबर्ग के साथ लि​सीप्रिया.




ग्रेटा के अलावा कई देशों में एक्टिविज़्म से जुड़े कई छात्र इस मुहिम से जुड़े हैं और न्यूयॉर्क के दो किशोर एक्टिविस्टों ने तो संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के आगे विरोध प्रदर्शन करते हुए भारत में परीक्षाओं के इस मुद्दे को उठाया.

ग्रेटा और लिसीप्रिया
क्लाइमेट एक्टिविस्ट लिसीप्रिया की मानें तो चूंकि यह मुद्दा लाखों छात्रों के भविष्य और जीवन से जुड़ा है इसलिए दुनिया भर में मुद्दा बन चुका है. एडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक लिसीप्रिया ने बताया कि दुनिया भर में कम उम्र के लाखों एक्टिविस्ट हैं, जो क्लाइमेट जस्टिस के लिए पहले ही लड़ रहे हैं. स्वीडन की ग्रेटा, यूगांडा की वेनेसा नकैट, जर्मनी की लुइसा न्यूबॉर जैसे हज़ारों एक्टिविस्टों ने भारतीय छात्रों से जुड़े इस मुद्दे को उठाया है.

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लिसीप्रिया की मानें तो इन सभी को उसने ही भारत में परीक्षाओं और छात्रों के ​जोखिम के संबंध में दुनिया भर के इन एक्टिविस्टों को पूरी स्थिति बताई, जिसके बाद इन सभी ने इस मामले में न्याय होने तक लड़ने के लिए रज़ामंदी ज़ाहिर की.

क्यों और कैसे इस मुहिम से जुड़ी लिसीप्रिया?
चूंकि लिसीप्रिया ट्विटर सहित सोशल मीडिया पर खासी मौजूदगी रखती हैं और दुनिया भर में उनके संपर्क हैं इसलिए छात्रों ने उनसे संपर्क कर अपनी बात उठाने को कहा था. एडेक्स की रिपोर्ट कहती है कि पहले लिसीप्रिया इस मामले में एक्टिव नहीं थीं, लेकिन कई छात्रों ने उनसे संपर्क कर उन्हें जोखिम भरी स्थिति से अवगत कराते हुए मदद के लिए अपील की थी.

इसके बाद लिसीप्रिया ने इस मुहिम के समर्थन में ट्वीट करने शुरू किए. लिसीप्रिया के मुताबिक एक तो ये छात्र ट्विटर पर पहले पहल सक्रिय हुए थे और दूसरी तरफ हमारे नेता लाखों छात्रों की आवाज़ नहीं सुन रहे थे इसलिए उन्होंने मदद करने का फैसला किया. अब इस नन्ही सी एक्टिविस्ट के बारे में कुछ चौंकाने वाले फैक्ट्स जानिए.

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टीम लिसिप्रिया लगातार परीक्षाओं के मुद्दे पर ट्वीट कर रही है.


कैसे चर्चा में आई लिसीप्रिया?
जून 2019 में लिसीप्रिया ने संसद भवन के सामने पीएम नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए भारत में क्लाइमेट चेंज संबंधी कानून बनाने के लिए प्रदर्शन किया था. इसके बाद लिसीप्रिया ने सोशल मीडिया पर क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर कई पोस्ट करने शुरू किए. देखते ही देखते वह काफी लो​कप्रिय हो गई. हालांकि कुछ रिपोर्ट्स लिसीप्रिया के कुछ दावों पर सवाल खड़े करती हैं. लिसीप्रिया के कुछ कारनामे पॉइंट्स में जानें.

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* लिसीप्रिया ने 2018 में मंगोलिया में यूएन कॉन्फ्रेंस अटेंड की थी, यहां से उन्हें क्लाइमेट ​एक्टिविज़्म की प्रेरणा मिली.
* लिसीप्रिया ने 'चाइल्ड मूवमेंट' नाम की एक संस्था शुरू की है, जो बाल एक्टिविस्ट तैयार करती है.
* अगस्त 2018 में लि​सीप्रिया ने अपनी गुल्लक से 1 लाख रुपये की मदद केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी थी.
* क्लाइमेट चेंज कानून की मांग के लिए लिसीप्रिया ने ग्रेट अक्टूबर मार्च 2019 के तहत हज़ारों समर्थकों के साथ इंडिया गेट तक जुलूस निकाला था.
* 196 देशों में 26 हज़ार लोगों की मौजूदगी में संयुक्त राष्ट्र के कॉप25 सम्मेलन में क्लाइमेट चेंज पर लिसीप्रिया ने वक्तव्य दिया था.
* इसी साल ग्रेटा और लुइसा जैसे एक्टिविस्टों के साथ वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में लिसीप्रिया ने भी अपना लेटर प्रस्तुत किया था.

इन तमाम गतिविधियों के साथ ही, लिसीप्रिया स्कूल शिक्षा में क्लाइमेट चेंज संबंधी पाठों को शामिल करने के अभियान में भी शामिल रहीं. लिसीप्रिया के इस अभियान के चलते गुजरात सरकार ने स्कूल शिक्षा में क्लाइमेट चेंज को शामिल किया.
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