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जानिए कितना खतरनाक है आतंकी संगठन जमात उल मु​जाहिदीन, निशाने पर है भारत

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Updated: October 15, 2019, 7:59 PM IST
जानिए कितना खतरनाक है आतंकी संगठन जमात उल मु​जाहिदीन, निशाने पर है भारत
भारत ने इसी साल जेएमबी को प्रतिबंधित किया था.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बांग्लादेश में जड़ें रखने वाले जिस आतंकवादी संगठन (Terror Outfit) का नेटवर्क देश में गुपचुप फैलने की बात कही है, उसके बारे में क्या जानते हैं आप?

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  • Last Updated: October 15, 2019, 7:59 PM IST
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जमात उल मु​जाहिदीन (Jamaat Ul Mujahidin) बांग्लादेश में जड़ें रखने वाला आतंकी गिरोह है, जो भारत में अपना नेटवर्क (Terror Network) फैला रहा है. एनआईए (National Investigative agency) प्रमुख के बयान के हवाले से खबरें हैं कि जांच एजेंसी ने देश के संबंधित राज्यों को इस संगठन के 125 संदिग्धों की सूची देकर सतर्कता बरतने को कहा है. बांग्लादेश (Bangladesh) बेस्ड इस आंतकी संगठन को जेएमबी के नाम से जाना जाता है लेकिन जमात उल मुजाहिदीन हिंदोस्तान और जमात उल मु​जाहिदीन इंडिया के नाम से भी यह सक्रिय देखा जा चुका है. इस आतंकी संगठन के बारे में तमाम ज़रूरी बातें जानने लायक हैं.

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एनआईए ने झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र (Maharashtra), कर्नाटक और केरल (Kerala) के साथ जेएमबी से जुड़े सवा सौ संदिग्धों की सूची साझा की है. साथ ही, एटीएस (ATS) को भी निर्देशित किया जा चुका है. क्या है जेएमबी का इतिहास? कितना खतरनाक है ये आतंकी संगठन (Terrorist Organisation)? ऐसे कई सवालों के साथ ये भी जानिए कि इसकी शुरूआत कैसे हुई थी, इसका नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके मंसूबे क्या हैं.

इस्लामी देश बनाने का मंसूबा

साल 1998 में मौलाना अब्दुर रहमान उर्फ शेख अब्दुर रहमान ने इस आतंकी संगठन की नींव रखी थी. इस संगठन का मूल विचार बांग्लादेश की सरकार को गिराकर शरीयत के कानून के मुताबिक बांग्लादेश को एक पूर्ण इस्लामी देश बनाना है. इस संगठन ने कई तरह के पर्चे छापकर बार बार ये इरादा ज़ाहिर किया है कि कुरआन और अल्लाह का ही हुक्म कानून के तौर पर मानने लायक है, लोकतंत्र आधारित किसी सरकार का नहीं.

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इस साल जुलाई में जेएमडी से जुड़े तीन आतंकी उत्तर पूर्व भारत में पकड़े गए थे.

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सेक्युलरों का विरोधी है ये हार्डकोर गिरोह
अपने पर्चों में जेएमबी साफ ज़ाहिर करता रहा है कि वह सेक्युलर, समाजवादी और लेफ्ट विचारधारा के अतिवादियों के खिलाफ है. एनवायटी की 2016 की एक रिपोर्ट की मानें तो बांग्लादेश सरकार ने माना था कि कई ब्लॉगरों की हत्या के पीछे जेएमबी का ही हाथ था. गौरतलब है कि वामपंथी विचारों के लिए मशहूर कई ब्लॉगरों को पिछले एक दशक में बांग्लोदश में मौत के घाट उतारा गया. इसके साथ ही, जेएमबी खुले सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सिनेमाघरों, दरगाहों और एनजीओ जैसे संगठनों के खिलाफ है क्योंकि उसके मुताबिक़ ये इस्लाम के अनुसार मान्य नहीं हैं.

कितना कुख्यात और खतरनाक है जेएमबी?
स्थापना के तीन साल बाद 2001 में ये गिरोह पहली बार तब कुख्यात हुआ था, जब दिनाजपुर ज़िले में इस संगठन की गतिविधियों से जुड़े दस्तावेज़ और बम बरामद किए गए थे. फरवरी 2005 में बांग्लादेश ने जेएमबी को आधिकारिक रूप से आतंकवादी संगठन घोषित कर प्रतिबंधित किया था जब एनजीओ पर हमले किए जाने की घटनाएं हुई थीं. हडसन इंस्टिट्यूट के एक लेख के मुताबिक प्रतिबंध का बदला लेने के लिए जेएमबी ने अगस्त 2005 में बांग्लादेश में 300 जगहों पर 500 बम प्लांट किए थे.

इसके बाद इस संगठन के नेताओं को पकड़ा गया था. फिर ये संगठन 2016 में नए सिरे से खड़ा हुआ और लेखकों और ब्लॉगरों को इसने निशाना बनाते हुए उत्तरी बांग्लादेश में कई हत्याएं कीं, जिनमें लेफ्ट और सेक्युलर विचार रखने वाले कई लोग मारे गए.


ऐसे कसा गया शिकंजा
मौलाना रहमान के साथ ही इस संगठन की बुनियाद में सिद्दीकुल इस्लाम उर्फ बंग्ला भाई का नाम लिया जाता है. 2005 और 2006 में जजों की हत्याओं समेत बड़ी आतंकी घटनाओं के बाद बांग्लादेश ने इस गिरोह के रहमान और बंग्ला भाई के साथ ही चार अन्य नेताओं को कानूनी कार्रवाई के बाद 2007 में सज़ा ए मौत दे दी थी. इसके बाद ये गिरोह कुछ सालों के लिए ठंडा पड़ गया था.

कितना बड़ा है नेटवर्क?
राजशाही, खुलना, ढाका और चटगांव के क्षेत्रों में यह संगठन अब भी गहरी जड़ें रखता है. आईसीटी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि जेएमबी के पास 10 हज़ार आतंकियों का नेटवर्क है और 2000 फिदायीनों यानी आत्मघाती हमलावरों की ब्रिगेड भी है. साथ ही, जमात उल इस्लामी यानी जेआई जैसे संगठनों के साथ ही इस आतंकी गिरो​ह के तार अल कायदा के फंड से चलने वाले जेएमजेबी जैसे गिरोहों के साथ भी जुड़े हैं जो पूरी दुनिया में जिहादी एजेंडा के लिए सक्रिय हैं.

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एनआईए ने माना है कि 2014 से 2018 के बीच जेएमबी ने बेंगलूरु में 20 से 22 गुप्त ठिकाने बना लिये हैं.


कई देशों के लिए है खतरा
इसी साल मई महीने में भारत ने जमात उल मुजाहिदीन को आतंकवादी संगठन मानकर प्रतिबंधित घोषित किया था. ईटी की एक रिपोर्ट की मानें तो गृह मंत्रालय ने प्रतिबंध के पीछे कारणों में ये माना था कि बांग्लादेश का यह संगठन आतंकवादी गतिविधियों के लिए भारत में नेटवर्क तैयार करने के साथ ही कट्टरपंथ फैलाकर मुजाहिद तैयार और भर्ती कर रहा है. भारत के अलावा यूनाइटेड किंगडम में भी इस संगठन को आतंकी सूची में रखा गया है.

ताज़ा खबरों के मुताबिक एनआईए ने माना है कि 2014 से 2018 के बीच जेएमबी ने बेंगलूरु में 20 से 22 गुप्त ठिकाने बना लिये हैं और दक्षिण भारत में और नेटवर्क फैल रहा है. यही नहीं, ये भी खुलासा है कि कर्नाटक बॉर्डर के पास कृष्णागिरि में जेएमबी ने रॉकेट लॉंचर का ट्रायल भी किया. कुल मिलाकर अब सुरक्षा एजेंसियां इस संगठन पर लगाम कसने के मूड में आ चुकी हैं.

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First published: October 15, 2019, 6:03 PM IST
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