रिजल्ट्स के बीच जानिए किस देश का एजुकेशन सिस्टम है दुनिया में नंबर 01

रिजल्ट्स के बीच जानिए किस देश का एजुकेशन सिस्टम है दुनिया में नंबर 01
फिनलैंड के स्कूलों में पढ़ाई का तौरतरीका ही अलग है. इसमें कोशिश की जाती है कि बच्चों को नंबर की स्पर्धा से दूर रखा जाए और स्वस्थ माहौल दिया जाए

इन दिनों हमारे देश में अलग अलग राज्यों और शिक्षा बोर्डों के रिजल्ट्स आ रहे है. इन रिजल्ट्स के भी अपने तनाव और दबाव हैं. लेकिन दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जो अपने एजुकेशन सिस्टम से नई उम्मीद जगा रहा है. जानिए इस देश के बेहतरीन एजुकेशन सिस्टम के बारे में.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 29, 2020, 11:45 AM IST
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अगर आप दुनिया के बेहतरीन स्कूलों के बारे में गूगल पर सर्च करेंगे तो फिनलैंड सबसे ऊपर होगा. यहां का एजुकेशन सिस्टम अमेरिका, ब्रिटेन या अन्य देशों की तुलना में एकदम अलग है. फिनलैंड आज से नहीं बल्कि दशकों से इस मामले में बहुत आगे रहा है.

फिनलैंड का एजुकेशन सिस्टम स्टूडेंट्स को एक अलग तरह की स्वतंत्रता तो देता ही है, साथ में क्रिएटिविटी के लिए लगातार उत्साहित भी करता है. उसका फंडा ऊंचे नंबरों के लिए कम्पटीटिव दौड़ का है ही नहीं.

ये सिस्टम उन तमाम देशों को सीख देता है, जो आज भी नंबर रेस, एग्जाम और कंपटीशन में अपने स्टूडेंट को फंसाए रखकर दबाव और तनाव को जगह देते हैं.



16 साल की उम्र तक कोई एग्जाम नहीं
यहां जब बच्चा सात साल का हो जाता है तब उसकी फॉर्मल स्कूलिंग शुरू होती है. जब तक बच्चा 16 का नहीं हो जाता तब वो किसी भी तरह के एग्जाम में नहीं बैठता.

सात साल से पहले हर बच्चे को शुरुआती चाइल्डहुड एजुकेशन दी जाती है और उनकी केयर होती है. इसमें हर बच्चे पर खास ध्यान दिया जाता है. इस शुरुआती शिक्षा का औपचारिक शिक्षा से कोई लेना देना नहीं होता बल्कि उसकी हेल्थ और अच्छा इंसान होने पर जोर होता है.

फिनलैंड में टीचर हर बच्चे की ऊर्जा और संभावना को पहचान कर उसे विकसित करते हैं


कभी होमवर्क नहीं मिलता
फिनलैंड के सिस्टम में कोशिश की जाती है कि हर बच्चे की ऊर्जा को पहचाना जाए. यहां के बच्चे शायद ही कभी घर में होमवर्क करते हैं. यहां के शिक्षकों को पूरी छूट होती है कि वो अपने तरीकों से बच्चों को इस तरह पढ़ा सकते हैं जिससे उनकी पढाई आसान हो और एक्सपेरिमेंट का भी विकल्प मिले. ये ऐसा भी होता है कि बच्चा खुशी खुशी पढने में दिलचस्पी ले.

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अपना मूल्यांकन बच्चे खुद करते हैं
फिनलैंड में बच्चे 16 साल की उम्र तक किसी भी तरह के नेशनल टेस्ट में नहीं बैठते. उनका मूल्यांकन कई आधार पर करते हैं. कुल मिलाकर बेसिक एजुकेशन पॉलिसी ऐसी है जहां टीचर बच्चे में ये क्षमता पैदा करे कि वो अपना मूल्यांकन खुद ब खुद कर सकें. इससे बच्चे अपनी ग्रोथ और लर्निंग प्रोसेस को लेकर खुद सतर्क रहते हैं.

फिनलैंड में औपचारिक शिक्षा सात साल की उम्र के बाद शुरू होती है


भारत में सीबीएसई का नया पैटर्न काफी हद तक फिनलैंड के एजुकेशन सिस्टम की अच्छी बातों को लागू करने की कोशिश कर रहा है.

विज्ञान और गणित में सबसे अच्छा करते हैं यहां के बच्चे
प्रोग्राम फ़ॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट (पीआईएसए) के मुताबिक़ बाकी मुल्क़ों की तुलना में फ़िनलैंड के बच्चे विज्ञान और गणित में अच्छा कर रहे हैं. लेकिन साल 1960 के अंत तक माहौल ऐसा नहीं था. फ़िनलैंड में महज़ 10 फ़ीसदी बच्चे ही ऐसे थे जो दसवीं तक की भी पढ़ाई पूरी करते थे.

फ़िनलैंड के अनिवार्य एजुकेशन सिस्टम यानी पेरूस्कोलु के सफलता की कहानी शुरू होती है साल 1970 में...लेकिन इसमें चार-चांद लगे 1990 के दौरान. इस दौरान शिक्षा को लेकर समय-समय पर बहुत से सुधार होते रहे.

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सभी स्कूलों में अमीर और गरीब बच्चे साथ पढ़ाई करते हैं
राजधानी हेलसिंकी के स्कूलों में अमीर घरों के बच्चे और वर्किंग क्लास के बच्चे साथ-साथ बैठकर पढ़ाई करते हैं. उन्हें कोई फ़ीस नहीं देनी होती है और स्कूल से जुड़ी सारी सामग्रियां उन्हें मुफ़्त में मुहैया कराई जाती हैं. बड़े-बड़े भोजनालयों में, प्राइमरी से लेकर दसवीं तक के 940 बच्चों को यहां खाना परोसा जाता है. ऐसी ही स्थिति फिनलैंड के अन्य शहरों और स्कूलों की भी है.

सामाजिक ढांचा भी है एजुकेशन सिस्टम की सफलता के पीछे
सभी बच्चों को मेडिकल, दांत से जुड़ी समस्याओं के लिए मदद दी जाती है. बच्चों के मानसिक विकास के लिए साइकोलॉजिस्ट की मदद भी दी जाती है. वो कहते हैं कि फ़िनलैंड के एजुकेशन सिस्टम की सफलता के पीछे एक बहुत बड़ा कारण यहां का आर्थिक ढांचा है. जो लालन-पालन और समाजिक न्याय को बढ़ावा देता है, ये ढांचा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनाया गया.

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टीचर रोज केवल चार घंटे देता है
अगर फिनलैंड के एक आदर्श स्कूल की बात करें तो यहां टीचर एक दिन में चार घंटे का समय देते हैं. उनके पास अपनी क्लास की योजना बनाने का पूरा वक़्त होता है, वो अपनी जानकारी को खंगाल सकते हैं और बच्चों पर ज़्यादा से ज़्यादा ध्यान दे पाते हैं.

स्कूल में सबसे कम घंटे गुजारते हैं यहां बच्चे
फ़िनलैंड में स्कूल के घंटे दूसरे देशों की तुलना में कम हैं. मसलन, प्राइमरी स्कूल के बच्चे को यहां स्कूल में एक साल में सिर्फ़ 670 घंटे ही गुज़ारने होते हैं. जबकि कोस्टारिका में इसका दोगुना और अमरीका में तो हर साल हज़ार घंटे.
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