कौन था अलकायदा का चीफ नंबर 2, जो ईरान में मारा गया!

अलकायदा का नंबर 2 कहा जाने वाला अबू मोहम्मद अल मसरी.
अलकायदा का नंबर 2 कहा जाने वाला अबू मोहम्मद अल मसरी.

अयमान अल जवाहिरी (Ayman Al-Jawahiri) के बाद गद्दी का वारिस था अबू मोहम्मद उर्फ मसरी, जिसके मारे जाने के दावे किए गए हैं. कितना खतरनाक, असरदार था मसरी और ये भी ​जानिए कि बिखर रहे आतंकी संगठन का भविष्य (Future of Al-Qaeda) क्या होगा?

  • News18India
  • Last Updated: November 17, 2020, 2:38 PM IST
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अमेरिकी मीडिया (US Media) में दावा किया गया ​कि ईरानी आर्मी (Iranian Army) और इंटेलिजेंस सर्विस की कस्टडी में रह रहा आतंकी अबू मोहम्मद अल मसरी को इज़राइली फोर्स (Israeli Operatives) ने मार गिराया. इस खबर के बाद से अचानक अलकायदा और मसरी को लेकर कई तरह की चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है और यह भी पूछा जा रहा है कि अब अलकायदा में भविष्य या फिर मसरी का विकल्प क्या होगा. अल कायदा में नंबर 2 कहे जाने वाले इस आतंकी मसरी के बारे में आप क्या जानते हैं? वो ईरान में क्यों था और अब उसकी जगह कौन लेगा?

इन सब सवालों से पहले आपको बता दें कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने बीते शनिवार मसरी के मारे जाने का दावा करते हुए कहा कि ईरानी आर्मी की खास यूनिट इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने उसे 'सुरक्षा' दी थी. तेहरान में इज़राइली सैन्य जासूसों की नज़र में आने के बाद इस साल अगस्त में इज़रायली फोर्स ने अमेरिका के इशारे पर उसका खात्मा कर दिया. हालांकि ईरान ने दावे से इनकार किया. फिलहाल आपको मसरी के बारे में बताते हैं.

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कौन था अलकायदा का मसरी?
अब्दुल्ला अहमद अब्दुल्ला के नाम से भी मशहूर मसरी अलकायदा का उन संस्थापकों में था, जो इजिप्ट का था. आतंकी गतिविधियों के जानकारों के मुताबिक आतंकी संगठन के टॉप लीडर अयमान अल जवाहिरी के बाद मसरी ही संगठन की कमान संभालने का उत्तराधिकारी होता. असल में, ईरान के एक राजनयिक को अलकायदा ने किडनैप किया था और इसके एवज़ अलकायदा के पांच आतंकियों को ईरान की कैद से छुड़ाया था, जिनमें मसरी भी शामिल था.

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ईरान ने खंडन किया कि तेहरान में अलकायदा का कोई सदस्य मार गिराया गया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


ईरान की कस्टडी में होने के बावजूद खबर में दावा किया गया कि मसरी अफगानिस्तान, सीरिया और पाकिस्तान की यात्रा करने के लिए आज़ाद था. अमेरिका के दस्तावेज़ों में मसरी का रिकॉर्ड काफी पहले से दर्ज है, जब वो अपनी नौजवानी की उम्र में था और सोवियत के खिलाफ उसने ओसामा बिन लादेन के सिपाही के तौर पर अफगानिस्तान की यात्रा की थी.

साल 1989-90 में जब सोवियत ढह गया था, तब इजिप्ट ने अपने उन नागरिकों की वापसी पर रोक लगा दी, जिन्होंने जिहाद में हिस्सा लिया था. उस वक्त मसरी को अपने कई साथियों के साथ अफगानिस्तान में ही रहना पड़ा. अलकायदा के 170 चार्टर सदस्यों की सूची में मसरी का नाम शुमार रहा और अफगानिस्तान में संगठन के टॉप सदस्यों में वह 7वां भी रहा था.


इसके बाद मसरी लादेन के साथ 1990 के दशक में सूडान चला गया था और फिर उसने सोमालिया के सिविल वॉर में हिस्सा लिया. लादेन के करीबियों में शुमार किया जाता रहा मसरी कुछ खास आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड रहा था. केन्या और तंज़ानिया में अमेरिकी दूतावासों पर 1998 में जो बम विस्फोट हुए थे (जिनमें 200 से ज़्यादा लोग मारे गए थे), उसका मास्टरमाइंड मसरी ही कहा जाता रहा.

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ईरान में क्या कर रहा था मसरी?
मसरी के मारे जाने के दावों का खंडन करते हुए ईरान ने साफ कहा कि तेहरान में अलकायदा का कोई सदस्य नहीं मारा गया और अमेरिका व इज़राइल का 'हॉलीवुड फिल्म' जैसा यह कथानक कोरी कल्पना है. ईरान के दावे एक तरफ, लेकिन अगर एनवायटी के दावे को सही माना जाए तो यह सवाल जायज़ है कि मसरी ईरान में था ही क्यों? जबकि अलकायदा के संबंध ईरान के साथ काफी उलझे हुए रहे हैं.

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जवाहिरी के बाद अलकायदा के वारिस की तलाश जारी है.


एफबीआई के पूर्व एजेंट अबू सूफान के मुताबिक 9/11 के हमले के बाद अलकायदा के कई जिहादी पाकिस्तान और ईरान बॉर्डर की तरफ भागे थे. मसरी ईरान जाने वालों में से था. अमेरिका के साथ खुद को दर्शाने के लिए ईरान ने कुछ आतंकियों को पकड़कर अमेरिका को सौंपा भी था, लेकिन कुछ को अपनी कस्टडी में ही रख लिया था. इनमें से कई आतंकी समय समय पर छूटते रहे या मारे जाते रहे.

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साल 2018 में अमेरिका ने दूतावास हमले की याद में इसके दोषियों के बारे में सही जानकारी देने वाले को दिए जाने वाले ईनाम की रकम 50 लाख से 1 करोड़ डॉलर कर दी थी. दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद की कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि मसरी और जवाहिरी का एक और अहम सिपेहसालार सैफ अल अद्ल ईरान में हैं और वहीं से सीरिया के अलकायदा लड़ाकों के विवादों को सुलझा रहे हैं.

कौन है मसरी का विकल्प?
अगर सचमुच मसरी मारा जा चुका है तो सैफ अल अद्ल उसकी जगह लेगा. चूंकि जवाहिरी बूढ़ा हो चुका है और उसकी सेहत भी ठीक नहीं है इसलिए निकट भविष्य में अलकायदा का चीफ अद्ल हो सकता है. मसरी के बराबर अद्ल की रैंक थी, लेकिन उसका दबदबा कितना है, इसे लेकर अभी ठीक जानकारियां नहीं हैं. गौरतलब है कि अलकायदा संगठन पहले की तरह मज़बूत नहीं रहा है और इसके लड़ाके खुदमुख्तार होते जा रहे हैं.
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