तीन कोरोना वैक्सीन दौड़ में सबसे आगे, कौन सी वैक्सीन कब हो सकती है लॉंच?

तीन कोरोना वैक्सीन दौड़ में सबसे आगे, कौन सी वैक्सीन कब हो सकती है लॉंच?
दुनिया में करीब 20 वैक्सीनों के ह्यूमन ट्रायल जारी हैं.

दुनिया भर में कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रकोप के बीच वैक्सीन तैयार करने (Vaccine Development) और लॉंच करने की होड़ भी जारी है. कई देशों में विकसित की जा रहीं संभावित वैक्सीनों के परीक्षण तेज़ी से करवाए जा रहे हैं ताकि वैक्सीन लॉंचिंग में बाज़ी मारी जा सके. भारत भी इस रेस में शुमार है. जानिए कौन से संभावित टीके इस दौड़ में लगातार चर्चाओं में हैं.

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रूस, यूनाइटेड किंगडम (UK) या भारत? कौन कोरोना वैक्सीन लॉंच करने में बाज़ी मार सकता है? सवाल ये भी है कि क्या अमेरिका (US) या चीन भी Covid-19 वैक्सीन विकास की दौड़ में काफी आगे तक पहुंच चुके हैं? अस्ल में, विशेषज्ञों के हवाले से बार बार बताया जा चुका है कि वैक्सीन का विकास एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें समय लगता है. लेकिन चूंकि दुनिया कोरोना के कहर (Coronavirus Pandemic) से त्रस्त है और कई वैक्सीनों की प्रक्रिया जारी है, ऐसे में एंटी कोविड वैक्सीन (Coronavirus Covid Vaccine) को लेकर तेज़ी और बेसब्री का माहौल है.

दुनिया भर में 160 से ज़्यादा संभावित एंटी कोरोना वायरस वैक्सीनों के परीक्षण विकास के अलग अलग चरणों में हैं. इनमें से करीब 26 संभावित वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल के फेज़ में पहुंच चुकी हैं. इनमें से तीन वैक्सीन लगातार चर्चा में बनी हुई हैं क्योंकि ये तीनों ही ह्यूमन ट्रायल के अंतिम चरणों तक पहुंच रही हैं और अब तक के नतीजे सकारात्मक मिले हैं. इन तीनों वैक्सीनों के बारे में आपको जानना चाहिए कि कौन सी सुरक्षित है, ट्रायल के किस फेज़ में है और कब तक लॉंच की जा सकती है.

रूस : क्या अगस्त तक आ जाएगी ये वैक्सीन?
रूस के दावों की मानें तो अगस्त में 'दुनिया की पहली एंटी कोरोना वायरस वैक्सीन' तैयार हो जाएगी. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक रूस के राजनीतिक और व्यापारिक व्यक्तित्वों को प्रयोगों के दौर में चल रही वैक्सीन का एक्सेस दिया गया है. इस वैक्सीन को माइक्रोबॉयोलॉजी का गैमैलेया रिसर्च इंस्टिट्यूट विकसित कर रहा है और इसकी फंडिंग सरकारी संस्था रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड कर रही है.
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रूस में विकसित हो रही वैक्सीन को लगभग तैयार बताया जा रहा है.


7 लाख से ज़्यादा कन्फर्म केसों के साथ कोरोना वायरस से दुनिया के चौथे सबसे ज़्यादा प्रभावित देश रूस में इस वैक्सीन के ट्रायल एडवांस स्टेज में पहुंच गए हैं. रूस के महामारी विशेषज्ञों की तरफ से कहा गया है कि वैक्सीन के फेज़ III ट्रायल जारी रहते हुए अगले महीने तक इस वैक्सीन को बाज़ार में उतारा जा सकता है.

इस वैक्सीन को लेकर कोई नतीजा प्रकाशित नहीं हुआ है लेकिन रूसी शोधकर्ता दावा कर रहे हैं कि यह सुरक्षित और भरोसेमंद है. कम से कम 5 देश इस वैक्सीन के उत्पादन में दिलचस्पी ज़ाहिर कर चुके हैं और रूस में इस साल के आखिर तक इसके दो करोड़ डोज़ का उत्पादन कर लिये जाने की उम्मीदें जताई गई हैं.

यूके : 'सेफ और इम्युनोजेनिक है वैक्सीन'
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राज़ेनेका कंपनी मिलकर इस संभावित वैक्सीन को विकसित कर रहे हैं. 20 जुलाई को यूके बेस्ड मेडिकल पत्र द लैंसेट में इस वैक्सीन के 1/2 ट्रायल के नतीजे प्र​काशित हुए, जिनमें इस वैक्सीन को 'सुरक्षित, ठीक से सहनीय और इम्युनिटी बढ़ाने वाली' बताया गया. इस वैक्सीन का भारत कनेक्शन ज़बरदस्त है यानी ये वैक्सीन भारत के लिए बड़ी मददगार साबित हो सकती है.

अव्वल तो पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट इस वैक्सीन के उत्पादन में पार्टनर के तौर पर शामिल है. इस वैक्सीन के लिए दुनिया भर में नौ कंपनियों के साथ करार हुए हैं और अप्रूवल मिलते ही इसके 2 अरब डोज़ के उत्पादन किए जाने की खबरें हैं. सीरम इस वैक्सीन के भारत में ट्रायल के लिए लाइसेंस लेने की प्रक्रिया भी पूरी करने जा रहा है. अगले हफ्ते तक भारत में इसके ट्रायल शुरू हो सकते हैं.

इस वैक्सीन के बाज़ार में आने के मामले में अब तक रिपोर्ट्स कह रही हैं कि यह ट्रायल की प्रक्रिया पूरी करने के बाद इस साल के आखिर तक सबके लिए उपलब्ध हो सकती है.

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भारत की पहली संभावित एंटी कोविड वैक्सीन को कोवैक्सिन नाम से जाना जा रहा है.


भारत : क्या पीएम करेंगे 15 अगस्त को लॉंचिंग?
हालांकि भारत की शीर्ष मेडिकल रिसर्च संस्था आईसीएमआर ने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के चलते कोवैक्सिन नामक एंटी कोविड वैक्सीन की लॉंचिंग 15 अगस्त घोषित कर दी थी. खबरों में ये भी कहा गया था कि पीएम नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस के भाषण में वैक्सीन लॉंचिंग की घोषणा कर सकते हैं. लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो भारत में विकसित हो रही इस वैक्सीन को अभी लंबा सफर तय करना है.

आईसीएमआर के साथ ही, भारत बायोटेक और पुणे स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी इस वैक्सीन के विकास में शामिल हैं. इसके क्लीनिकल ट्रायल एम्स पटना और पीजीआई रोहतक में शुरू हो चुके हैं, जबकि एम्स दिल्ली, रेडकर अस्पताल गोवा, भुबनेश्वर की संस्थाओं सहित विशाखापट्टनम, बेलगाम, नागपुर, गोरखपुर, कानपुर, हैदराबाद, आर्यनगर और कट्टनकुलातूर आदि स्थानों पर इसके ह्यूमन ट्रायल शुरू होने हैं.

कोवैक्सिन के क्लीनिकल ट्रायल के संबंध में कहा गया है कि शुरूआती ट्रायल में ये वैक्सीन सुरक्षित पाई गई है. एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने हाल में कहा कि यह वैक्सीन कब तक आएगी, इसकी तारीख बताना मुश्किल है लेकिन सब कुछ आदर्श रूप में हुआ तो साल के आखिर तक या 2021 की शुरूआत में यह वैक्सीन तैयार होगी.

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कुछ और संभावित वैक्सीन भी हैं दौड़ में
अमेरिका बेस्ड मॉडर्ना द्वारा डेवलप की जा रही वैक्सीन के शुरूआती नतीजे काफी सकारात्मक रहे. 27 जुलाई से करीब 30 हज़ार प्रतिभागियों पर इस वैक्सीन के तीसरे फेज़ का ट्रायल शुरू होगा. यह अस्ल में, दुनिया की पहली एंटी कोविड वैक्सीन थी, जिसके ह्यूमन ट्रायल मार्च में शुरू हुए थे. दूसरी तरफ, चीन में एक संभावित वैक्सीन के दूसरे फेज़ के ह्यूमन ट्रायल हो चुके हैं और इसके नतीजे भी सकारात्मक बताए गए हैं.

कुल मिलाकर वैक्सीन की दौड़ में WHO ने माना है कि 20 से ज़्यादा संभावित वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल फेज़ों में हैं, जिनमें से आधी चीनी कंपनियों द्वारा विकसित की जा रही हैं. ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के अलावा चीनी कंपनी सीनोवाक द्वारा विकसित की जा रही वैक्सीन दुनिया की तीसरी वैक्सीन है जो ह्यूमन ट्रायल के तीसरे फेज़ में पहुंची है. बड़े पैमाने पर इसकी टेस्टिंग ब्राज़ील के छह राज्यों और बांगलादेश में की जाना तय हो गया है.
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