वो ऐतिहासिक ज़मीन, जहां कोई आता-जाता नहीं! विश्व धरोहर बनने के बाद क्या दिन फिरेंगे?

अज़रबेजान के बाकू में चल रहे यूनेस्को सम्मेलन में विश्व धरोहरों का चयन जारी है. जयपुर के अलावा और किन स्थलों को विश्व धरोहर घोषित किया गया है? उस सदियों पुराने शहर के बारे में जानें, जिसे हेरिटेज घोषित करवाने के लिए तीन दशकों से कोशिश हो रही थी.

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Updated: July 7, 2019, 3:51 PM IST
वो ऐतिहासिक ज़मीन, जहां कोई आता-जाता नहीं! विश्व धरोहर बनने के बाद क्या दिन फिरेंगे?
सद्दाम हुसैन के समर पैलेस से बेबीलॉन के अवशेषों का विहंगम दृश्य.
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Updated: July 7, 2019, 3:51 PM IST
एक ऐसी ज़मीन, जो सदियों की सभ्यता की निशानी है. आधुनिक दुनिया में प्राचीन इतिहास के न जाने कितने अध्याय अपने आप में समेटे हुए है. जिस ज़मीन को वहां बसने वालों ने तो बर्बाद किया ही, दुनिया के कई लोगों ने लूटा. जैसे तैसे अपने अस्तित्व को बचाए रख पाने का संघर्ष कर रही, ये ज़मीन अब जाकर विश्व धरोहर की सूची में शामिल हो सकी है. हालांकि इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की कोशिश पिछले करीब 35 सालों से की जा रही थी. जानें क्या है इस धरोहर की हालत और क्या होगा अब बदलाव.

पढ़ें : कैसे मिलता है विश्व धरोहर का दर्जा? जानें जयपुर क्यों बना वर्ल्ड हेरिटेज

यूनेस्को अब जाकर जागा तो उसे सुध आई कि इराक के बेबीलॉन का महत्व क्या है. यहां 4 हज़ार सालों से भी ज़्यादा पुरानी सभ्यता के सबूत मिले भी दो सदियों से ज़्यादा का वक़्त गुज़र चुका, इसके बावजूद अब तक झूलते बगीचों के लिए कभी अजूबों में शुमार रहे बेबीलॉन को विश्व धरोहर का दर्जा नहीं दिया गया था. इराक 1983 से ज़ोर लगा रहा था कि यूनेस्को पर दबाव बना सके और इस शहर को बचाने के लिए इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल करा सके.

अज़रबेजान के बाकू में जारी यूनेस्को सम्मेलन में इराक ने इस बार कहा 'विश्व धरोहर सूची में अगर बेबीलॉन नहीं है तो ये सूची किस मतलब की है? मानवता का इतिहास कैसे बताया जाएगा, अगर बेबीलॉन यानी सबसे पुराने अध्याय का ही ज़िक्र न हो?' इस बयान में नाराज़गी और मायूसी दोनों साफ ज़ाहिर थीं और यह भी ज़ाहिर था कि बेबीलॉन किस कदर उपेक्षा का शिकार रहा. आइए जानें क्या है बेबीलॉन और क्या है इसका महत्व.

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1932 में लिया गया बेबीलॉन के अवशेषों का चित्र.


मेसोपोटामिया सभ्यता थी यहां
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वर्तमान इराक में स्थित बेबीलॉन शहर मेसोपोटामिया सभ्यता की जीती जागती निशानी है, जो ईसा पूर्व 18वीं सदी से ईसा पूर्व छठी सदी के बीच अपने शबाब पर रही थी. इतिहासकार मानते हैं कि सभ्यताओं के इतिहास में ये पहला शहर था, जिसकी आबादी 2 लाख के पार पहुंची थी. वर्तमान में बगदाद से करीब 85 किलोमीटर दूर इस सभ्यता के अवशेषों के तौर पर बेबीलॉन शहर है. इस सभ्यता का उल्लेख कई शिलालेखों और महत्वपूर्ण ग्रंथों के साथ ही बाइबल में भी मिलता है.

सांस्कृतिक व ऐतिहासिक महत्व
बेबीलॉन एक ऐसी सभ्यता रही, जिसमें कई सल्तनतों का इतिहास दर्ज हुआ और साथ ही कई युद्ध और संघर्ष भी हुए. मेसोपोटामिया सभ्यता के पतन के समय रोमन सभ्यता के उदय का ज़िक्र भी मिलता है. मिस्र, यूनान और वर्तमान ओटोमान संस्कृति में आज भी बेबीलॉन के सूत्र मिलते हैं. दुनिया की बेहद प्राचीन सभ्यताओं में शुमार बेबीलॉन को इराक में स्थित पुरातात्विक महत्व के करीब 7000 स्थलों में अव्वल और कई धरोहरों का समागम स्थल माना जाता है.

ये है बदहाली की दास्तान
मेसोपोटामिया सभ्यता में लूट का लंबा इतिहास रहा है, लेकिन आधुनिक समय की बात की जाए तो भी यहां बर्बादी कम नहीं हुई. सद्दाम हुसैन के समय में बेबीलॉन के महत्व को एक तरह से दरकिनार कर इसे बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई. इस शहर पर अतिक्रमण कर प्रॉपर्टी बनाने की कोशिशें हुईं. इसके बाद यहां आतंकवादियों का साया पड़ा. आईएसआईएस और आईएसआईएल जैसे उग्रवादी संगठनों ने इस ऐतिहासिक स्थल को तोड़ने, फोड़ने और विस्फोट करने का काम किया.

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साल 2005 में अमेरिकी सैनिकों के टूर के दौरान बेबीलॉन के अवशेषों की तस्वीर. सभी चित्र : विकिपीडिया


फिर इराक युद्ध के दौरान और उसके बाद यानी 2003 के बाद से अमेरिकियों ने भी यहां वैभव की निशानियों को लूटा. ब्रिटिश म्यूज़ियम की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि इस घुसपैठ से प्राचीन शहर के अवशेषों को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ.

पर्यटन को अब है उम्मीद
लूटों और आतंक के चलते आलम ये हो गया कि पिछले एक दशक से ज़्यादा समय से यहां पर्यटक नहीं आते. इस जगह को खतरनाक समझा जाता है. दूसरी ओर, इसका ठीक तरह से संरक्षण न होने के कारण कई अवशेष जीर्ण शीर्ण हो रहे हैं. दो दिन पहले यूनेस्को सम्मेलन में अब इस शहर को विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया है, तो इसके बाद इराक को बेबीलॉन के संरक्षण की उम्मीद के साथ यह भी अपेक्षा है कि अब यहां पर्यटक भी आ सकेंगे.

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First published: July 7, 2019, 3:51 PM IST
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