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क्या हैं अमेरिका की वो रहस्यमयी बॉयो लैब्स, जिन पर चीन और रूस ने उठाए सवाल

News18India
Updated: May 18, 2020, 8:04 PM IST
क्या हैं अमेरिका की वो रहस्यमयी बॉयो लैब्स, जिन पर चीन और रूस ने उठाए सवाल
दुनिया में कम से कम अमेरिका की 25 बायो लैब्स हैं.

जिसका दांव उसी पर धरना... जी हां अमेरिका (USA) और चीन (China) के बीच चल रहे विवाद में यही कहावत सिद्ध हो रही है. चीन की वुहान लैब (Wuhan Lab) से कोरोना वायरस (Corona Virus) पैदा होने के आरोप लगाने वाले अमेरिका को रूस (Russia) के साथ मिलकर चीन ने घेरने की कवायद शुरू कर दी है. जानिए क्या है लैब्स का सच और कैसे घिर सकता है अमेरिका.

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पलटवार. जी हां. अब तक अमेरिका (America) और उसके समर्थक चीन की वुहान लैब से Covid 19 शुरू होने का आरोप लगा रहे थे, अब यही दांव उल्टा पड़ा है, जिसने अमेरिका को परेशानी में डाल दिया है. चीन और रूस (China & Russia) ने अब अमेरिका की बायो लैब्स (Biological Research lab) पर सवाल खड़े करते हुए आशंका जताई है कि इन्हीं लैब्स में कोरोना वायरस (Corona Virus) पैदा हुआ. दांव के साथ ही ज़ुबान भी वही इस्तेमाल की जा रही है जो अब तक अमेरिका बोल रहा था.

अमेरिकी बायो लैब्स कितनी दोषी और कितनी पाक साफ हैं, इसे लेकर चीन और रूस जांच करेंगे और चीन ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को इन लैब्स को लेकर जवाबदेही रखना होगी. साथ ही, चीन उन देशों के खिलाफ कानूनी मुकदमे दायर करने की धमकी दे रहा है, जो चीन से ज़्यादा सवाल-जवाब कर रहे हैं. चीन व रूस के दावे के साथ ही आरोपों से घिरीं अमेरिकी बायो लैब्स के बारे में भी जानिए.

किस तरह घिर सकता है अमेरिका?
चीन और रूस संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में अमेरिका को घेरने की तैयारी में हैं. ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि दोनों देश अमेरिका की उन सभी पी3 और पी4 लैब्स के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय जांच की मांग कर सकते हैं, जो दुनिया भर में सक्रिय हैं. दूसरी ओर, चीनी विश्लेषकों ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के युद्धविरोधी समूहों और मीडिया ने भी अमेरिका से बायो लैब्स को लेकर पारदर्शी होने की मांग की है.



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दुनिया भर में अमेरिकी बायो लैब्स के नक्शे की यह तस्वीर पिन्ट्रेस्ट पर सुरक्षित है.




अगर यूएन की सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन और रूस अमेरिका की इन प्रयोगशालाओं के खिलाफ जांच का प्रस्ताव रखते हैं तो जीटी की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका को छोड़कर लगभग सभी देश इसका समर्थन कर सकते हैं. ऐसे में अमेरिका को शर्मिंदगी भी झेलना पड़ सकती है.

रूस के विदेश मंत्री सर्जी लैवरॉव के हवाले से कहा गया कि अमेरिका की ओवरसीज़ बायो लैब्स का मकसद समझ पाना मुश्किल हो रहा है और यहां जिस तरह का ज़हर जमा किया जा रहा है, इस पर शक ही किया जा सकता है. वहीं चीनी मीडिया ने रिपोर्ट किया कि अमेरिका की ये बायो लैब्स रूस की सीमाओं से सटी हुई हैं और चीन की सीमाओं के भी करीब हैं.

'अमेरिका छुपा रहा है जैविक हथियार'
चीन के मिलिट्री विशेषज्ञ सॉंग झॉंगपिंग के हवाले से चीन के सरकारी मीडिया की रिपोर्ट कहती है कि रूस ने यूक्रेन और जॉर्जिया में स्थित अमेरिका की इन लैब्स को लेकर हमेशा चिंता जताई है और अमेरिका ने कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया. कारण साफ है - अमेरिका अपने जैविक हथियारों का कार्यक्रम छुपा रहा है. साथ ही, सॉंग ने यह आरोप भी लगाया कि अमेरिका के पास बेहद एडवांस जैविक और केमिकल ​हथियार बनाने की क्षमता है और वह पहले भी इस क्षमता का इस्तेमाल वियतनाम में कर चुका है इसलिए अब चिंता जायज़ है.

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अमेरिका की एनबीएएफ बायो लैब रोगाणुओं पर रिसर्च के लिए चर्चित रही है.


दूसरी ओर, रूस के विदेश मंत्री ने कहा है कि 'पिछले करीब 20 सालों से, रूस और चीन समेत कई देश यह मांग करते रहे हैं कि जैविक हथियारों का उत्पादन न किए जाने की प्रतिबद्धताओं को चेक किए जाने संबंधी प्रोटोकॉल और एक पूरी व्यवस्था होनी चाहिए.

कैसे शुरू हुआ ये पूरा सिलसिला?
अस्ल में, अमेरिका को बायो लैब्स के मुद्दे पर घेरने के इस पूरे अभियान की शुरूआत रूस के क्रेमलिन मीडिया की रिपोर्ट्स से हुई. क्रेमलिन मीडिया स्वाइन फ्लू से इबोला और अब कोविड 19 के साथ इन अमेरिकी लैब्स के संबंध को जोड़ने की कोशिशें हमेशा करता रहा है. इस बार रूस की इस कोशिश को ईरान ने भी साथ दिया और चीन ने भी इस नैरेटिव के साथ जुड़कर अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

कहां और कैसी हैं अमेरिकी बायो लैब्स?
दुनिया भर में कम से कम 25 देशों में अमेरिका इस तरह की जैविक लैब्स का संचालन करता है. ईरान प्रैस की एक रिपोर्ट कहती है कि रूस, एशिया और अफ्रीका के इर्द गिर्द सोवियत यूनियन के पूर्व हिस्सों में अमेरिका ने ये लैब्स बनाई हैं. ज़्यादातर लैब्स रूस, चीन और ईरान के इर्द गिर्द रणनीतिक रूप से स्थापित हैं. इन लैब्स के ज़रिये अमेरिकी सेना घातक वायरस और बैक्टीरिया का इस्तेमाल दुश्मनों के खिलाफ करती रही है.

ईरान प्रैस ने यह भी कहा है कि अमेरिका ने माइक्रोबायोलॉ​जिकल ​हथियारों की रोकथाम के प्रोटोकॉल से इनकार कर दिया था. अमेरिका के इरादों पर सवाल खड़े करना जायज़ है.

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ईरान प्रैस ने अमेरिका की बायो लैब्स पर संदेह जताती रिपोर्ट जारी की.


क्या बड़ा खतरा हैं अमेरिकी लैब्स?
'द रिस्क ऑफ बिल्डिंग टू मैनी लैब्स' शीर्षक से लेख में न्यूयॉर्कर ने ​सवाल उठाया है कि अमेरिका की एनबीएएफ जैसी लैब्स ज़रूरी तो हैं लेकिन ऐसी कितनी लैब्स की ज़रूरत है? रोगाणुओं को कम करने के बारे में रिसर्च कर रहीं ये लैब्स अगर इतनी संख्या में होंगी तो रोगाणुओं का खतरा और बढ़ेगा ही. 2016 में कई विशेषज्ञों ने एक पेपर में कहा था कि इतनी लैब्स और वैज्ञानिक नाटकीय रूप से बढ़े हैं कि कई तरह के खतरे बढ़ गए हैं.

लेख के मुताबिक चूंकि इस तरह की फैलती हुई अमेरिकी रिसर्च में अमेरिका के रक्षा विभाग का फंड है, इसलिए दूसरे देश यह शक और चिंता करते हैं कि ये लैब्स जैविक ​हथियारों को ढांकने और बायो डिफेंस हथियारों की दौड़ का सिलसिला ही है.

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First published: May 18, 2020, 8:04 PM IST
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