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जानिए उस बड़ौदा राजपरिवार के बारे में, जिसकी वजह से BJP में गए सिंधिया

News18Hindi
Updated: March 17, 2020, 6:25 PM IST
जानिए उस बड़ौदा राजपरिवार के बारे में, जिसकी वजह से BJP में गए सिंधिया
बड़ौदा राजपरिवार का महल लक्ष्मी निवास पैलेस भारत की भव्य इमारतों में गिना जाता है.

गायकवाड़ राजपरिवार में ज्योतिरादित्य सिंधिया की ससुराल है. माना जा रहा है कि सिंधिया के बीजेपी में जाने के पीछे इस परिवार का बड़ा रोल है.

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  • Last Updated: March 17, 2020, 6:25 PM IST
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मध्य प्रदेश की राजनीति में बीते कुछ दिनों में बड़ा बदलाव आया है. मध्य प्रदेश कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में शुमार किए जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी ने पार्टी में तवज्जो नहीं दी. कहा जा रहा है कि सिंधिया के बीजेपी में जाने के पीछे बड़ौदा राजपरिवार का बड़ा रोल है. बड़ौदा राजपरिवार ज्यातिरादित्य सिंधिया का ससुराल है. ससुराल पक्ष से बड़ौदा राजपरिवार की महारानी राजमाता शुभांगिनी देवी गायकवाड ने उनके एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच मध्यस्थता कराने में अहम भूमिका निभाई.

ज्योतिरादित्य की पत्नी प्रियदर्शनी बड़ौदा के गायकवाड राजघराने से हैं. इस वजह से उनका वहां अक्सर आना जाना रहता है. बड़ौदा की महारानी का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अत्यधिक सम्मान करते हैं और उनसे उनके अच्छे संबंध हैं. शुभांगिनी राजे वर्तमान में बड़ौदा के अनाधिकारिक राजा समरजीत सिंह की मां हैं. उनके पति रणजीत सिंह गायकवाड बड़ौदा राजघराने के 1988 से 2012 तक वारिस थे.

शुभांगिनी राजे


दिलचस्प है कि शुभांगिनी राजे का ताल्लुक भी उसी ग्वालियर से है जहां के राजघराने के अभी ज्योतिरादित्य सिंधिया उत्तराधिकारी हैं. शुभांगिनी ग्वालियर के शाही जाधव परिवार से हैं. वो गुजरात से लोकसभा चुनाव भी लड़ चुकी हैं, वो भी एक बार नहीं बल्कि दो बार. पहली बार 1996 में निर्दलीय तो दूसरी बार 2004 में बीजेपी के टिकट पर. दोनों बार उन्होंने खेड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. हालांकि उन्हें दोनों बार हार नसीब हुई. साल 2014 में नरेंद्र मोदी पीएम पद के लिए बीजेपी के प्रत्याशी थे तब उन्होंने बड़ौदा से भी चुनाव लड़ा था और प्रचंड जीत हासिल की थी. तब उनकी प्रस्तावक शुभांगिनी राजे ही थीं.



कांग्रेस में थे पति रणजीत सिंह
फिलहाल भले ही शुभांगिनी राजे के बीजेपी के साथ अच्छे संबंध हों लेकिन उनके पति ने हमेशा कांग्रेस से सियासत की थी. वो 1980 से 89 तक बड़ौदा के सांसद थे. तब गुजरात की राजनीति में दिग्गज कांग्रेसी नेता माधव सिंह सोलंकी का सिक्का चला करता था. एक आकलन के मुताबिक इस राजघराने के पास इस समय करीब 20 हजार करोड़ की संपत्ति है. राजघराने का निवास स्थल लक्ष्मीनिवास पैलेस ही करीब 600 एकड़ में फैला हुआ है.

ये है राजपरिवार का इतिहास
गायकवाड़ राजपरिवार का इतिहास भी सिंधिया और होल्कर राजघरानों से मेल खाता हुआ है. 18वीं सदी की शुरुआत में जब मराठा साम्राज्य में बाजीराव पेशवा का सिक्का चलता था तब उन्होंने बड़ौदा शहर का हेड पिलाजी राव गायकवाड़ को बनाया था. पिलाजी राव गायकवाड़ को गायकवाड़ राजवंश का संस्थापक माना जाता है.

बाद में इस परिवार ने जब पेशवाई के खिलाफ विद्रोह किया था तब बाजीराव के बेटे नाना साहेब ने पिलाजी के बेटे को गिरफ्तार भी करवा लिया. फिर इसी शर्त पर पिलाजी राव को छोड़ा गया कि वो पेशवाई की अधीनता स्वीकार करेंगे.

बाद में मराठा-ब्रिटिश युद्ध में मराठा साम्राज्य कमजोर पड़ने लगा तो गायकवाड़ों ने खुद स्वायत्त घोषित कर दिया. बड़ौदा को विकास में इस परिवार को बड़ा हाथ रहा है.

सायाजी राव


इसी राजपरिवार के सायाजी राव तृतीय ने बड़ौदा के आधुनिकीकरण के लिए बड़े प्रयास किए. 1875 में गद्दी पर बैठे सायाजी राव ने राज्य में अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा, लाइब्रेरी सिस्टम जैसे चीजें लागू की थीं. बड़ौदा टेक्सटाइल इंडस्ट्री को खड़ा करने में भी उनका काफी योगदान था. ये सायाजी राव थे जिन्होंने भीम राव अंबेडकर को कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप ऑफर की थी.
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First published: March 17, 2020, 5:59 PM IST
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